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लाखों लोग रात में काम करते हैं, लेकिन लगातार हो रहे शोध कार्यों से वैज्ञानिकों को पता चल रहा है कि रात में काम करना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है। हाल ही में इटली में वैज्ञानिकों के एक समूह ने पाया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को अधिक पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होती है, जिससे स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों सहित कई लोगों के जीवन की गुणवत्ता बिगड़ जाती है। यह शोध में शामिल उन युवा लोगों के बारे में भी सच है, जिन्हें आमतौर पर अतिसक्रिय मूत्राशय का रोग (ओवर एक्टिव ब्लैडर सिंड्रॉम) होने की उम्मीद नहीं होती है। शोध के ये परिणाम बार्सिलोना में यूरोपीयन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में रखे गए हैं। 

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रोम के सेंट एंड्रिया अस्पताल के शोधकर्ताओं ने मार्च और अक्टूबर 2018 के बीच 68 पुरुषों और 68 महिलाओं का सर्वेक्षण किया। सभी इटली के नेशनल हेल्थ सिस्टम के कर्मचारी थे, जिनमें से 66 कर्मचारी नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे। इनका काम करने का औसतन समय प्रति रात 11 घंटे था। दिन की शिफ्ट वाले 70 कर्मचारियों ने औसतन 9.1 घंटे प्रति दिन काम किया। जब दिन की शिफ्ट वालों के साथ तुलना की गई तो रात में काम करने वाले कर्मचारियों में शोधकर्ताओं को अतिसक्रिय मूत्राशय की उच्च दर और जीवन की खराब गुणवत्ता का पता चला। शोध में शामिल सभी कर्मचारियों की उम्र 50 वर्ष से कम थी।

ओवर एक्टिव ब्लैडर की समस्या पर बनी मेडिकल क्षेत्र में आमतौर पर स्वीकृत प्रश्नावली का उपयोग करते हुए, शोध टीम ने पाया कि रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का औसत स्कोर 31 था, वहीं दिन की शिफ्ट में काम करने वालों का स्कोर 19 था। टीम ने यह भी पाया कि रात के कर्मचारियों ने जीवन की गुणवत्ता के विषय में भी काफी खराब प्रदर्शन किया, जिसमें उनका स्कोर 41 तथा दिन के कर्मचारियों का स्कोर 31 था। (यहां अधिक स्कोर का अर्थ है, स्थिति अधिक खराब होना)

रिसर्च के लीडर, डॉ कॉसिमो डी नुन्जियो ने कहा, "हम जानते हैं कि लंबे समय तक रात में काम करना तनावपूर्ण होता है और स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े हुए स्तर के साथ जुड़ा हुआ है। यह शोध दिखाता है कि रात में लगातार काम करने वालों में पेशाब आने की आवृति अधिक होने के साथ-साथ उनके स्वयं के जीवन की गुणवत्ता में कमी भी हो सकती है। इसके अलावा, हमने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों में इन परिवर्तनों को मापा है, जो स्वयं अन्य रोगियों की देखभाल का कार्य करते हैं। यदि वे खुद स्वस्थ महसूस नहीं करते हैं, तो यह रोगी की खराब देखभाल को प्रेरित करेगा। शायद यह कई अन्य व्यवसायों में भी सच है। इस शोध के बारे में सबसे अधिक ध्यान देने वाली चीजों में से एक है कि हमारे शोध में शामिल हर व्यक्ति 50 साल से कम उम्र का था। हम आम तौर पर अधिक उम्र वाले लोगों में मूत्राशय की समस्याओं की उम्मीद करते हैं, लेकिन इस शोध में युवा लोग अपने जीवन की बिगड़ती गुणवत्ता को व्यक्त करते हैं।"

शोधकर्ताओं ने इस तरफ भी ध्यान दिलाया है कि शोध में शामिल नमूने का आकार बहुत छोटा है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन परिणामों को एक बड़े अध्ययन में पुन: प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, जिसमें शोध के लिए एक लंबी अवधि का भी पालन किया गया हो। 

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