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परिचय

गले में इन्फेक्शन वायरस या बैक्टीरिया की वजह से होता है, जिसके कारण गले में दर्द, सूजन व जलन होने लगती है। गले में संक्रमण के मुख्य लक्षणों में गले में दर्द, खांसी, नाक बहना, बुखार और गर्दन में स्थित लसीका ग्रंथि की सूजन आदि शामिल है। यदि गले में इन्फेक्शन बैक्टीरिया के कारण हुआ है तो उसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं द्वारा किया जाता है। यदि वायरस के कारण हुआ है तो उसका इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ती वह अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि फिर भी इसके लक्षणों का इलाज करवाना जरूरी होता है। 

गले के इंफेक्शन का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों से जुड़े कुछ सवाल पूछेंगे और आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे। इसके अलावा आपको ब्लड टेस्ट और थ्रोट स्वैब कल्चर आदि जैसे टेस्ट करवाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। गले के इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए कई घरेलू उपाय भी उपलब्ध हैं जैसे लहसुन, अदरक और शहद का सेवन करना और हल्के गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारे करना आदि शामिल है। 

(और पढ़ें - नमक के पानी के फायदे)

यदि बैक्टीरिया के कारण हुए गले के इन्फेक्शन का समय पर इलाज ना किया जाए तो इसके कारण रूमेटिक फीवर हो जाता है, जो हृदय को प्रभावित करता है। 

(और पढ़ें - हृदय रोग के लक्षण)

  1. गले में इन्फेक्शन क्या है - What is Throat Infection in Hindi
  2. गले में इन्फेक्शन के लक्षण - Throat Infection Symptoms in Hindi
  3. गले में इन्फेक्शन के कारण व जोखिम कारक - Throat Infection Causes & Risk Factors in Hindi
  4. गले का संक्रमण से बचाव - Prevention of Throat Infection in Hindi
  5. गले का संक्रमण का परीक्षण - Diagnosis of Throat Infection in Hindi
  6. गले में इन्फेक्शन का इलाज - Throat Infection Treatment in Hindi
  7. गले में इन्फेक्शन की जटिलताएं - Throat Infection Complications in Hindi
  8. गले में इन्फेक्शन की दवा - Medicines for Throat Infection in Hindi
  9. गले में इन्फेक्शन की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Throat Infection in Hindi
  10. गले में इन्फेक्शन के डॉक्टर

गले में इन्फेक्शन क्या है - What is Throat Infection in Hindi

गले का संक्रमण क्या है? 

आमतौर पर यह गले में होने वाला एक इन्फेक्शन होता है, जो बैक्टीरिया या किसी वायरस के कारण होता है। यह समस्या ज्यादातर छोटे बच्चों और उन लोगों को होती है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो गई है (जैसे एड्स व डायबिटीज के मरीज)।

 

गले में इन्फेक्शन के लक्षण - Throat Infection Symptoms in Hindi

गले में इन्फेक्शन के क्या लक्षण होते हैं?

गले में इन्फेक्शन के कारण होने वाले लक्षण पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, जी मिचलाना और बेचैनी या घबराहट होना आदि। ये लक्षण वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों में मौजूद रहते हैं।

(और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)

इस संक्रमण की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकती है। गले का इन्फेक्शन होने पर कुछ लोगों को हल्के लक्षण महसूस होते हैं, जैसे गले में दर्द। इसी तरह कुछ लोगों में बेहद गंभीर लक्षण भी नजर आते हैं जैसे तेज बुखार या फिर निगलने में कठिनाई महसूस होना। गले में संक्रमण होने पर जो लक्षण नजर आते हैं, वे कुछ इस प्रकार हैं: 

  • अचानक से बुखार होना (खासकर 101˚F या उससे ऊपर)
  • गले में दर्द के साथ-साथ लगा लाल हो जाना और उसमें सफेद धब्बे पड़ जाना
  • टॉन्सिल में मवाद बनने लगना
  • टॉन्सिल में सूजन
  • गले और टॉन्सिल्स में सफेद परत जम जाना
  • गले की लसीका ग्रंथि में सूजन आना या उसका आकार बढ़ जाना
  • छाती पर हल्के लाल रंग के चकत्ते बन जाना (कभी-कभी ये पूरे शरीर पर भी हो जाते हैं)
  • मुंह के अंदर फफोले बनना
  • निगलने में कठिनाई होना
  • सिरदर्द होना
  • ठंड लगना
  • भूख कम लगना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि निम्न में से कोई भी समस्या हो रही है तो आपको डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • गले में दर्द होना साथ ही सफेद रंग के धब्बे बनना (और पढ़ें - गले में दर्द के उपाय)
  • बार-बार गले में संक्रमण होना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • निगलने में परेशानी 
  • मुंह खोलने में कठिनाई
  • थूक या बलगम के साथ खून आना
  • टॉन्सिल और मुंह की ऊपरी तरफ गहरे लाल रंग के निशान या धब्बे पड़ जाना
  • गले में दर्द के साथ त्वचा पर हल्के या गुलाबी रंग के चकत्ते बनना

गले में इन्फेक्शन के कारण व जोखिम कारक - Throat Infection Causes & Risk Factors in Hindi

गले में इन्फेक्शन क्यों होता है?

गले का इन्फेक्शन आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के द्वारा संक्रमण फैलाने से होता है।

गले में इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया या वायरस अक्सर किसी ऐसे दूसरे व्यक्ति से संपर्क करने से प्राप्त होते हैं, जो पहले ही संक्रमित होता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता,खांसता या बोलता है तो उसके मुंह से द्रव की सूक्ष्म बूंदें निकलती हैं जो हवा में मिल जाती हैं, इन बूंदों में वायरस या बैक्टीरिया होते हैं।

सांस लेने के दौरान जब ये सूक्ष्म बूंदे किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चली जाती हैं तो उन्हें भी यह संक्रमण हो जाता है। इसी तरह संक्रमित जगह को छूकर अपने मुंह को छू लेने से भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। 

गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन:

वायरल इन्फेक्शन के मुकाबले बैक्टीरियल इन्फेक्शन कम ही हो पाता है, लेकिन गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कुछ ध्यान देने योग्य लक्षण होते हैं:

  • स्ट्रेप थ्रोट - यह गले में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का सबसे मुख्य कारण होता है।
  • काली खांसी - खांसी करने के दौरान “हू-हू” की आवाज निकलना काली खांसी का मुख्य लक्षण होता है।

गले में वायरल इन्फेक्शन:

वायरस के द्वारा गले में फैलाए जाने वाले इन्फेक्शन के मुख्य कारण निम्न हैं:

गले में इंफेक्शन होने की आशंका किन वजहों से बढ़ जाती है?

  • कम उम्र - बैक्टीरिया के कारण होने वाले टॉन्सिल का संक्रमण खासकर 5 से 15 साल के बच्चों को ही होता है। 
  • बार-बार संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आना - स्कूल में या डे केयर सेंटर, जहां पर कई बच्चें एक साथ होते हैं वहां रहने पर स्वस्थ बच्चें में इसके संक्रमण की आशंका रहती है। इसी तरह जो लोग शहरों में रहते हैं और पब्लिक बसों या अन्य वाहनों में यात्राएं करते हैं, उनमें भी टॉन्सिल के रोगाणुओं के संपर्क में आने का जोखिम अधिक बढ़ जाता है। 
  • विशेष मौसम - बैक्टीरिया द्वारा फैलाया जाने वाले गले का संक्रमण आमतौर पर पतझड़ और शुरूआती वसंत ऋतू में ही अधिक होता है। 
  • कोई गंभीर संक्रमण होने का जोखिम बढ़ जाना - उदाहरण के लिए एचआईवी एड्स या डायबिटीज जैसे किसी रोग के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक कमजोर हो जाना। 
  • प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर हो जाना - रोगों के अलावा कुछ दवाएं भी हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर बना देती हैं, जैसे कैब्रिमाजोल। इस दवा का उपयोग थायराइड बढ़ने का इलाज करने के लिए किया जाता है। (और पढ़ें - थायराइड में परहेज)

गले का संक्रमण से बचाव - Prevention of Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन की रोकथाम कैसे करें?

यदि आपको गले का इन्फेक्शन है तो उसे बाकी सदस्यों में फैलने से रोकने के लिए कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  • जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते अन्य सदस्यों के संपर्क में कम से कम आने की कोशिश करें। हालांकि, कई वायरस लक्षण शुरू होने से पहले ही अधिक फैलते हैं। 
  • बार-बार हाथ धोना गले में संक्रमण समेत अन्य कई संक्रमणों से बचने का सबसे बेहतर तरीका है। यदि आप किसी ऐसी जगह पर हैं जहां पर संक्रमण फैलने की आशंका अधिक होती है जैसे अस्पताल, स्कूल या भीड़ वाले क्षेत्र आदि तो बार-बार हाथ धोना और अधिक सहायक हो सकता है। 
  • खांसने, छींकने या नाक साफ करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए।
  • साफ पानी से हाथ भिगोने के बाद हाथों पर साबुन लगाएं और हाथों को आगे और पीछे से खूब रगड़ते हुऐ साफ करें। उंगलियों के बीच की जगह और नाखूनों के नीचे की जगह को भी अच्छे से साफ करें और फिर साफ पानी के साथ साबुन को धो कर उन्हें एक साफ तौलिये के साथ पोंछ लें। 
  • अगर किसी समय आपके पास हाथ धोने के लिए साबुन व पानी उपलब्ध ना हो, तो आप उसकी जगह पर हैंड सेनिटाइजर्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। खास तौर पर तब, जब आप जहां जा रहे हैं वहां उचित स्वच्छता के प्रबंध न हो।
  • यदि आपके घर में किसी को स्ट्रेप थ्रोट हो गया है तो उसके साथ भोजन व बर्तन आदि शेयर ना करें और उनके संपर्क से दूर रहने की कोशिश करें।
  • उनके साथ मुंह के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले कपड़े जैसे रूमाल या मफलर, तकिये आदि भी ना शेयर करें। 
  • कपड़ों और बर्तनों आदि को साबुन और गर्म पानी के साथ धोना चाहिए। 
  • खांसी करते या छींकते समय अपने मुंह को रूमाल या किसी कपड़े से ढक लें। (और पढ़ें - खांसी के घरेलू उपाय
  • सिगरेट ना पिएं और यदि कोई सिगरेट पी रहा है तो उससे दूर रहें क्योंकि धुंआ आपके गले के इन्फेक्शन को और बदतर बना सकता है। (और पढ़ें - सिगरेट पीने के नुकसान)
  • आहार में कुछ प्रकार के बदलाव से भी गले के संक्रमण से होने वाले लक्षणों  को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • खूब मात्रा में पानी पिए, पानी पीने से आप हाइड्रेट रहेंगे और आपका गला भी नम रहेगा, जिससे आपको निगलने से होने वाली तकलीफ कम हो जाएगी। ऐसे भोजन खाएं जो नरम हों और जिनको आसानी से निगला जा सके जैसे, सूप और दही आदि। खट्टे और अधिक मसाले वाले भोजन से बचें, क्योंकि ये आपके गले को और खराब कर सकते हैं।

(और पढ़ें - फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए आहार)

गले का संक्रमण का परीक्षण - Diagnosis of Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन का परीक्षण कैसे किया जाता है?

गले में संक्रमण का ठीक से परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण करते हैं और आपसे आपकी पिछली मेडिकल जानकारियों के बारे में पता करते हैं।

परीक्षण के दौरान डॉक्टर लिम्फ नोड्स में सूजन का पता लगाने के लिए गले का परीक्षण करते हैं और संक्रमण के संकेतों को ढूंढने के लिए नाक व कान की जांच करते हैं। 

(और पढ़ें - कफ निकालने के उपाय)

यह बताना काफी मुश्किल होता है कि गले में संक्रमण वायरस या बैक्टीरिया में से किसके कारण हुआ है। 

परीक्षण के दौरान निम्न टेस्ट करने की आवश्यकता पड़ सकती है:

  • थ्रोट स्वैब - स्ट्रेप थ्रोट इन्फेक्शन की जांच करने के लिए थ्रोट स्वैब टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट का रिजल्ट कुछ ही मिनटों में आ जाता है। यदि थ्रोट स्वैब टेस्ट का रिजल्ट नकारात्मक (नेगेटिव) आता है, तो डॉक्टर अन्य संभावित बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए थ्रोट कल्चर टेस्ट करते हैं। इस टेस्ट का रिजल्ट आने में 24 घंटे तक का समय लग जाता है। 
  • वायरल इन्फेक्शन की पहचान के लिए विशेष प्रकार के ब्लड टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है, जैसे मोनोन्यूक्लिओसिस।
  • कम्पलीट ब्लड काउंट

(और पढ़ें - कफ के कारण)

गले में इन्फेक्शन का इलाज - Throat Infection Treatment in Hindi

गले में इन्फेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है?

अपनी ताकत हासिल करने और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन देने के लिए आराम करना बहुत जरूरी होता है। 

  • रात को पर्याप्त नींद लें
  • एक या दो दिनों के लिए स्कूल या काम से छुट्टी ले लें और घर पर आराम करें। 

(और पढ़ें - फेफड़ों के कैंसर के उपचार)

एंटीबायोटिक - 

बैक्टीरिया के कारण होने वाले इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। यदि आपको पेनिसिलिन (Penicillin) दवाओं से एलर्जी नहीं है, तो खासतौर पर पेनिसिलिन या एमोक्सिलिन (Amoxicillin) दवाएं दी जाती हैं। यदि आपको पेनिसिलिन दवाओं से एलर्जी होती है तो अन्य प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती है। 

एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा डॉक्टर आपको कुछ ईबूप्रोफेन (Ibuprofen) और एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) जैसी कुछ ओवर-द-काउंटर दवाएं लेने का सुझाव दे सकते हैं। 

(और पढ़ें - फेफड़ों में इन्फेक्शन)

टोंसिल्लेक्टोमी (Tonsillectomy) - 

यह एक सर्जिकल प्रक्रिया होती है जिसके द्वारा टॉन्सिल को निकाल दिया जाता है (गले के अंदर दोनों तरफ जो मांस की गांठ होती हैं उन्हें टॉन्सिल कहा जाता है)

यदि आपको या आपके बच्चे को बार-बार टॉन्सिलाइटिस हो रहा है तो डॉक्टर टोंसिल्लेक्टोमी करने के बारे में सोच सकते हैं। 

(और पढ़ें - फेफड़ों के कैंसर का ऑपरेशन)

प्राकृतिक उपचार

  • नमक के पानी के साथ गरारे करना - 
    यह सबसे पुराना और सबसे आसान घरेलू उपचार है। नमक में कमाल के एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। हल्का गर्म पानी लें और उसमें थोड़ा नमक मिला लें और फिर इस पानी से गरारे करें। यह दिन में कम से कम दो या तीन बार करना चाहिए। नमक के पानी से गरारे करने से गले में स्थित बैक्टीरिया निकल जाते हैं और गले में जलन पैदा करने वाले एसिड बेअसर हो जाते हैं। 
     
  • शहद - 
    इसकी मदद से गले में सूजन व जलन को कम करने में मदद मिलती है। शहद जुकाम के लिए भी बहुत अच्छा घरेलू उपचार है।  हालांकि ध्यान दें कि जो शहद आप इस्तेमाल कर रहे हैं वह शुद्ध हो। (और पढ़ें - शहद के फायदे)
  • सेब का सिरका - 
    सेब के सिरके में अम्लीय गुण होते हैं, जो गले में स्थित बैक्टीरिया को मार देते हैं। यदि आपको जुकाम के कारण गले में संक्रमण हुआ है तो सेब के सिरके की मदद से जुकाम के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है। (और पढ़ें - सेब के सिरके के फायदे)
  • लहसुन - 
    लहसुन में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो बैक्टीरिया को मार देते हैं और संक्रमण पैदा करने वाले अन्य रोगाणुओं के साथ भी लड़ते हैं। लहसुन की एक कली को अपने मुंह में दांतों और गाल के बीच में रखें और उसे चूसते रहें। इसे अपने मुंह में रखें और दांतों के नीचे हल्का सा दबाव दें और इसके रस को पीते रहें। (और पढ़ें - लहसुन के फायदे)
  • हल्दी वाला दूध -
    हल्दी के दूध को गले के संक्रमण, जुकाम और यहां तक की खांसी के इलाज के रूप में जाना जाता है। यहां तक कि हल्दी का दूध सूजन और दर्द को कम करने में भी मदद करता है। (और पढ़ें - हल्दी के दूध के फायदे)

गले में इन्फेक्शन की जटिलताएं - Throat Infection Complications in Hindi

गले में इन्फेक्शन होने पर कौन सी समस्याएं होती हैं?

यदि आप गले के बैक्टीरियल इंफेक्शन के लिए एंटीबायोटिक ले रहे हैं तो संक्रमण एक से तीन दिन में ही खत्म हो जाता है।

  • यदि बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण का इलाज ठीक से ना करवाया जाए तो इसके कारण इसके कारण रूमेटिक फीवर जैसे रोग हो सकते हैं। 
  • यदि आपके बच्चे को स्ट्रेप थ्रोट हो गया है, तो उनमें घातक रूप से गले का इन्फेक्शन होने के जोखिम अधिक बढ़ जाते हैं। इस स्थिति का इलाज सिर्फ एंटीबायोटिक दवाओं के साथ ही किया जा सकता है। 

कुछ गंभीर मामलों में गले का संक्रमण और टॉन्सिल का संक्रमण निम्न जटिलताएँ पैदा कर सकते हैं, जैसे:

  • स्कारलेट फीवर (लाल बुखार)
  • किडनी में सूजन
Dr. Yogesh Parmar

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कान, नाक और गले सम्बन्धी विकारों का विज्ञान
5 वर्षों का अनुभव

Dr. Vijay Pawar

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गले में इन्फेक्शन की दवा - Medicines for Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Blumox Ca खरीदें
Bactoclav खरीदें
Mega Cv खरीदें
Azibact खरीदें
Atm खरीदें
Erox Cv खरीदें
Moxclav खरीदें
Novamox खरीदें
Moxikind Cv खरीदें
Pulmoxyl खरीदें
Azilide खरीदें
Zithrox खरीदें
Azee खरीदें
Clavam खरीदें
Advent खरीदें
Augmentin खरीदें
Strepsils खरीदें
Clamp खरीदें
Azithral खरीदें
Mox खरीदें
Zemox Cl खरीदें
P Mox Kid खरीदें
Aceclave खरीदें

गले में इन्फेक्शन की ओटीसी दवा - OTC medicines for Throat Infection in Hindi

गले में इन्फेक्शन के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
Divya Anu Taila खरीदें
Zandu Khadiradi Gutika खरीदें

References

  1. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Simple goiter.
  2. American Thyroid Association. [Internet]: Virginia, USA ATA: Complementary and Alternative Medicine in Thyroid Disease (CAM).
  3. Michigan Medicine: University of Michigan [internet]; Thyroid Disorders.
  4. Healthdirect Australia. Causes of thyroid problems. Australian government: Department of Health
  5. Healthdirect Australia. Thyroid problems. Australian government: Department of Health
  6. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Thyroid Diseases.
  7. American Thyroid Association. [Internet]: Virginia, USA ATA: Thyroid Surgery.
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