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खुदकुशी का विचार आना क्या है? 

खुद का जीवन नष्ट करने की स्थिति को खुदकुशी (आत्महत्या) कहा जाता है। आत्महत्या के विचार आने की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को खुद का जीवन नष्ट करने के विचार आने लगते हैं, इसके साथ-साथ इस दौरान उसको डिप्रेशन और बिहेवियरल बदलाव भी महसूस होने लगते हैं। खुदकुशी का विचार आना एक सामान्य समस्या है और ज्यादातर लोग इसे तब महसूस करते हैं, जब वे तनाव या डिप्रेशन से गुजर रहे होते हैं।

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ज्यादातर मामलों में यह समस्या अस्थायी (कुछ समय तक रहने वाली) होती है और इसका इलाज संभव होता है। लेकिन कुछ मामलों में यह पीड़ित व्यक्ति को आत्महत्या का प्रयास करने या उसे पूरा करने के जोखिम में डाल देती है।

इसकी कोई एक वजह नहीं है कि आखिर क्यों कोई व्यक्ति अपने जीवन को नष्ट करने की कोशिश करने लगता है, लेकिन कुछ कारक ऐसे हैं जो इस जोखिम को बढ़ा देते हैं। अगर किसी को मानसिक विकार या मानसिक रोग है तो वह व्यक्ति खुदकुशी करने का प्रयास कर सकता है। जिन लोगों को आत्महत्या करने के विचार आते हैं वे अक्सर उदासी और निराशा की भावनाओं से बहुत ओतप्रोत रहते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

यह जानना मुश्किल हो सकता है कि कोई अंदर से कैसा महसूस कर रहा है, लेकिन यह रोग होने पर मरीज में ऐसे कई व्यवहार विकसित हो जाते हैं, जो यह संकेत दे सकते हैं कि व्यक्ति खुदकुशी करना चाहता है। इन चेतावनी संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण होता है ताकि आप परिवार के सदस्य या ऐसे दोस्त की मदद कर सकें जो आत्महत्या करने के विचारों से पीड़ित है।

इस विकार से पीड़ित व्यक्ति की मदद करने से उसके द्वारा किए जाने वाले संभावित आत्महत्या के प्रयास को रोका जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का इलाज करने से खुदकुशी के जोखिमों को कम किया जा सकता है और पीड़ित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है।

(और पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)

  1. आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार के लक्षण - Suicidal Tendency Symptoms in Hindi
  2. आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार के कारण और जोखिम - Suicidal Tendency Causes & Risks in Hindi
  3. आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार से बचाव के उपाय - Prevention of Suicidal Tendency in Hindi
  4. आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार का परीक्षण - Diagnosis of Suicidal Tendency in Hindi
  5. आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार का उपचार - Suicidal Tendency Treatment in Hindi
  6. आत्महत्या (खुदकुशी) के डॉक्टर

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार के लक्षण - Suicidal Tendency Symptoms in Hindi

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार आने पर कैसे लक्षण महसूस होते हैं?

खुदकुशी करने की इच्छा से जुड़े लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं -

  • किसी परिस्थिति में फंसा हुआ और आशाहीन महसूस होना।
  • शराब व अन्य ड्रग आदि मादक पदार्थों का सेवन का बढ़ना। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने की दवा)
  • सामान्य रूटीन में बदलाव होना, जैसे खाना खाने का या सोने का पैटर्न।
  • जोखिम भरी और खुद के लिए घातक चीजें करना, जैसे ड्रग आदि का सेवन करना या लापरवाही से गाड़ी चलाना।
  • संपत्ति को बेचना या नष्ट करना या फिर किसी मामलें में फंसना, जबकि ऐसा करने का कोई स्पष्टीकरण नहीं है।
  • सामाजिक संपर्कों से दूर रहना और अकेले रहने का मन करना।
  • बार-बार मूड बदलना जैसे किसी एक दिन भावनात्मक रूप से उच्च महसूस होना और अगले दिन गहरी निराशा में डूब जाना।
  • मृत्यु, मरते हुए या हिंसा से घिरा हुआ महसूस होना।
  • लोगों को ऐसे अलविदा करना जैसे फिर उनको कभी नहीं देख पाएंगे।
  • व्यक्तित्व में बदलाव विकसित होना या गंभीर रूप से चिंतित या उत्तेजित होना, विशेषकर जब ऊपर बताए गए संकेत भी महसूस हो रहे हों।

(और पढ़ें - मूड को अच्छा बनाने के लिए सुपर फूड)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको खुदकुशी करने के विचार आते हैं, लेकिन आप तुरंत ही खुद को चोट पहुंचाने की नहीं सोच रहे हैं तो -

  • अपने किसी करीबी दोस्त या प्रिय व्यक्ति के पास पहुंचें - भले ही आपको आपकी भावनाओं के बारे में बात करने में कठिनाई महसूस हो रही हो।
  • अपने आध्यात्मिक गुरू या अपने विश्वासपात्र/ करीबी व्यक्ति से संपर्क करें।
  • सुसाइड हॉटलाइन पर कॉल करें।
  • अपने डॉक्टर, मानसिक डॉक्टर या अन्य हैल्थकेयर प्रोवाइडर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लें।

खुदकुशी के विचार आने की समस्या अपने आप ठीक नहीं होती, इसलिए जल्दी से जल्दी मनोरोग चिकित्सक की मदद लें।

(और पढ़ें - खुश रहने के तरीके)

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार के कारण और जोखिम - Suicidal Tendency Causes & Risks in Hindi

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार किस कारण से आते हैं?

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार तब आने लगते हैं, जब  रोगी को लगता है कि अब वे इस (किसी) गंभीर स्थिति का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसी परिस्थिति पैसे संबंधी समस्या, किसी प्रियजन की मौत, टूटे हुए रिश्ते या जानलेवा बीमारी से पैदा हो सकती है।

सबसे आम परिस्थितियां या जीवन की घटनाएं जो खुदकुशी के विचार पैदा करने का कारण बन सकती हैं, इनमें शोक, यौन शोषण, वित्तीय समस्याएं, पश्चाताप (पछतावा), किसी प्रकार की अस्वीकृति, रिश्ता टूटना और बेरोजगारी आदि शामिल है।

कई ऐसे लोग जो खुदकुशी करने का प्रयास करते हैं, वे इस बात का संकेत देते हैं कि वे मरना नहीं चाहते, लेकिन अक्सर वे अपने दर्द (भावनात्मक या शारीरिक) को खत्म करना चाहते हैं।

खुदकुशी करने वाले लोगों में से ज्यादातर (लेकिन सभी नहीं) लोगों को मानसिक बीमारी से जुड़ी समस्याएं होती हैं। जिसमें निम्न शामिल हैं:

(और पढ़ें - मानसिक बीमारी का इलाज)

इसके अलावा, मानसिक बीमारी में भी किसी पदार्थ की लत से जुड़े विकार शामिल हो सकते हैं। जिसमें शामिल हैं:

  • शराब की लत (अल्कोहल निर्भरता)
  • शराब का अत्यधिक नशा
  • साथ ही साथ अन्य किसी ड्रग की लत होना जैसे हेरोइन, कोकीन, मेथाम्फेटामाइन, ओपिओइड्स (ऑक्सिकोडन, हाइड्रोकोडन, मोर्फिन और मेथाडन आदि) व अन्य नशीले पदार्थ।
  • जब लोग शराब या ड्रग का सेवन कर लेते हैं और गंभीर नशे में हो जाते हैं तो वे और अधिक आवेगशील हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे बिना सोचे समझे ही खुदकुशी करने का प्रयास कर सकते हैं। दुर्भाग्य से अक्सर नशे के दौरान ही अधिकतर खुदकुशी करने के प्रयास किए जाते हैं।

आत्महत्या की दरों से तनाव का स्तर भी जुड़ा हुआ है। जो लोग खुदकुशी करते हैं, उनके शरीर में असाधारण उच्च गतिविधियां और स्ट्रैस हार्मोन पाया जाता है।

(और पढ़ें - तनाव दूर करने के घरेलू उपाय)

सेरोटोनिन एक प्रकार का मस्तिष्क का केमिकल (न्यूरोट्रांसमीटर) होता है, जो मूड, चिंता और आवेगशीलता (Impulsivity) से जुड़ा होता है। खुदकुशी करने वाले व्यक्ति के सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूड (CSF) और मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर सामान्य से कम पाया जाता है।

नीचे कुछ जोखिम कारकों का वर्णन किया गया है, जो किसी व्यक्ति की खुदकुशी करने वाली संभावनाओं को प्रभावित करते हैं -

  • किसी चीज की लत से समस्या होना।
  • साइकायट्रिक डिसऑर्डर (Psychiatric disorder) या मानसिक रोग होना।
  • पहले कभी आत्महत्या करने का प्रयास किया हुआ होना।
  • आवेगशील और बेपरवाह व्यवहार की प्रवृत्ति होना।
  • कानून संबंधी समस्याओं में फंसना।
  • अल्कोहल या अन्य नशीले ड्रग्स के प्रभाव में रहना।
  • बच्चों के लिए अनुशासन, सामाजिक या स्कूल संबंधी समस्या होना।
  • खुद की बंदूक रखना।
  • मानसिक स्वास्थ्य के मामलों से जुड़ी कोई पारिवारिक समस्या।
  • किसी नशीले पदार्थ की लत से जुड़ी कोई पारिवारिक समस्या।
  • हिंसा संबंधी पारिवारिक इतिहास।
  • परिवार में पहले भी किसी एक या कई व्यक्तियों नें खुदकुशी की हुई हो।
  • आशाहीन भावना।
  • अलगाव या अकेलेपन की भावना।
  • परिवार या घर के समर्थन के बिना वित्तीय समस्याएं।
  • नींद में कमी
  • किसी ऐसे व्यक्ति को जानना या उससे जुड़ाव होना जिसने खुदकुशी कर ली हो।

(और पढ़ें - अच्छी नींद आने के उपाय)

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार से बचाव के उपाय - Prevention of Suicidal Tendency in Hindi

खुदकुशी या आत्महत्या करने के विचार आने पर उनको कैसे रोकें?

निम्न कुछ तरीकों की मदद से आत्महत्या करने के विचार आने पर रोक लगाई जा सकती है -

  • अपने पास किसी बंदूक, चाकू या किसी खतरनाक हथियार या ड्रग आदि को ना रखें, उनको अपने किसी भरोसेमंद दोस्त को सौंप दें।
  • उन चीजों की तलाश करना जो आपको खुशी देती हैं, जैसे परिवार के साथ या जिन दोस्तों को आप पसंद करते हैं उनके साथ रहना। जो आपके पास अच्छी चीजें करने को हैं अपना ध्यान उनपर केंद्रित करने की कोशिश करना।
  • सेल्फ-हेल्प ग्रुप में उपस्थित होना। यहा आप उन लोगों के साथ अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं, जो इन समस्याओं को समझ सकते हैं। अन्य लोगों से मदद मांगें और उनकी मदद करने की कोशिश करें, जिनको यहीं समस्या है। 
  • परिवार से सहारा प्राप्त करना। उदाहरण के लिए परिवार का मरीज से पूछना कि उनको कैसे महसूस हो रहा है और मरीज को डॉक्टर के पास उनके साथ चलने के लिए बोलना।
  • शराब व अन्य गैर-कानूनी दवाओं का सेवन करने से बचना।
  • खुद अलगाव में रहने से बचें और जितना हो सके बाहरी दुनिया से जुड़े रहें।
  • व्यायाम करना। (और पढ़ें - व्यायाम छोड़ने के नुकसान)
  • संतुलित और स्वस्थ भोजन का सेवन करना।
  • हर 24 घंटे में लगातार 7-8 घंटे की नींद लेना।

याद रखें कि कई लोगों को खुदकुशी करने के विचार कभी-कभी आते हैं और उनमें से काफी लोग उनसे बचने का हल ढूंढ लेते हैं। उदाहरण के लिए अपनी समस्याओं को दूसरों के साथ शेयर करना।

आत्महत्या के विचार आने से खुद को बचाने में मदद करने के लिए निम्न बातों को अपनाएं -

  • जरूरत के अनुसार इलाज करवाएं:
    यदि आप समस्या के अंतर्निहित कारणों का इलाज नहीं करते हैं, तो आत्महत्या के विचार फिर से आने लग सकते हैं। आपको मानसिक स्वास्थ्य का इलाज करवाने में शर्म भी महसूस हो सकती है। लेकिन डिप्रेशन, नशीले पदार्थों का उपयोग या अन्य किसी अंतर्निहित समस्या का इलाज करवाने से आपको जीवन में बेहतर महसूस हो सकता है और यह आपको सुरक्षित रहने में मदद करता है।  (और पढ़ें - डिप्रेशन के लिए योग)
     
  • अपना सपोर्ट नेटवर्क स्थापित करें: 
    खुदकुशी संबंधी विचारों को बताना काफी कठिन हो सकता है। जिस कारण से आपके दोस्त व परिवार वाले पूरी तरह से यह नहीं समझ पाएंगे कि आप कैसा व क्या महसूस कर रहे हैं। अपने करीबियों के पास जाएं, यह सुनिश्चित करें कि जो लोग आपकी परवाह करते हैं उनको पता है कि क्या हो रहा है और वे तब आपके पास हो जब आपको उनकी जरूरत होगी। आप अपने पूजा स्थल, सहायता समूह और अन्य सामुदायिक साधनों से भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
     
  • यह याद रखें कि खुदकुशी के विचार कुछ ही समय तक आते हैं: यदि आप आशाहीन महसूस कर रहे हैं या ऐसा महसूस कर रहे हैं कि आप अब और जीने के लायक नहीं हैं। तो ऐसे में याद रखें कि उपचार की मदद से आप फिर से अपने जीवन के दृष्टिकोण को प्राप्त कर सकते हैं और जीवन को बेहतर बना सकते हैं। उत्तेजित होकर कुछ ना करें।

पीड़ित के परिवार के सदस्य और दोस्त उसके बोलने और व्यवहार करने के तरीके से यह पता लगा सकते हैं कि वह इस समस्या के जोखिम पर है। इस दौरान वे पीड़ित व्यक्ति के साथ बात करके और उचित सपोर्ट प्रदान करके उसकी मदद कर सकते है। उदाहरण के लिए पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर के पास लेकर जाना।

यदि आपके परिवार में या किसी दोस्त को खुदकुशी करने के विचार आते हैं तो आप निम्न कुछ स्टेप्स का इस्तेमाल करके उसकी मदद कर सकते हैं -

  • बात करना: 
    उनसे यह जानने की कोशिश करना कि कहीं उनको आत्महत्या करने जैसा तो महसूस नहीं हो रहा। अध्ययन के अनुसार, यह पता चला है कि ऐसा पूछने से पीड़ित में खुदकुशी करने के जोखिम नहीं बढ़ते।
     
  • उनको सुरक्षित रखना: 
    पीड़ित व्यक्ति के आस-पास रहना और उससे ऐसी चीजें दूर रखना जो आत्महत्या करने के जोखिम को बढ़ाती है, जैसे चाकू आदि।
     
  • उनकी बाते सुनना: 
    पीड़ित व्यक्ति की बातें सुनना और उनको ऐसा महसूस करवाना कि आप उनके लिए ही यहां पर हैं।
     
  • हौसला बढ़ाना: 
    हेल्पलाइन पर कॉल करने या किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क करके पीड़ित व्यक्ति को प्रोत्साहित करना। उदाहरण के लिए दोस्त, परिवार के सदस्य या आध्यात्मिक गुरु आदि से बात कराना। किसी दोस्त, डॉक्टर या परिवारिक सदस्य के फोन नंबर जैसे कुछ इमर्जेंसी नंबर हमेशा पीड़ित के पास लिखे हुए रहे, यह सुनिश्चित करना। 
     
  • उनके पास आते रहना:
    जब पीड़ित व्यक्ति के दिमाग से संकट खत्म हो जाता है, तो फिर से इस समस्या के जोखिम को कम करने के लिए उनके पास अक्सर आते रहना चाहिए।

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार का परीक्षण - Diagnosis of Suicidal Tendency in Hindi

खुदकुशी या आत्महत्या करने के विचार की समस्या की जांच कैसे की जाती है?

आपकी और आपके परिवार कि पिछली शारीरिक व मानसिक जानकारी तथा लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं कि आप खुदकुशी करने के उच्च जोखिम पर हैं या नहीं।

डॉक्टर आपसे यह जानना चाहेंगे कि आपके लक्षण कब शुरू होते हैं और आप उन्हें कितनी बार महसूस करते हैं। डॉक्टर आपसे पिछली या वर्तमान में महसूस हो रही किसी मेडिकल संबंधी समस्या के बारे में भी पूछ सकते हैं और कुछ ऐसी स्थितियों के बारे में भी पूछ सकते हैं जो परिवार में पहले से ही चली आ रही है। इसकी मदद से डॉक्टरों को लक्षणों के लिए एक संभावित स्पष्टीकरण मिल सकता है और इसकी मदद से यह भी निर्धारित किया जा सकता है कि इस समस्या के परीक्षण के लिए किन टेस्टों की आवश्यकता है।

आंकलन में निम्न शामिल हो सकते हैं -

  • मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां: 
    कई मामलों में आत्महत्या करने के विचार अंतर्निहित मानसिक स्वास्थ्य विकार के कारण आ सकते हैं। यदि डॉक्टरों को यह लगता है कि मानसिक विकारों के कारण खुदकुशी करने के विचार पैदा हो रहे हैं, तो डॉक्टर आपको एक मेंटल हैल्थ प्रोफेशन (मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर) के पास भेज सकते हैं। ये डॉक्टर आपकी समस्या का सटीक रूप से परीक्षण कर सकते हैं और आपकी विशेष समस्या के अनुसार, प्रभावी उपचार योजना निर्धारित कर सकते हैं।
     
  • किसी नशीले पदार्थ का सेवन करना:
    शराब व अन्य ड्रग आदि का सेवन करना भी खुदकुशी करने के विचारों और खुदकुशी करने के प्रयास को बढ़ावा देता है। यदि आपको शराब या किसी ड्रग का इस्तेमाल करने से किसी प्रकार की समस्या हो रही है, जैसे लगातार नशे में रहना या रोजाना नशा करने की आदत पड़ जाना आदि तो इस बारे में डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी होता है। यदि किसी नशीले पदार्थ के कारण आपको आत्महत्या करने जैसे विचार आते हैं तो आपको एक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम (A rehabilitation program) या डी-एडीक्शन सेंटर (De-addiction centre) में अपना नामांकन करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
     
  • दवाएं: 
    कुछ प्रकार की ऑवर-द-काउंटर या डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं भी किसी व्यक्ति में खुदकुशी करने जैसी भावनाएं पैदा कर सकती हैं। यदि आप किसी प्रकार की दवा ले रहे हैं जो आपमें ऐसे लक्षणों को बढ़ा रही है, तो डॉक्टर को इस बारे में बताने में बिलकुल भी देरी ना करें।

(और पढ़ें - दवा की जानकारी)

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार का उपचार - Suicidal Tendency Treatment in Hindi

आत्महत्या (खुदकुशी) के विचार पैदा करने वाली समस्या का इलाज कैसे किया जाता है?

इसका उपचार आत्महत्या करने के विचारों और व्यवहारों पर निर्भर करता है। हालांकि, ज्यादातर मामलो में उपचार में दवाओं और टॉक थेरेपी (Talk therapy) आदि शामिल होती है। (और पढ़ें - थेरेपी क्या है)

यदि आप या आपका कोई करीबी व्यक्ति मानसिक समस्याओं से गुजर रहा है तो डॉक्टर की मदद लेना बहुत जरूरी है।

टॉक थेरेपी:

इस थेरेपी को साइकोथेरेपी (Psychotherapy) के नाम से भी जाना जाता है। खुदकुशी करने के जोखिम को कम करने की यह एक संभव उपचार विधि है।

  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT):
    यह टॉक थेरेपी का एक रूप होता है, इसका इस्तेमाल अक्सर उन लोगों पर किया जाता है जिनके मन में खुदकुशी करने के विचार आते हैं। इसकी मदद से पीड़ित मरीज को यह सिखाया जाता है कि जीवन की उन तनावपूर्ण घटनाओं और भावनाओं को कैसे मैनेज करना है जो आपके मन में खुदकुशी करने जैसे विचार पैदा करती है। (और पढ़ें - तनाव के लिए योग
  • सीबीटी थेरेपी की मदद से आपकी नकारात्मक धारणाओं को सकारत्मक धारणाओं से बदल दिया जाता है और आपके जीवन में संतुष्टि और नियंत्रण की भावना फिर से जगाई जाती है।

(और पढ़ें - एडीएचडी के लिए व्यवहार थेरेपी)

दवाएं:

यदि टॉक थेरेपी आपके जोखिम को सफलतापूर्वक कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो आपके लिए कुछ प्रकार की दवाएं लिखी जा सकती हैं। ये दवाएं आपके लक्षणों को कम कर देती हैं जो किसी शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के कारण पैदा हुए हैं। लक्षणों के अंतर्निहित कारण का इलाज करने से खुदकुशी करने के विचार आने की बारंबारता में कमी की जा सकती है। आपके लिए नीचे दी गई दवाओं में से एक या कई दवाएं लिखी जा सकती हैं।

  • एंटीडीप्रैसेंट्स (Antidepressants)
  • एंटीसाइकोटिक दवाएं (Antipsychotic medications)
  • एंटी-एंग्जाइटी दवाएं (Anti-anxiety medications)

जीवनशैली में बदलाव:

दवाएं लेने और टॉक थेरेपी का अभ्यास करने के अलावा आप जीवनशैली में कुछ बदलाव करके भी इन लक्षणों को कम कर सकते हैं। इनमें निम्न शामिल हैं:

  • शराब व ड्रग आदि का सेवन करने से बचना: 
    नशीले पदार्थों से परहेज करने से भी लक्षणों को कम किया जा सकता है। क्योंकि ये नशीले पदार्थ खुदकुशी करने के विचारों को बढ़ा सकते हैं।
     
  • नियमित रूप से व्यायाम करना: 
    एक सप्ताह में कम से कम 3 बार व्यायाम करना, खासकर घर से बाहर और हल्की धूप में व्यायाम करना काफी मददगार हो सकता है। शारीरिक गतिविधियां मस्तिष्क में कुछ प्रकार के केमिकल के निर्माण को उत्तेजित करती हैं। मस्तिष्क के ये केमिकल आपको अच्छा और रिलेक्स महसूस करवाने का काम करते हैं। (और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)
     
  • अच्छी नींद लेना: 
    हर रात को कम से कम 6 से 8 घंटे तक नींद लेना बहुत जरूरी होता है। यदि आपको सोने में किसी प्रकार की परेशानी हो रही है तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। (और पढ़ें - गहरी नींद के लिए बॉडी को करें स्ट्रेच)

जब एक बार उपचार शुरू हो जाता है, तो उपचार के प्लान को फॉलो करना, डॉक्टर द्वारा दिए गए अपॉइंटमेंट्स की तारीख पर हाजिर होना, निर्देशानुसार दवाएं लेना और अन्य निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी होता है।

Dr. Anil Kumar

Dr. Anil Kumar

साइकेट्री
12 वर्षों का अनुभव

Dr. Ajay Kumar Vashishtha

Dr. Ajay Kumar Vashishtha

साइकेट्री
6 वर्षों का अनुभव

Dr. Amar Golder

Dr. Amar Golder

साइकेट्री
5 वर्षों का अनुभव

Dr. Arvind Gautam

Dr. Arvind Gautam

साइकेट्री
3 वर्षों का अनुभव

References

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  2. Rajiv Radhakrishnan, Chittaranjan Andrade. Suicide: An Indian perspective . Indian J Psychiatry. 2012 Oct-Dec; 54(4): 304–319. PMID: 23372232
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