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मतली और उल्टी क्या है?

उल्टी एक अनियंत्रित अनैच्छिक शारीरिक प्रक्रिया है जो पेट के अंदर मौजूद पदार्थ को मुंह के रास्ते बाहर निकाल देती है। मतली या जी मिचलाना के दौरान रोगी को ऐसा महसूस होता कि उसे उल्टी आने वाली है, लेकिन वास्तव में उल्टी नहीं आती।

उल्टी और मतली के काफी सारे कारण होते है। यह बच्चों, व्यस्क और बूढ़े सभी उम्र के लोगों में हो सकता है।

हालांकि, गर्भावस्था में उल्टी आना या कैंसर के उपचार की वजह से उल्टी और मतली की समस्या आम हो सकती है। लगभग आधी से ज्यादा गर्भधारण करने वाली महिलाओं को उल्टी और मतली सुबह के समय प्रभावित करती है, जिसे सुबह की बीमारी (मॉर्निंग सिकनेस; Morning sickness) कहा जाता है।

उल्टी और मतली के बारे में कुछ तथ्य -

उल्टी और मतली कई रोग के सामान्य लक्षण होते हैं। उल्टी और मतली से होने वाली परेशानियां इनके होने के कारण पर निर्भर करती हैं। फूड पाइज़निंग (food poisoning), समुद्री जहाज पर रहने से (sea sickness), सफर करने से (motion sickness) और कैंसर थैरेपी आदि इन सभी कारणों से होने वाली उल्टी और मतली काफी हानिकारक हो सकती है, क्योंकि इनसे शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण (डिहाईड्रेशन)) हो सकती है।

उल्टी शरीर में लहरों की तरह आ सकती है, जैसे ही शरीर का संचालन विपरित काम करने लगता है (जैसे पाचन तंत्र की मांसपेशियों का संकुचन होना) तो उल्टी आने लगती है। इसके अलावा उल्टी की लहरों के कारण पेट और इसोफेगस की परत खिंचने (तनाव) लगती है, जिस कारण से पेट की सामग्री मुंह के बल निकलने में मजबूर हो जाती है।

कई बार खांसते समय और फेंफड़ों से बलगम निकालते समय भी उल्टी जैसे लक्षण अनुभव होते हैं, लेकिन वह उल्टी नहीं होती क्योंकि उल्टी सिर्फ पेट से ही आती है।

रेचिंग (उबकना) पेट और इसोफेगस के कार्यों की विपरित क्रम प्रक्रिया होती है, जिसमें उल्टी के बिना सूखी उबकाई लगती रहती हैं। कई बार इसको ड्राई हीव्स (dry heaves) के नाम से भी जाना जाता है।

उल्टी और मतली की गंभीर स्थिति में मेडिकल उपचार की जरूरत पड़ सकती है, यहां तक की कई दवाईयां भी हैं, जिनसे उल्टी और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं जैसे बेहोश करने वाली कुछ सामान्य दवाएं। बहुत ही कम, उल्टी और मतली से कोई गंभीर और जीवन के लिए हानिकारक स्थिति पैदा हो पाती हैं

  1. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के लक्षण - Nausea and Vomiting Symptoms in Hindi
  2. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के कारण - Nausea and Vomiting Causes in Hindi
  3. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने की रोकथाम - Prevention of Nausea and Vomiting in Hindi
  4. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने का परीक्षण - Diagnosis of Nausea and Vomiting in Hindi
  5. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने का इलाज - Nausea and Vomiting Treatment in Hindi
  6. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के जोखिम और जटिलताएं - Nausea and Vomiting Risks & Complications in Hindi
  7. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने में परहेज़ - What to avoid during Nausea and Vomiting in Hindi?
  8. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Nausea and Vomiting in Hindi?
  9. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की दवा - Medicines for Nausea and Vomiting in Hindi
  10. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Nausea and Vomiting in Hindi
  11. मतली (जी मिचलाना) और उल्टी के डॉक्टर

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के लक्षण - Nausea and Vomiting Symptoms in Hindi

मतली और उल्टी के लक्षण क्या होते हैं?

मतली अक्सर अनियमितता महसूस करने के कारण होती हैं जिनमें शामिल हैं:

  1. पेट में परेशानी 
  2. चक्कर आना
  3. चिंता

अक्सर जब भी ऐसा महसूस होता है कि उल्टी आने वाली है, तो ऐसा लगता है की यह भावना पेट से आ राइ है। लेकिन वास्तव में इस भावना पर ज्यादातर नियंत्रण मस्तिष्क का ही होता है।

उल्टी आने से अक्सर मतली की संवेदना कुछ समय के लिए कम हो जाती है। उल्टी तब होती है, जब पेट जबरदस्ती उसकी सामग्री को मुंह से बल बाहर निकाल देता है। अगर पेट से सामग्री और द्रव खत्म होने के बाद भी उल्टी की लहरें उठती रहे तो उसे ड्राई हीव्स (dry heaves) कहा जाता है।

जब उल्टी से शरीर का तरल खत्म होने पर निर्जलकरण (डिहाईड्रेशन) हो जाता है, तो मरीज के होठ और मुंह सूखने लग सकते हैं, और ज्यादा प्यास भी लग सकती है। रोगी का पेशाब आना कम  हो सकता है या पेशाब का रंग गहरा हो सकता है।

बच्चों में डिहाइड्रेशन के संकेत में निम्न शामिल हैं:-

  1. होठ और मुंह सूखना
  2. धंसी हुई आंखें
  3. तेजी से साँसें लेना
  4. सुस्ती
  5. डायपर का सूखा रहना (जिससे संकेत मिलता है कि बच्चे ने पेशाब नहीं किया)

अन्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:-

  1. पेट में दर्द
  2. बुखार
  3. चक्कर आना
  4. नाड़ी (नस) का तेज होना
  5. बहुत ज्यादा पसीना आना
  6. छाती में दर्द
  7. बेहोशी
  8. भ्रम
  9. बहुत ज्यादा नींद आना

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के कारण - Nausea and Vomiting Causes in Hindi

मतली और उल्टी क्यों होती है?

उल्टी और मतली दोनो ही मस्तिष्क के उसी भाग द्वारा निंयत्रित की जाती है, जो अनैच्छिक शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है। उल्टी वास्तव में एक ऐसा रिफ्लक्स है जो मस्तिष्क के संकेत पर काम करता है। उल्टी के संकेत शरीर में कई उत्तेजनाओं से उत्पन्न होते हैं, जैसे गंध, स्वाद, विभिन्न बीमारियां, भावनाएं (जैसे डरना), दर्द, चोट, संक्रमण, भोजन से होने वाली जलन, चक्कर आना आदि जैसे शारीरिक परिवर्तन।

इसके अलावा उल्टी और मतली के और भी कई कारण हैं -

1. पेट और गले में जलन के कारण उल्टी और मतली लगना 

पेट की परत में या गले में होने वाली जलन जैसी समस्याओं के कारण इसोफेजाइटिस (esophagitis) या तीव्र गेस्ट्राइटिस (Acute gastritis) जैसी समस्याएं होने लगती है, जिसके कुछ उदाहरण हैं -

  1. संक्रमण – पेट में जलन का कारण अक्सर संक्रमण ही होता है, चाहे वह किसी सामान्य वायरस या अन्य किसी संक्रमण के कारण हुआ हो। उपरी पेट में एक ऐंठन के रूप में दर्द पैदा होना भी उल्टी और मतली का कारण बन सकता है। बुखार और ठंड लगना भी मतली और उल्टी लगने का कारण हो सकता है। नोरोवायरस और रोटावायरस से फैले संक्रमण के कारण या हैलिकोबैक्टर समूह के वायरस (जैसे H. Pylori) से हुऐ संक्रमण के कारण उल्टी और मतली लगने लगती हैं।
  2. गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Gastroenteritis) या स्टमक फ्लू  (Stomach flu) – जब उल्टी और दस्त एक साथ हो जाए, और उनके साथ पेट के अलावा कोई अन्य संक्रमण भी हो। (यह सामान्य फ्लू (influenza) से एकदम अलग बीमारी है)
  3. फूड पॉइजनिंग (Food poisoning) – फूड पॉइजनिंग होने से गंभीर रूप से उल्टियां लग सकती हैं। सबसे आम कारण स्टैफिलोकॉकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) बैक्टीरिया द्वारा जारी किया गया एक विषैला पदार्थ (toxin) होता है।
  4. अन्य पेट की समस्याएं – शराब, धूम्रपान और नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इन्फ्लामेट्री दवाएं (NSAID; जैसे एस्पिरिन और आईबूप्रोफेन आदि) ये सब पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा करती हैं। इस कारण से उल्टी और मतली की संभावना हो जाती है।
  5. पेप्टिक अल्सर (पेट में अल्सर) – ये पेट में होने वाले छाले होते हैं जो पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा कर सकते हैं, जो बढ़कर पेट की रक्षात्मक परत को क्षति पहुंचा सकते हैं, जिससे उल्टी और मतली लगने की संभावनाए हो जाती हैं।
  6. गेस्ट्रोइसोफेगल रिफलक्स रोग (Gastroesophageal reflux disease) – उल्टी और मतली गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग से भी जुड़ी है। इसे रिफ्लक्स इसोफेजाइटिस (GERD) भी कहा जाता है, इसमें पेट से अम्लीय पदार्थ इसोफेगस के अंदर रिफ्लक्स होने लगते हैं।

2. स्नायविक (न्यूरोलोजिकल; neurological) परेशानियों के कारण उल्टी और मतली लगना

  1. सिर दर्द – इसमें माइग्रेन, मुख्य रूप में उल्टी और मतली के कारणों से जुड़ा होता है।
  2. कान का भीतरी हिस्सा – सफर से होने वाली परेशानी (motion sickness), लेबरिनथाइटिस (labyrinthitis), चक्कर (benign positional vertigo), मेनिएर रोग (Meniere's disease) आदि इनमें मुख्य हैं।
  3. इंट्राक्रेनियल दबाव (intracranial pressure; खोपड़ी के अंदर दबाव) बढ़ने से – किसी भी बीमारी या चोट से जब मस्तिष्क (खोपड़ी) में इंट्राक्रिनियल का दबाव बढ़ जाता है, तो उससे उल्टी और मतली जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं।
  4. हानिकारक उत्तेजनाएं (Noxious stimulus) – अक्सर किसी प्रकार की गंध या कोई आवाज जो मस्तिष्क को इस प्रकार प्रभावित करती है जिससे उल्टी या मतली लग सकती हैं।
  5. तापमान संबंधित बीमारी – इसके कुछ उदाहरण जैसे थकावट के कारण शरीर का तापमान बढ़ना, अधिक तेज धूप, या गर्मी के कारण निर्जलीकरण होना आदि।

3. अन्य रोग व विकार जिनके कारण से उल्टी और मतली लग सकती हैं

  1. पेट के रोग, बीमारियां या अन्य स्थितियां – ऐसी कई बीमारीयां होती है जो पेट के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करती हैं जिससे मतली और उल्टी के लक्षण विकसित हो जाते हैं। इनमें पाचन अंगों के रोग शामिल जैसे हैपेटाइटिस, पित्ताश्य के रोग, अग्नाश्य के रोग, गुर्दे के रोग (जैसे गुर्दों की पथरी, क्रोनिक किडनी रोग, किडनी फेलियर), कैंसर और अपेंडिसाइटिस आदि शामिल हैं।
  2. डायबिटीज डायबिटीज से ग्रसित लोगों को भी अक्सर उल्टी और मतली जैसी समस्याएं होने लगती हैं, क्योंकि उनके खून में वसा का स्तर असामान्य तरीके से घटता और बढ़ता रहता है। और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके खून में इन्सुलिन का संतुलन खराब हो जाता है।
  3. पेट में आसंजन (Abdominal adhesions) – आंतो में रुकावट पैदा होने के मुख्य कारण जैसे पहले की गई सर्जरी और उससे एडहेज़न (adhesions) विकसित होना होता है। इसके अलावा हर्निया, गेस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट (GI tract) का असामान्य रूप से अकड़ना, ट्यूमर, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीड़ी; IBD), आदि भी इसके मुख्य कारणों में ही गिने जाते हैं। कई बार उल्टी और मतली इनमें से किसी बीमारी का लक्षण भी हो सकती है।

पेट और गेस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट से जुड़ी बीमारीयों के अलावा कुछ अन्य बीमारीयां भी हैं, जो उल्टी और मतली का कारण बनती हैं। इनमें से कुछ हैं:

  1. दिल का दौरा (heart attack)दिल का दौरा पड़ने जैसी समस्याओं में भी उल्टी और मतली का अनुभव हो सकता है, जो एजाइना (angina) का एक सामान्य लक्षण होता है। यह खासतौर पर तब होता है, जब दिल का दौरा दिल के निचले हिस्से को प्रभावित करता है।
  2. फेफड़े में संक्रमण – जैसे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस आदि से भी मतली और उल्टियां लगने लगती हैं।
  3. सेप्सिस – शरीर के किसी भाग मे अत्यधिक संक्रमण जो खून के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाए, उसके कारण से भी उल्टी की समस्या हो सकती है।
  4. भोजन संबंधी विकार (Eating disorders) – बुलीमिया (bulimia) से ग्रसित मरीज उल्टी को अपने अंदर खुद विकसित करते हैं। क्योंकि यह मानसिकता से जुड़ी बीमारी होती है जब तक मरीज उल्टी ना कर लें उनको शांति का अनुभव नहीं हो पाता, इसलिए वे ऐसा भोजन खाते हैं जिनसे उनको उल्टी लगे।

मेडिकल उपचार और दवाओं के कारण उल्टी और मतली लगना:

  1. दवाइयों के दुष्प्रभाव – ऐसी बहुत सी दवाइयां हैं जो पेट में जलन व अन्य समस्याएं पैदा कर देती हैं जिस कारण से कई बार मतली और उल्टियां लगने लगती हैं। कीमोथेरेपी (chemotherapy) के लिए प्रयोग की जाने वाली एंटी-कैंसर दवाइयां सामान्य रूप से मतली और उल्टी का कारण बनती हैं, जिसको आसानी से ठीक भी नहीं किया जा सकता। नशे या बेहोशी की दवाइयां, सूजन/जलन पर रोकथाम करने वाली दवाइयां, स्टेरॉइड और एंटीबायोटिक्स इन सभी दवाईयां उल्टी और मतली का कारण बनती हैं।
  2. गर्भावस्था के दौरान सुबह की बीमारी के रूप में मतली औऱ उल्टी – गर्भावस्था की पहली तिमाही में उल्टी और मतली का अनुभव बहुत ही सामान्य होता है, क्योकिं खून में हार्मोन का स्तर बदलता है। (और पढ़ें - jaldi pregnant hone ke tips in hindi)
  3. शिशुओं में उल्टी – यह तय करना मुश्किल हो जाता कि छोटे बच्चे उल्टी कर रहे हैं या थूक रहें है। अगर शिशु खाना खाने के तुंरत बाद उसे वापस निकाल देता है और कम मात्रा में निकालता है, तो यहा थूकना भी हो सकता है -
  • दबावयुक्त उल्टी
  • दर्द के साथ उल्टी
  • वायरल संक्रमण

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने की रोकथाम - Prevention of Nausea and Vomiting in Hindi

मतली और उल्टी से बचाव

आप दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करके मतली और उल्टी आने से रोक सकते हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे खाना, और खाना खाने के बाद अधिक फुर्तिले काम ना करना आदि। इन बातों का ध्यान रखकर भी इसपर रोकथाम की जा सकती है।

अगर आपको मतली जैसा अनुभव हो रहा है, उठने से पहले सादा बिस्कुट खाएं। दिन में उच्च प्रोटीन वाले पदार्थों का उपभोग करें जैसे पनीर, हल्का मांस, और सोने से पहले सूखे मेवे (काजू, बादाम आदि)

अगर आपको उल्टियां आ रही हैं तो थोड़ी मात्रा में वसायुक्त तरल पदार्थ पीने की कोशिश करें, जैसे सोढ़ा या फ्रूट जूस। अदरक का सूप या अदरक का सेवन करना भी उल्टी की समस्या का समाधान कर सकता है।

अम्लीय जूस पीने से बचें जैसे संतरे का जूस क्योंकि ये पेट की समस्याओं को और बढ़ा सकते हैं।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां जैसे ब्रोनाइन, डाइमेनहाइड्रनेट ये दवाइयां सफर से होने वाली बीमारीयों के प्रभाव को कम कर देती हैं।

कार या अन्य गाड़ी में सफर करते समय स्नैक्स को कम मात्रा में खाएं और सफर के दौरान खिड़की के बाहर देखते रहने से भी उल्टी लगने जैसी संभावना कम हो जाती है।

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने का परीक्षण - Diagnosis of Nausea and Vomiting in Hindi

मतली और उल्टी का निदान कैसे होता है?

मतली व उल्टी के निदान के लिए डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ मरीज के द्वारा पहले ली गई दवाइयों के बारे में पूछते हैं, और अन्य शारीरिक परिक्षण लेते हैं। मरीज के शारीरिक परिक्षण और पिछली चिकित्सा की जानकारी के आधार पर जरूरत पड़ने पर कुछ अतिरिक्त परिक्षण भी किए जा सकते हैं। कई बार इसके निदान के लिए अन्य टेस्ट की जरूरत भी नहीं पड़ती।

मतली और उल्टी के निदान के लिए अक्सर ये टेस्ट किए जाते हैं:

  1. रक्त परिक्षण (Blood Test) – इलेक्ट्रोलाइट्स और ब्लड सेल्स की जांच करने के लिए
  2. पेशाब की जांच (Urinalysis) – यूरीनालिसिस की मदद से शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) आदि की जांच की जा सकती है। पेशाब की मात्रा में कमी और रंग गहरा होना निर्जलीकरण के संकेत होते हैं।
  3. एक्स-रे (X-Ray) – मतली और उल्टी के संदेह को दूर करने में एक्स-रे भी काफी सहायक कार्य करता है, पर यह डॉक्टर के नैदानिक संदेह के आधार पर ही किया जाता है।
  4. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
  5. सीटी स्कैन (CT Scan) – अगर मतली और उल्टी के साथ सिर्द दर्द की भी शुरूआत हो रही है तो सिर का सीटी स्कैन भी किया जा सकता है।

ये सभी टेस्ट मरीज की परेशानी के मुताबिक उसका कारण जानने के लिए और उनसे जुड़ी अन्य बीमारीयों के बारे में पता लगाने के लिए किए जाते हैं।

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने का इलाज - Nausea and Vomiting Treatment in Hindi

मतली और उल्टी का उपचार क्या है?

मतली और उल्टी के उपचार के लिए (उम्र और कारण की परवाह किए बिना) ऐसे बहुत सारे तरीके हैं, जिनकी मदद से राहत मिल सकती है। जिनमें कुछ घरेलू उपचार भी शामिल हैं जैसे:

1. मतली के लिए घरेलू उपचार

2. उल्टी के लिए घरेलू उपचार

  • भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके खाएं
  • दिनभर में ज्यादा से ज्यादा साफ तरल पिएं, पर एकदम अधिक मात्रा में ना पिएं
  • जब तक उल्टियां पूरी तरह से बंद नहीं हो जाती भारी भोजन का सेवन ना करें
  • आराम करें
  • पेट के लिए हानिकारक दवाएं ना लें जैसे नॉन-स्टेरॉयडल, एंटी-इंफ्लामेट्री दवाएं, और कोर्टिकोस्टेरॉयड्स
  • इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर ठीक करने के लिए लिए पुनर्जलीकरण उपाय अपनाएं

3. गर्भवती महिलाओं को सुबह उल्टी और मतली की समस्या (morning sickness) हो सकती है। उनको सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले हल्का भोजन और दिन में हाई प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए।

4. मेडिकल देखभाल

मतली और उल्टी के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाइयों को एंटीमेटिक्स (antiemetics) कहा जाता है। जिनमें से कुछ बिना पर्ची की दवाएं (over-the-counter) हैं।

  1. बिसमथ सब-सेलिसिलेट (Bismuth sub-salicylate) – ये दवाएं पेट की समस्याएं, डायरिया (दस्त) और गेस्ट्रोएंटेराइटिस (gastroenteritis) के मामले में काफी लाभदायक होती हैं। जिन लोगों को एस्पिरिन या अन्य सैलिसिलेट दवाइयों से एलर्जी है, उन्हें बिसमथ सब-सैलिसिलेट नहीं लेनी चाहिए। 12 साल तक के बच्चों को भी बिसमथ सब-सैलिसिलेट नहीं लेनी चाहिए, और ना ही 18 साल के बच्चे जिनको चिकनपॉक्स या फ्लू है। जो व्यक्ति खून पतला करने की दवाइयां, गठिया या डायबिटीज के उपचार की दवाइयां ले रहे हैं तो, बिसमथ सब-सेलिसिलेट लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करने चाहिए।
  2. एंटीहिस्टामिन (antihistamine) – इसमें डाइमिनहाइड्रिनेट, मेक्लीजीन हाइड्रोक्लोराइड आदि दवाइयां शामिल हैं। एंटीहिस्टामिन अंदरूनी कान की गति को समझने वाली संवेदना को कम कर देती है जिससे सफर आदि के दौरान लगने वाली उल्टियां कम हो जाती हैं। इन दवाइयों को जोखिम से पहले ही लेने से ये बेहतर काम करती हैं। (उदारण के लिए जिन लोगों को सफर के दौरान परेशानी होती हैं, वे अपना सफर शुरू करने से पहले ये दवा ले सकते हैं।) नशीले पदार्थ या नींद की गोलियां लेने वाले व्यक्ति एंटीहिस्टामिन लेने से पहले एक बार डॉक्टर से बात कर सकते हैं। दवा के लेबल पर लगे उसके तथ्यों और दिशा निर्देशों के बारे में अच्छे से पढ़ लें और उसकी खुराक और सीमा आदि के बारे में हर बात सुनिश्चित कर लें। और पुष्टी ना होने पर डॉक्टर से बात करें। 

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने के जोखिम और जटिलताएं - Nausea and Vomiting Risks & Complications in Hindi

मतली और उल्टी में जटिलताएं

इसके अतिरिक्त परेशानी के अलावा मतली और उल्टी के कारण ये जटिलताएं उतपन्न हो सकती हैं:

  • सांस लेते समय उल्टी जैसा प्रतीत होना या उबकाई लगना
  • इसोफेगस को क्षति पहुंचना
  • निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट्स स्तर में असामान्यता
  • कुपोषण या वजन घटना

जो लोग बेहोशी की हालत में हो या आंशिक रूप से सचेत हों, उनको सांस के दौरान उल्टी लग सकती है। और उल्टी में शामिल अम्ल फेफड़ों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाता है।

उल्टी लगने के दौरान इसोफेगस पर काफी दबाव पड़ता है, और तेज लगने वाली उल्टी कई बार इसोफेगस की परत में छेद भी कर देती है। छेद अगर छोटा हो दर्द और खून बहने लग सकता है, लेकिन अगर छेद बड़ा हो तो ये जिंदगी के लिए हानिकारक हो सकता है

उल्टी के दौरान काफी मात्रा में पानी और मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) निकलता है, जिस कारण से शरीर में निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर असामान्य हो जाता है। नवजात और शिशुओं में विशेष रूप से यह जटिलताएं देखी जाती हैं।

लंबे समय तक उल्टी की बीमारी से कुपोषण, वजन घटना और चयापचय में क्षति जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने में परहेज़ - What to avoid during Nausea and Vomiting in Hindi?

मतली में क्या परहेज करना चाहिए?

अगर आपको मतली का अनुभव हो रहा है, तो निम्न दिए कुछ सुझावों के बारे में पढ़ें,

  1. भारी भोजन अथवा जिसको पचाने में समय लगे ऐसे भोजन का सेवन करने से बचें,
  2. अगर गर्म भोजन की गंध से आप बीमार महसूस करते हैं, तो ठंडे भोजन और भोजन को ठंडा करके खाएं।
  3. दिन में तीन बार खाना खाने की बजाएं उसे थोड़ा-थोड़ा करके 6 बार खाने की कोशिश करें।
  4. खाना खाने के बाद लेटें या सोएं नहीं, सिर को उंचाई पर रखते हुऐ आराम करें।
  5. अगर सुबह उठने के बाद आपको मतली का अनुभव होता है, तो रात के भोजन में हल्के मीट (lean meat) का सेवन करें और सुबह बैड पर ही कुछ हल्के ब्रैड या बिस्किट खाएं।
  6. एक दिन में कम से कम 6 गिलास पानी के पिएं (पानी को भी एकदम ना पिएं थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीने की कोशिश करें)

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी आने में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Nausea and Vomiting in Hindi?

मतली या उल्टी की स्थिति में क्या खाना चाहिए

कम वसायुक्त बिस्कुट (Low-fat crackers) – हल्के खुशबुदार और स्वादिष्ट बिस्किट, वाटर बिस्किट, क्रीम बिस्किट आदि, इन सभी को पचाने में आसानी होती है। मतली के कारण हालत नाजुक होने पर ये पेट को ठीक रखने में मदद करते हैं।

ठंडे खाद्य पदार्थ – गर्म खाद्य पदार्थ पेट में जाकर अधिक गंध उत्पन्न करते हैं जिस कारण से मतली जैसी परेशानी होने लगती है। विल्जोएन के अनुसार, ‘ठंडे और सामान्य तापमान वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि गर्म भोजन की तुलना में ये कम गंध पैदा करते हैं”। कम वसायुक्त दही और ताजे फलों के रस काफी बेहतर विकल्प हैं।

खट्टे पदार्थ – खट्टे पदार्थ मतली से राहत देने में काफी सहायक होते हैं, साफ पानी में या हर्बल चाय में आधा निंबू निचोड़ पर पिएं। (और पढ़ें - नींबू के फायदे)

सूप – कम वसा वाली सब्जियां और चिकन अपनी अधिक नमकीन सामग्री के कारण पेट को सही रखने में मदद करती है। इसके अलावा ये तरल पदार्थों का एक अच्छा स्त्रोत होते हैं जो निर्जलीकरण जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

स्टार्च और सादे खाद्य पदार्थ - सूखे टोस्ट, राइस केक, हल्के बिस्कुट, ब्रैड स्टिक्स या सादे पॉपकॉर्न को थोड़ी मात्रा में खाने की कोशिश करें।

केला – अगर आपकी हालत कुछ कम हल्के पदार्थ पेट में पचा सकती है, तो केले का एक छोटा सा भाग खाएं, क्योंकि इनमें भरपूर मात्रा में पोटॉशियम होता है। एक ऐसा खनिज पदार्थ जो उल्टी और दस्त आदि जैसे समस्याओं को शरीर से कम कर देता है। (और पढ़ें -  केले के फायदे)

नरम और कम वसा वाले प्रोटीन पदार्थ – लो-प्रोटीन के पदार्थ आपकी मतली की परेशानियों को और भी बढ़ा सकते हैं। जब आप भारी भोजन खाना शुरू करें तो पहले कम वसा वाले खाद्य पदार्थ और आसानी से पचने वाले पदार्थ जैसे चिकन, बिना तेल की मछली और उबले अंडे आदि से शुरूआत करें। (और पढ़ें - अंडे के फायदे)

पानी की मात्रा – निर्जलीकरण (जो उल्टी लगने से पानी की कमी के कारण होता है) पर रोकथाम पाने के लिए दिनभर सादा पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में करके पिएं। 

Dr.Priyanka Trimukhe

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सामान्य चिकित्सा
3 वर्षों का अनुभव

Dr. Nisarg Trivedi

Dr. Nisarg Trivedi

सामान्य चिकित्सा
1 वर्षों का अनुभव

Dr MD SHAMIM REYAZ

Dr MD SHAMIM REYAZ

सामान्य चिकित्सा
7 वर्षों का अनुभव

Dr. prabhat kumar

Dr. prabhat kumar

सामान्य चिकित्सा
1 वर्षों का अनुभव

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की दवा - Medicines for Nausea and Vomiting in Hindi

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Pantodac Dsr खरीदें
Pantop D खरीदें
Emeset खरीदें
Pantocid D खरीदें
Vertin Tablet खरीदें
Vasograin खरीदें
Stemetil खरीदें
Domstal खरीदें
Vertizac खरीदें
Ondem खरीदें
Pan D खरीदें
Perinorm खरीदें
Perilin खरीदें
Reden O खरीदें
Emetil Plus खरीदें
DILIGAN खरीदें
Onsett खरीदें
Pantaset D खरीदें
R T Dom खरीदें
Promexy Hf खरीदें
VOMINOS खरीदें
Onsopil खरीदें
Pantavin D खरीदें
Prozine Plus खरीदें

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की ओटीसी दवा - OTC medicines for Nausea and Vomiting in Hindi

मतली (जी मिचलाना) और उल्टी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
Baidyanath Muktadi Bati खरीदें
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