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पित्ती (शीतपित्त) उछलना या निकलना क्या है?

पित्ती को शीतपित्त या हीव्स (Hives) भी कहा जाता है, ये लाल रंग के खुजलीदार और उभरे हुऐ चकत्ते होते हैं, जो किसी एलर्जिक पदार्थ (वह पदार्थ जो व्यक्ति को सूट न करे) के संपर्क में आने पर हो जाते हैं। गौरतलब है कि कुछ ऐसे एलर्जिक पदार्थ हैं, जो शरीर के संपर्क में आने पर शरीर में एलर्जी उत्पन्न कर देते हैं। ये संक्रामक नहीं होते, इसलिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।

ये शरीर के किसी भी हिस्से में उत्पन्न हो सकते हैं, आकार में ये एक छोटे धब्बे से लेकर बड़े, उभरे तथा एक दूसरे से जुड़े चकत्ते हो सकते हैं। ये चकत्ते शरीर पर कुछ घंटे से लेकर, कुछ हफ्तों तक रह सकते हैं।

एलर्जिक रिएक्शन 'पित्ती' का कारण बनती है, जैसे कि अत्याधिक तापमान, तनाव, संक्रमण व अन्य बीमारियां आदि। कुछ मामलों में पित्ती एंजियोडिमा (Angioedema) के साथ जुड़ा हो सकता है। एंजियोडिमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख, होंठ, हाथ, पैर या गले के आसपास सूजन आ जाती है।

(और पढ़ें - शरीर का तापमान कितना होना चाहिए)

  1. पित्ती (शीतपित्त) के प्रकार - Types of Hives in Hindi
  2. पित्ती (शीतपित्त) उछलने के लक्षण - Hives Symptoms in Hindi
  3. पित्ती (शीतपित्त) उछलने के कारण - Hives Causes And Risks in Hindi
  4. पित्ती (शीतपित्त) से बचाव - Prevention of Hives in Hindi
  5. पित्ती (शीतपित्त) का निदान - Diagnosis of Hives in Hindi
  6. पित्ती (शीतपित्त) का इलाज - Hives Treatment in Hindi
  7. पित्ती (शीतपित्त) की दवा - Medicines for Hives in Hindi
  8. पित्ती (शीतपित्त) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Hives in Hindi

पित्ती (शीतपित्त) के प्रकार - Types of Hives in Hindi

पित्ती के कितने प्रकार होते हैं?

पित्ती को आम तौर पर दो भागों में बांटा जाता है -

  • तीव्र पित्ती (Acute hives) – इसमें एलर्जी का रिएक्शन 6 हफ्ते या उससे कम रहता है, विशेष रूप से यह चेहरे, गर्दन, उंगलियां, पैर की उंगलियों और पुरुषों के जननांगों को प्रभावित करता है। हालांकि, तीव्र पित्ती शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है।
  • दीर्घकालिक पित्ती (Chronic hives) – इसमें एलर्जी का रिएक्शन 6 हफ्ते से अधिक समय तक रहता है।

(और पढ़ें - एनाफाइलैक्सिस)

पित्ती (शीतपित्त) उछलने के लक्षण - Hives Symptoms in Hindi

पित्ती के लक्षण क्या होते हैं?

पित्ती के लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं: 

  • पित्ती के दाग अक्सर समूहों में होते हैं, ये खासकर चेहरे, हाथ-पैर और उनकी उंगलियों और तलवे आदि पर होते हैं।
  • दाग सामान्य रूप से 24 घंटे के भीतर गायब हो जाते हैं, लेकिन उनकी जगह पर फिर नए दाग बन जाते हैं। ये शरीर के सिर्फ एक ही भाग या कई भागों में बन सकते हैं।
  • इसके लक्षण आम तौर पर 24 घंटे के भीतर दिखाई देने लगते हैं, कई बार एक दाग के फीका पड़ जाने के बाद दूसरा दाग विकसित होने लगता है।
  • कुछ मामलों में पित्ती के दाग कुछ दिन लगातार रह सकते हैं और दीर्घकालिक पित्ती के लक्षण महीनों से सालों तक स्थिर रह सकते हैं।
  • पित्ती के दाग अक्सर आकार में अलग-अलग होते हैं, ये अपनी आकृति बदलते रहते हैं। इनका बार-बार फीका पड़ना और फिर से दिखाई देने का क्रम चलता रहता है।
  • सूजन का विल्स (उभार की तरह) के रूप में दिखाई पड़ना और त्वचा पर चकत्ते की तरह बनना। आमतौर पर इनका रंग गुलाबी या लाल होता है और ये गोल या अंडाकार आकार में होते हैं। ये कुछ मिलिमीटर से कई इंच तक भी फैल सकते हैं। इनमें खुजली हो सकती है और इनके चारों तरफ की त्वचा लाल रंग की हो सकती है।

दीर्घकालिक पित्ती के लक्षण: 

  • गर्मी, व्यायाम और तनाव आदि से इसके लक्षणों एवं संकेतों की उभरने की प्रवृत्ति। 
  • होठों, पलकों और गले के नीचे दर्दनाक सूजन (Angioedema)।
  • लक्षणों एवं संकेतों का 6 हफ्तों से भी ज्यादा समय तक स्थिर रहने और अप्रत्याशित रूप से बार-बार विकसित होने की प्रवृत्ति।

तीव्र (अल्पकालिक) पित्ती कुछ ही हफ्तों के अंदर अचानक साफ होने लगता है। लेकिन, जिन लोगों को पित्ती है उन्हें आगे होने वाले उन लक्षणों व संकेतों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

एनाफिलेक्सिस एक गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया है, जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। इससे सांस लेने में कठिनाई और बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। यह एक आपात मेडिकल समस्या है, अगर इसका जल्दी इलाज ना किया जाए तो यह जीवन के लिए घातक हो सकती है।

निम्न स्थितियों में तुरंत मेडिकल उपचार की जरूरत पड़ सकती है -

  • मतली और उल्टी
  • ठंडी और चिपचिपी त्वचा।
  • दिल की धड़कनें बढ़ना।
  • सिर घूमना या चक्कर आना
  • अचानक और अप्रत्याशित रूप से चिंता महसूस होना।
  • मुंह, होठ, जीभ और गले की त्वचा में सूजन जिसके कारण निगलने में कठिनाई होने लगती है। 

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपके लक्षण अधिक गंभीर हैं और कुछ दिनों से यह ज्यादा महसूस हो रहे हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर आपकी समस्या की पहचान करेंगे और उसके लक्षणों को कम करने में मदद करने वाली दवाएं देंगे। पित्ती के फिर से होने की संभावना की रोकथाम करने के लिए उसके कारण को समझना काफी जरूरी होता है।

दीर्घकालिक पित्ती आपको किसी गंभीर एलर्जी रिएक्शन (Anaphylaxis) के जोखिम में नहीं डालती। अगर आप पित्ती के लक्षणों को एक गंभीर एलर्जी रिएक्शन के रूप में अनुभव करते हैं, तो तुरंत मेडिकल मदद लें। एनाफिलेक्सिस के लक्षणों और संकेतों में चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई और होंठ, पलक व जीभ की सूजन शामिल है

पित्ती (शीतपित्त) उछलने के कारण - Hives Causes And Risks in Hindi

पित्ती की समस्या क्योंक्यों  होती है?

पित्ती के ज्यादातर मामलों के कारणों का पता नहीं चल पाता।

पित्ती शरीर पर होने वाले दाने होते हैं, जो किसी एलर्जिक रिएक्शन से भी जुड़े हो सकते हैं।

पित्ती निम्न से शुरू हो सकती है -

  • किसी कीट या मधुमक्खी का काटना,
  • कुछ ऐसी चोजों को छूना जिससे आपको एलर्जी हो, जैसे लेटेक्स,
  • त्वचा पर दबाव पड़ना, जैसे काफी देर तक लगातार बैठे रहना,
  • किसी केमिकल के संपर्क में आना,
  • त्वचा को खरोंचना (खुरचना),
  • धूप, गर्मी, ठंडा आदि के संपर्क में आना,
  • तनाव,
  • दवाएं,
  • सूरज की रोशनी,
  • ठंडा तापमान,
  • वायरल इन्फेक्शन,
  • खाद्य पदार्थ: फल (विशेष रूप से खट्टे फल), दूध, अंडे और मूंगफली और घोंघा
  • जानवर से त्वचा का संपर्क,
  • फूलों के पराग (और पढ़ें - परागज ज्वर के उपचार)
  • अंदरूनी समस्या आदि।

पित्ती (शीतपित्त) से बचाव - Prevention of Hives in Hindi

पित्ती की रोकथाम कैसे करें?

अगर पित्ती के कारण की पहचान हो जाती है, तो उसे बढ़ाने वाले कारणों को हटाने और खत्म करने के लिए कुछ बेहतर इलाज किये जाते हैं, जैसे -

  • खाद्य पदार्थ - उन खाद्य पदार्थों को बिलकुल ना खाएं, जो लक्षणों को बढ़ाने के रूप में पहचाने गए हैं।
  • सूरज के संपर्क में आना - धूप में रहने के दौरान हमेशा सुरक्षात्मक कपड़े पहन कर रखें और शरीर पर सनब्लॉक लगाएं। (और पढ़ें - सूरज की रोशनी के नुकसान)
  • तापमान – अगर ठंड के संपर्क में आने के बाद आपके पित्ती के लक्षण बढ़ते हैं, तो ठंडे पानी में स्विमिंग ना करें। ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचें और सर्दी के दिनों में स्कार्फ के साथ मुंह और नाक ढ़क कर रखने की कोशिश करें। अगर आपको ठंडे मौसम में बाहर जाना है, तो गर्म कपड़े पहनें।
  • रगड़ना या खुरचना - बार-बार नहाने से खुजली और खुरदरेपन को कम किया जा सकता है, कठोर साबुन का प्रयोग करने से बचें। खुरचने या रगड़ने से पित्ती के दागों की स्थिती और बदतर हो सकती है।
  • लगातार दबाव - अधिक तंग कपड़े ना पहनें, ढीले-ढाले कपड़े पहनने से पित्ती के दागों को कम करने में मदद मिलती है।
  • दवाएं - अगर आपको संदेह हो रहा है कि किसी विशेष दवा से आपमें पित्ती की समस्या उत्पन्न होती है, तो डॉक्टर को बताएं। 

(और पढ़ें - पराबैंगनी किरणों के नुकसान)

पित्ती (शीतपित्त) का निदान - Diagnosis of Hives in Hindi

पित्ती का परीक्षण कैसे किया जाता है?

इसके परीक्षण के दौरान डॉक्टर शारीरिक जांच करते हैं और यह पता लगाने के लिए कि इन लक्षण व संकेतों का क्या कारण हो सकता है, उसके लिए डॉक्टर मरीज से काफी सारे सवाल भी पूछ सकते हैं। डॉक्टर मरीज को एक डायरी रखने के लिए भी बोल सकते हैं, ताकि निम्न चीजों पर नजर रखी जा सके, जैसे -

  • जो दवाएं, हर्बल उपचार या न्यूट्रिशन जो मरीज लेते हो
  • परिवार के किसी अन्य सदस्य की पित्ती से संबंधित जानकारी
  • अगर किसी कीड़े के काटने से ये समस्या हुई हो तो उसकी जानकारी
  • मरीज जो खाते या पीते हो
  • आपकी गतिविधियां
  • दाग कहां होते हैं और हल्के होने में कितना समय लेते हैं
  • पित्ती के दाग दर्द के साथ आते हैं या बिना दर्द के
  • आपकी पिछली मेडिकल जानकारी
  • पित्ती कब और कहां से शुरू हुई, इत्यादि।

अगर शारीरिक परीक्षण और पिछली जानकारियों से यह सामने आता है कि पित्ती का कारण रोगी के शरीर में मौजूद किसी समस्या के कारण हो रहा है, तो डॉक्टर ऐसे में ब्लड टेस्ट और स्किन टेस्ट आदि जैसे टेस्ट भी कर सकते हैं।

इसके सटीक कारण का पता लगाने से पित्ती के दोबारा होने से रोकथाम की जा सकती है।

दीर्घकालिक पित्ती -अगर पित्ती लगातार 6 हफ्ते तक रहती है, तो इसको शुरू करने वाली समस्या अंदरूनी हो सकती है, तो ऐसे में विशेषज्ञ एलर्जी टेस्ट का सुझाव नहीं देते।

नीचे दिए गए टेस्ट अंदरूनी समस्याओं की जांच करते हैं -

(और पढ़ें - इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय)

पित्ती (शीतपित्त) का इलाज - Hives Treatment in Hindi

पित्ती का इलाज कैसे किया जा सकता है?

पित्ती कहां से और कैसे शुरू होती है, इसकी पहचान ही उसे खत्म करने के लिए सबसे बेहतर इलाज है: 

  • लक्षणों को कम करने और रोकथाम करने के लिए डॉक्टर आपके लिए एंटिहिस्टामिन (Antihistamines) दवाएं लिख सकते है।
  • अगर आपको दीर्घकालिक पित्ती की समस्या है, तो डॉक्टर आपको एंटिहिस्टामिन को स्टेरॉयड जैसी अन्य दवाओं के साथ संयोजित करके दे सकते हैं।
  • गंभीर पित्ती या एंजियो एडेमा के लिए डॉक्टर एपिनेफ्रिन दवा का या स्टेरॉयड का इंजेक्शन दे सकते हैं।

पित्ती के दाग और सूजन के जाने का इंतजार करने के दौरान निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए -

  • ठंडे कमरे में सोने व काम करने की कोशिश करें।
  • हल्के और ढीले-ढाले कपड़े पहने।
  • गर्म पानी की बजाए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
  • कोमल और हल्के साबुन का उपयोग करें।
  • प्रभावित क्षेत्रो पर ठंडा व गीला कपड़ा लगाएं।
  • नियंत्रित करने के अन्य विकल्प:

1) ठंडी सेक करें:

  • त्वचा को किसी ठंडी चीज से सेकने से किसी भी प्रकार की जलन से राहत पाई जा सकती है।
  • ऐसा करने के लिए बर्फ के किसी टुकड़े पर तौलिया लपेट कर उसे त्वचा पर लगाएं।
  • इस प्रक्रिया को दिन में 2 से 3 बार दोहराएं।

2) ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करने से बचें, जो त्वचा को उत्तेजित करते हैं:

  • जो लोग पित्ती से पीड़ित हैं, तो कुछ साबुन उनकी त्वचा को और शुष्क बना सकते हैं। उस साबुन का इस्तेमाल करें, जो संवेदनशील त्वचा के लिए बनाया गया हो। विशेष रूप से बिना किसी खुशबू और अन्य हानिकारक उत्तेजित केमिकल वाले साबुन का ही इस्तेमाल करें।
  • उत्तेजित करने वाले मॉश्चराइज़र और लोशन से भी बचना चाहिए। जब संदेह हो, तो संवेदनशील त्वचा के लिए चुने गए नुस्खों का इस्तेमाल करें। नहाने के तुरंत बाद इन नुस्खों का प्रयोग करना खुजली से राहत दिला सकता है। 
  • गर्मी, खुजली की समस्या को और अधिक बदतर बना सकती है। हल्के कपड़ें पहने और अपने घर के तापमान को ठंडा और आरामदायक रखें। धूप में बैठने से बचें।

3) एलोवेरा:

एलोवेरा एक ऐसा पौधा है, जिसको चिकित्सा से भरे गुणों के लिए जाना जाता है:

  • एलोवेरा में जलन व सूजन रोधक (Anti-inflammatory) गुण होते हैं, लेकिन इसके कारण डर्मेटाइटिस (Dermatitis/ एक प्रकार का त्वचा विकार) की समस्या हो सकती है। इसलिए इसको दागों पर लगाने के पहले एक जगह पर टेस्ट कर लेना बेहतर माना जाता है।
  • त्वचा के पैच का परीक्षण करने के लिए, एलोवेरा की एक छोटी सी मात्रा को किसी अप्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। अगर हो सके तो इसे अपनी कलाई पर लगाने की कोशिश करें। अगर 24 घंटे के अंदर इसने किसी प्रकार की जलन या खुजली उत्पन्न नहीं की तो इसे पित्ती के दागों पर लगाया जा सकता है।
  • आप एलोवेरा के जेल को दागों पर अपनी जरूरत के अनुसार लगा सकते हैं, जैसे दिन में 2 या 3 बार।

(और पढ़ें - एलोवेरा के फायदे)

4) ऑवर द काउंटर विकल्प:

मेडिकल स्टोर आदि से बिना डॉक्टर की पर्ची मिलने वाली दवाएं व अन्य प्रोड्क्ट को ऑवर द काउंटर प्रोड्क्ट कहा जाता है।

अगर घरेलू उपचार पित्ती के इलाज के लिए काफी ना रहें तो शायद ऑवर-द काउंटर प्रोडक्ट्स  बेहतर काम कर सकते हैं। ये प्रोडक्ट्स केवल खुजली और जलन से ही राहत नहीं दिलाते, वे आपके शरीर के पित्ती का कारण बनने वाली प्रतिक्रिया को भी लक्ष्य कर सकते हैं।

5) कैलामाइन लोशन;

  • जिन उत्पादों में कैलामाइन होता है, वे त्वचा को ठंड प्रदान करके खुजली को दूर करते हैं। आप कैलामाइन को सीधे अपनी त्वचा पर भी लगा सकते हैं।
  • पित्ती का इलाज करने के लिए आप कैलामाइन लोशन का उपयोग एक आवश्यक उपचार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

6) डाइफिनहाइड्रामिन (बेनेड्रिल)

खाने वाली एंटीहिस्टामिन दवाएं चकत्ते और खुजली जैसे अन्य लक्षणों को कम कर सकती हैं,  हालांकि इसके कारण उनींदापन की समस्या हो सकती है।

7) प्रिस्क्रिप्शन दवाएं:

अगर आप गंभीर और लंबे समय से पित्ती से ग्रसित हैं, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेना जरूरी होता है। अपने डॉक्टर से अपने लक्षणों और उनके लिए बेहतर इलाज का पता लगाने के लिए बात करें।

पित्ती (शीतपित्त) की दवा - Medicines for Hives in Hindi

पित्ती (शीतपित्त) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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पित्ती (शीतपित्त) की ओटीसी दवा - OTC medicines for Hives in Hindi

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