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संक्षेप में सुनें

हमारे शरीर का सामान्य तापमान 98.6 डिग्री F (37 डिग्री C) होता है। जब शरीर का तापमान सामान्य अवस्था से अधिक बढ़ना शुरू हो जाता है तो उस स्थिति को बुखार या पयरेक्सिया (pyrexia) कहते हैं।

बुखार शरीर का बीमारी से लड़ने का एक तरीका है। इसलिए बुखार संक्रमण का एक लक्षण है। संक्रमण के दौरान हमारा रक्त और लसीका प्रणाली सफेद रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी- WBC) का उत्पादन करता है, जो संक्रमण (रोगाणुओं) से लड़ती हैं। इस स्थिति में हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिसके कारण हमारी मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और कंपकपी होने लगती है। 

आमतौर पर हमारे शरीर का तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस (105.8 से 107.6 डिग्री फारेनहाइट) से ऊपर नहीं जाता है। हम सभी को बुखार के कारण शरीर में उठने वाली ठंडी लहरों और थकावट का सामना करना पड़ा है। बुखार कई अन्य परिस्थितियों के कारण भी हो सकता है, जो कभी सामान्य रहता है तो कभी गंभीर स्थिति तक भी पहुँच सकता है। 

इसके अंतर्गत वायरल (viral), बैक्टीरियल (bacterial) और परजीवी संक्रमण (parasitic infections) शामिल हैं, जैसे कि साधारण सर्दी, मूत्र मार्ग में संक्रमण (urinary tract infection), दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस), मलेरिया, एपेन्डिसाइटिस (appendicitis) आदि। इसके गैर-संक्रामक कारणों में वस्क्युलिटिस (vasculitis), डीप  वीन  थ्रोम्बोसिस (deep vein thrombosis), दवा के साइड इफेक्ट्स और कैंसर इत्यादि शामिल हैं।

यह हाइपरथर्मिया (hyperthermia) से भिन्न होता है। हाइपरथर्मिया में शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जो एक सेट पॉइंट तापमान से ज्यादा होता है। ऐसा या तो बहुत गर्मी के उत्पन्न होने से या फिर पर्याप्त मात्रा में गर्मी के बाहर न निकलने से होता है। 

(और पढ़ें - थर्मामीटर का उपयोग कैसे करें)

  1. बुखार के प्रकार - Types of Fever in Hindi
  2. कितने तापमान को बुखार कहा जाता है - What temperature is a fever in Hindi
  3. बुखार के लक्षण - Fever Symptoms in Hindi
  4. बुखार के कारण - Fever Causes in Hindi
  5. बुखार से बचाव - Prevention of Fever in Hindi
  6. बुखार का परीक्षण - Diagnosis of Fever in Hindi
  7. बुखार का इलाज - Fever Treatment in Hindi
  8. बुखार के जोखिम और जटिलताएं - Fever Risks & Complications in Hindi
  9. बुखार की दवा - Medicines for Fever in Hindi
  10. बुखार की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Fever in Hindi
  11. बुखार के डॉक्टर

बुखार के प्रकार - Types of Fever in Hindi

बुखार कितने प्रकार के होते हैं?

1.लगातार बुखार होना (Continuous Fever)

यदि 24 घंटे से अधिक समय तक शरीर का तापमान सामान्य से ज़्यादा हो और इस तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक बदलाव नहीं हुआ हो। इस प्रकार का बुखार लोबर निमोनिया (lobar pneumonia), टाइफाइड, मूत्र पथ में संक्रमण (urinary tract infection), संक्रमित एंडोकार्डिटिस (endocarditis), ब्रुसेलोसिस (brucellosis) और टाइफस (typhus) में होता है।

2.स्वल्पविराम बुखार (Remittent Fever)

ये बुखार चढ़ता-उतरता रहता है या बिलकुल नहीं उतरता। इसमें शरीर का तापमान पूरे दिन सामान्य से ऊपर रहता है और इस अवधि में तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बदलाव नहीं आता है। इस प्रकार का बुखार टाइफाइड और संक्रमित एंडोकार्डिटिस (endocarditis) के रोगियों में देखा जाता है।

3.जाड़े का बुखार  (Intermittent Fever) 
इस बुखार में 24 घंटों की अवधि में उच्च तापमान केवल कुछ घंटों के लिए रहता है और बाकी पूरे दिन तापमान सामान्य रहता है। यह प्रक्रिया हर दूसरे दिन या फिर कुछ दिनों में आमतौर पर अपने आपको बार बार दोहराती है। आंतरायिक बुखार के लिए उत्तरदायी कुछ बीमारियों में मलेरिया, प्यूमिया( pyemia) और सेप्टीसीमिया (septicaemia) शामिल हैं। 

4. सेप्टिक बुखार (Hectic or Septic)
एक उच्च तापमान, जिसमें एंटीपैरेटिक्स (बुखार की दवा) से भी कोई सुधार नज़र नहीं आता, सेप्टिक बुखार का संकेत देता है। इस अवस्था में रोगी की देखभाल की जानी चाहिए और उसके स्वास्थ्य में किसी भी तरह की गिरावट को रोकने के लिए समीक्षा की जानी चाहिए।

5. पेल एब्स्टीन प्रकार (Pel Ebstin Type)
इसमें शरीर के तापमान में बार बार बदलाव होता है। तापमान में वृद्धि के लिए 3 दिन लग सकते हैं, तापमान 3 दिनों के लिए उच्च रह सकता है और फिर 3 दिनों में कम हो जाता है। उसके बाद 9 दिनों के लिए मरीज़ का बुखार उतर जाता है। 

6. कम /मियादी बुखार  (Low / periodic grade Fever)

यह बुखार की पुनरावृत्ति होती है, जो कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक रहती है।  बुखार होने के बीच में अंतराल होते हैं जिनमें कोई लक्षण उपस्थित नहीं होता। इस बुखार का एक पैटर्न होता है, जो बार-बार संक्रमण, असाध्यता (malignancy) या नॉन-इन्फेक्शस इंफ्लेमेटरी रोगो (non-infectious inflammatory diseases) के कारण हो सकता है।

बुखार के हमले जो एक ही क्रम का पालन करते हैं उनके लिए गैर-संक्रामक कारक ज़िम्मेदार होते हैं जैसे – स्टिल्स रोग (Still’s disease), रुमेटाइड गठिया (Rheumatoid arthritis), क्रोहन रोग (Crohn’s disease) और बीचेट्स सिंड्रोम (Bechet’s syndrome)। 

कितने तापमान को बुखार कहा जाता है - What temperature is a fever in Hindi

किस तापमान को बुखार कहा जाता है? 

  1. निम्न स्तर के बुखार की सीमा लगभग 100 डिग्री F - 101 डिग्री F तक होती है।
  2. 102 डिग्री F वयस्कों के लिए मध्यवर्ती स्तर है पर इतना ही तापमान अगर शिशुओं (0-6 महीने) का है तो उन्हें फ़ौरन ही चिकित्सा देखभाल के लिए ले जाना चाहिए।
  3. उच्च स्तर के बुखार की सीमा 103 डिग्री F-104 डिग्री F तक होती है।
  4. अगर तापमान गंभीर रूप से बढ़ जाता है, यानि 104 डिग्री  F -107 डिग्री F या उससे अधिक हो सकता है। बहुत तेज बुखार को हाइपरपीरेक्सिया (hyperpyrexia) कहा जाता है।

निम्न या मध्य स्तर के बुखार में लोगों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। हालाँकि 104 डिग्री F (40 डिग्री C) या उससे अधिक तापमान वाला बुखार खतरनाक हो सकता है, जिसमे तत्काल घरेलू उपचार या चिकित्सा कराना जरुरी होता है। अगर ऐसा न किया जाये तो मरीज़ को गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऐसा विशेष रूप से शिशुओं, बच्चों और बुजुर्गों में होता है। 

(और पढ़ें - शरीर का तापमान कितना होता है)

बुखार के लक्षण - Fever Symptoms in Hindi

बुखार के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं –

  1. वयस्कों और बच्चों में 100.4 F (38 C) से अधिक तापमान
  2. कंपकंपी, थरथराना, और ठंड लगना
  3. मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द या शरीर के दूसरे अंगों में दर्द (रूमेटोइड अर्थराइटिस)
  4. बार-बार या अत्यधिक पसीना आना 
  5. हृदय गति (हार्ट रेट) का तेज़ होना या घबराहट महसूस होना (palpitations)  
  6. त्वचा का फड़कना (Skin flushing) या गर्म होना 
  7. बेहोशी, चक्कर आना या हल्का सिरदर्द होना 
  8. आंखों में दर्द (और पढ़ें - आँखों में दर्द का घरेलू इलाज)
  9. कमजोरी
  10. भूख में कमी
  11. सिर दर्द (और पढ़ें - सिर दर्द के घरेलू उपाय)
  12. उल्टी
  13. दस्त (और पढ़ें - डायरिया के घरेलू उपचार)
  14. सुस्त होना 
  15. नाक का बहना 
  16. गले में खराश, खाँसी, आवाज़ का कर्कश हो जाना (hoarseness)
  17. नींद में कमी (sleepiness)

बुखार के कारण - Fever Causes in Hindi

बुखार तब होता है जब आपके मस्तिष्क का एकहिस्सा, जिसे हाइपोथैलेमस (hypothalamus; जिसे आपके शरीर की "थर्मोस्टेट" भी कहा जाता है) कहा जाता है, आपके शरीर के सामान्य तापमान के निर्धारित बिंदु को ऊपर ले जाता है। जब ऐसा होता है, तब आपको ठंड महसूस हो सकती है और आप ज़्यादा कपडे पहन लेते हैं या कंबल में लिपट जाते हैं या आपको कंपकपी भी हो सकती है, जिससे शरीर में ज़्यादा गर्मी उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

शरीर का सामान्य तापमान पूरे दिन बदलता रहता है, जैसे सुबह के समय शरीर का तापमान कम होगा और देर दोपहर या शाम को तापमान बढ़ जाता है। हालांकि ज्यादातर लोग 98.6 F (37 डिग्री C) के तापमान को सामान्य मानते हैं। आपके शरीर का तापमान डिग्री के अनुसार 97 F (36.1 C) से 99 F (37.2 C) ऊपर नीचे हो सकता है, जिसे सामान्य माना जाता है।

बुखार या शरीर का तापमान बढ़ने के कारण –

  1. वायरस संक्रमण
  2. जीवाणु द्वारा संक्रमण (bacterial infection)
  3. गर्मी के कारण बेहद थकान होना (Heat exhaustion) (और पढ़ें – थकान से बचने के उपाय)
  4. सूजन से सम्बंधित समस्याएं, जैसे रूमेटोइड गठिया - जोड़ों की परत में सूजन 
  5. एक घातक ट्यूमर
  6. कुछ दवाएं, जैसे कि एंटीबायोटिक्स और ड्रग्स जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  7. कुछ टीकाकरण (immunizations), जैसे डिप्थीरिया, टिटनेस और अकेल्लुलर पर्टुसिस - डीटीएपी (acellular pertussis - DTaP) या न्यूमोकोकल वैक्सीन

बुखार से बचाव - Prevention of Fever in Hindi

आप संक्रामक रोगों के जोखिम को कम करके बुखार को रोकने में सफल हो सकते हैं। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं, जो मदद कर सकते हैं –

  1. अक्सर अपने हाथों को धोयें और आपने बच्चो को भी यही सिखायें। ऐसा खासतौर पर खाने से पहले, शौचालय का उपयोग करने के बाद, भीड़ में समय बिताने के बाद, किसी संक्रमित व्यक्ति के पास जाने के बाद, जानवरों को छूने के बाद और सार्वजनिक वाहनों में यात्रा के दौरान करें। 
  2. अपने बच्चों को अच्छी तरह से हाथों को धोना सिखायें। हाथों के अगले और पिछले हिस्सों पर साबुन अच्छी तरह से लगाएं और फिर उन्हें पानी से अच्छी तरह धो लें। 
  3. हमेशा हैंड सेनेटाइजर (hand sanitizer) अपने साथ रखें। जब आपके पास साबुन और पानी उपलब्ध न हो, तो इसका इस्तेमाल करें।    
  4. अपनी नाक, मुँह या आँखों को छूने से बचें, क्योंकि इन रास्तों से वायरस और बैक्टीरिया आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
  5. छींकते या खांसते समय अपने मुँह और नाक को ढककर रखें और अपने बच्चों को भी ऐसा करने के लिए कहें। जब भी संभव हो, छींकने और खांसने के दौरान दूसरों से दूर रहें, ताकि वे इस संक्रमण का शिकार न हों। 
  6. अपने बच्चों के साथ कप, पानी की बोतलें और बर्तन साझा (share) करने से बचें। 

बुखार का परीक्षण - Diagnosis of Fever in Hindi

बुखार का निदान

बुखार का निदान करना बहुत आसान है। थर्मामीटर से मरीज़ के शरीर का तापमान जाँचकर बुखार का निदान घर पर ही कर सकते हैं। 

मरीज़ को आराम करने का सुझाव दिया जाता है, क्योंकि शारीरिक गतिविधियों से शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। बुखार एक सामान्य रोग है जिसका इलाज संभव है। ज्यादातर मामलों में, बुखार का कारण जल्दी ही पता चल जाता है।

बुखार की वजह से ​​समस्या तब शुरू होती है, जब किसी भी व्यक्ति को लम्बे समय से बुखार हो और उसके कारण का भी आसानी से पता नहीं लग पाता। बुखार का कारण निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. संक्रामक एजेंट
  2. सूजन
  3. प्रतिरक्षा या चयापचय विकार
  4. इन्फ्लेम्सोमे (inflammasome) कामकाज में आनुवांशिक असामान्यता (genetic abnormality)

बुखार की नैदानिक प्रक्रिया हर वर्ग (सतत, प्रेषित, आंतरायिक, व्यस्त) में भिन्न होती है। लम्बे समय से होने वाले बुखार के कारणों की खोज करना हमेशा संभव नहीं होता। इन मामलों में अज्ञात मूल के बुखार का पता चलता है। 

एक व्यक्ति को बुखार हो सकता है, अगर – 

  1. मुँह का तापमान 37.7 C (99.9 F) से अधिक है। 
  2. मलाशय (गुदा) का तापमान 37.5-38.3 C (100-101 F) से अधिक है। 
  3. बांह के नीचे या कान के अंदर का तापमान 37.2 C (99 F) से अधिक है।

बुखार एक बीमारी के बजाय एक संकेत होता है। जब डॉक्टर पुष्टि करते हैं कि शरीर का तापमान सामान्य तापमान से अधिक है, तब वे निश्चित नैदानिक ​​परीक्षणों का सुझाव देते है, जो अन्य लक्षणों के आधार पर निर्धारित हो सकते हैं। इसमें रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण, एक्स-रे और अन्य इमेजिंग स्कैन शामिल है। 

बुखार का इलाज - Fever Treatment in Hindi

बुखार को कम करने के कई तरीके हैं। सामान्य तौर पर बुखार को कम करने के लिए आइबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन का उपयोग किया जा सकता है। दोनों दवाएं दर्द को नियंत्रित करने और बुखार को कम करने में मदद करती हैं। दोनों दवाओं को बारी बारी से बदलकर खाने से आराम मिलेगा और एक दवा के लेने से आकस्मिक ओवरडोज़ की संभावना भी कम हो जाएगी। कभी-कभी, बुखार को रोकने के लिए एसिटामिनोफेन और आइबुप्रोफेन दोनों दवाओं को एक साथ लेने की आवश्यकता हो सकती है। ठन्डे पानी से स्नान करने या त्वचा (शरीर) पर ठंडा तौलिया रखने से बुखार को कम करने में मदद मिलती है।मौखिक रूप से लिया गया ठंडा तरल पदार्थ भी मरीज़ को तुरंत रीहाइड्रेट और ठंडा कर देता है।

बुखार को कम करने के लिए एस्पिरिन दवा को कभी भी सबसे पहले नहीं चुना जाता। इसका उपयोग बच्चों पर बिलकुल भी नहीं किया जाना चाहिए। एस्पिरिन की ज्यादा खुराक वयस्को के लिए विषैली साबित हो सकती है  या बच्चों में रे (Reye) के सिंड्रोम जैसी बीमारी पैदा कर सकती है। एस्पिरिन दवा 18 वर्ष या उससे कम उम्र के व्यक्तियों को नहीं देनी चाहिए, जब तक किसी चिकित्सक द्वारा निर्देशित न हो। 

आइबुप्रोफेन, हाइपोथेलेमस को शरीर का तापमान बढ़ाने से रोकती है। दवाइयों की दुकान से इस दवा की 200 मिलीग्राम की गोलियाँ खरीद सकते हैं। शरीर के तापमान को कम करने के लिए हर चार घंटे में एक या दो गोलियाँ लेना ठीक होता है। इस दवा का कम से कम उपयोग करें। बच्चों की खुराक उनके वजन पर आधारित होती है।

आईबुप्रोफेन के दुष्प्रभावों (side effects) में मतली और उल्टी शामिल है। भोजन करने के बाद इस दवा को लेने से इन्हे रोका जा सकता है। इसके दुर्लभ दुष्प्रभावों में दस्त, कब्ज, दिल का दर्द और पेट दर्द शामिल है। पेट का अल्सर या किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और जिन लोगों को एस्पिरिन से एलर्जी हो, उन्हें आईबुप्रोफेन के सेवन से बचना चाहिए। 

बुखार को कम करने में एसिटामिनोफेन भी प्रभावी होती  है। दवाइयों की दुकान पर इसकी 325 मिलीग्राम या 500 मिलीग्राम की गोलियाँ मिलती हैं। यह दवा तरल (liquid) रूप में भी उपलब्ध है। बुखार दूर करने के लिए हर चार घंटे में एक या दो गोलियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कई और अन्य दवाओं की तरह बच्चों की खुराक उनके के वजन पर आधारित होती है। वयस्कों द्वारा 24 घंटो में ली गयी कुल खुराक 3 ग्राम से अधिक (500 मिलीग्राम की छह गोलियों के बराबर) नहीं होनी चाहिए।

इसके साइड इफेक्ट बहुत ही कम देखे जाते हैं, लेकिन कुछ लोगो को दवा से एलर्जी होती है। अत्यधिक मात्रा में खुराक लेने से यकृत विफलता (liver failure) हो सकती है। इसलिए यकृत रोग से पीड़ित लोग और वो लोग जो बहुत समय से अल्कोहल का सेवन कर रहे हैं, उन्हें इस दवा से बचना चाहिए।

एसिटामिनोफेन के सामान्य ब्रांड के नाम एस्पिरिन फ्री एनासीन (Aspirin Free Anacin), फिवरल (Feverall), जेनापैप (Genapap), पैनाडोल (Panadol), टेम्प्रा (Tempra), और टाइलेनोल (Tylenol) हैं। एसिटामिनोफेन के रूप में वर्णित विशिष्ट सामग्री जो उस दवा में मौजूद है, उसके लिए दवा के लेबल को पढ़ें। बहुत सी अन्य दवाओं में एसिटामिनोफेन की मात्रा होती है जो और अन्य दवाओं के साथ संयोजन में होती है। इसलिए सुनिश्चित करने के लिए दवाइयों की जाँच कर लेनी चाहिए कि संयोजित दवाओं को मिलाकर 24 घंटे में ली जाने वाली कुल खुराक 3 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।  

बुखार से किसी भी व्यक्ति को निर्जलीकरण (Dehydration) हो सकता है, इसलिए तरल पदार्थों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। त्वचा को ठंडा करने का प्रयास करते रहने से व्यक्ति को अधिक असुविधाजनक महसूस हो सकता है।  इससे कंपकपी भी हो सकती है, जो वास्तव में शरीर के तापमान को बढ़ा देती है। ऐसा तब होता है, जब बुखार किसी संक्रमण के कारण हुआ हो। इसके अलावा इसका उपचार बुखार के कारण और इसके लक्षणों पर निर्भर करता है। सामान्य सर्दी के लक्षणों का इलाज घर पर ही दवाओं से किया जा सकता है।  (और पढ़ें –  शरीर में पानी की कमी के महत्वपूर्ण संकेत ) 

यदि बुखार गर्म मौसम या ज़रूरत से ज़्यादा तनाव (ओवर एक्सेरशन) (उदाहरण के लिए लू (Heat Stroke), हाइपरथर्मिया और गर्मी से होने वाली थकावट) के कारण होता है, तो इसकी उपचार की तकनीक किसी भी अन्य बुखार से अलग होती है।  ऐसे बुखार में न तो एसिटामिनोफेन और न ही आईबुप्रोफेन प्रभावी होगी। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को तुरंत ही शांत हो जाना चाहिए। यदि व्यक्ति भ्रमित या बेहोश हो जाए तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की सहायता लेनी चाहिए। मदद के लिए प्रतीक्षा करते समय रोगी को गर्म वातावरण से निकालें और फ़ौरन ही उसके कपड़े उतार दें। ऐसे में शरीर को गीले स्पंज से ठंडा किया जाना चाहिए। पंखे को रोगी के पास ही रखें जिससे उसकी हवा सीधे उस व्यक्ति तक पहुँच सके।  (और पढ़ें – लू से बचने के आसान उपाय)

बुखार का इलाज उसके कारणों पर निर्भर करता है। अधिकांश मामलों में हाइपरथर्मिया को छोड़कर एसिटामिनोफेन या आईबुप्रोफेन की गोलियाँ बुखार कम करने के लिए दी जा सकती हैं (ऊपर घरेलू उपचार देखें)। निर्जलीकरण को रोकने के लिए यदि आवश्यक हो तो मुँह द्वारा तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं।

वायरल बीमारियाँ आमतौर पर बिना चिकित्सा उपचार लिए ठीक हो जाती हैं। हालाँकि, विशिष्ट लक्षणों को दूर करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं। ये दवाइयाँ बुखार को कम करने, गले की सूजन और खराश को कम करने  और बहती हुई नाक को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। जिन वायरस की वजह से उल्टी और दस्त होते हैं, उन्हें रोकने के लिए इंट्रावेनस फ्लुइड्स (IV fluids) और दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। ये दवाएं दस्त और मतली को रोकने में भी मदद करती हैं। कुछ वायरल बीमारियों का इलाज एंटीवायरल दवाओं के साथ किया जा सकता है। हर्पीस (Herpes) और इन्फ्लूएंजा वायरस इसके उदाहरण हैं।

जीवाणु संबंधी बीमारियों के लिए विशिष्ट एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है। ये एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के प्रकार या फिर शरीर में उसकी उपस्थिति के स्थान पर निर्भर करता है। चिकित्सक यह निर्धारित करते हैं कि व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया जाए या उसे घर भेज दिया जाए। यह निर्णय व्यक्ति की बीमारी और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
अधिकांश फंगल संक्रमणों (fungal infections) का इलाज एंटीफंगल दवाओं से किया जा सकता है।
जब दवा बंद हो जाती है तब उस दवा से उत्पन्न होने वाला बुखार भी खत्म हो जाता है। 
जब बीमार व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली में बाधा आती है, तो तुरंत उसका मूल्यांकन किया जाएगा।  अतिताप (हाइपरथर्मिया) से पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।

अधिकतर बुखार उपयुक्त उपचार के बाद कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। बुखार के कारण का सही ढंग से उपचार करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा दी गयी सलाह का पालन करना चाहिए। इस प्रकार बुखार के शुरुआती चरण मे ही इसका निदान कुछ दिनों या हफ्तों मे किया जा सकता है। ये बुखार के कारण पर निर्भर करता है।

अगर उपचार के बावजूद भी बुखार के लक्षण गंभीर हो जाएँ और बुखार तीन दिनों तक भी ना उतरे या अगर बिना उपचार के बुखार एक हफ्ते तक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखायें। 

बुखार के जोखिम और जटिलताएं - Fever Risks & Complications in Hindi

बुखार आमतौर पर गंभीर जटिलताओं का कारण नहीं बनता है, लेकिन अचानक बहुत अधिक बुखार होना या लंबे समय से होने वाले बुखार खतरनाक हो सकते हैं। जिसके कारण निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं -

  1. मतिभ्रम – बच्चों की तुलना में वयस्कों में शरीर के तापमान बढ़ने से भ्रम होने की संभावना अधिक होती है। यह संभव है कि आपका बच्चा बुखार की वजह से ऐसी चीजें देखना शुरू कर सकता है जो वास्तव में नहीं हैं (जैसे कि गुड़िया को अपने कमरे में उड़ते हुए या अपने ऊपर कीड़ों को चलते हुए देखना)। 102 डिग्री F या उससे अधिक तापमान होने पर भ्रम होने की अधिक संभावना होती है।
  2. बुखार के दौरे – जब बच्चों में बुखार के दौरे पड़ते हैं, उस दौरान उनके शरीर में ऐंठन, अकड़न या कंपकपाहट होने लगती है, जो बच्चों में खासकर बुखार के कारण होती है। ("फेब्रिले"  लैटिन शब्द "फेब्रिस" से आया है, जिसका मतलब होता है – बुखार)। लगभग 2 से 5 प्रतिशत बच्चे इस बुखार के दौरे का अनुभव करते हैं। जिन बच्चों को पहले बुखार के दौरे पड़ चुके हैं, उन  30 से 40 प्रतिशत बच्चों को ऐसे दौरे का अनुभव फिर से हो सकता है।  
  3. निर्जलीकरण – निर्जलीकरण हल्का, मध्यम या अधिक मात्रा में हो सकता है। आपके शरीर से जो तरल पदार्थ निकलते हैं, उनकी कमी को तुरंत पूरा करना ज़रूरी होता है। निर्जलीकरण तब होता है, जब आप 24 घंटे तक बिना उलटी या उलटी के साथ गंभीर दस्त, बुखार, मल में खून आना या किसी भी तरल पदार्थ का सेवन नहीं कर पा रहे हों। (और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी के 10 महत्वपूर्ण संकेत)

कई तरह के संक्रमण बुखार का कारण हो सकते हैं। यदि इलाज न किया जाए तो उससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ऊपर वर्णित स्थितियों में बुखार के अंतर्निहित कारणों के लिए इलाज करना महत्वपूर्ण है।

Dr.Priyanka Trimukhe

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सामान्य चिकित्सा
3 वर्षों का अनुभव

Dr. Nisarg Trivedi

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सामान्य चिकित्सा
1 वर्षों का अनुभव

Dr MD SHAMIM REYAZ

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7 वर्षों का अनुभव

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बुखार की दवा - Medicines for Fever in Hindi

बुखार के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Zerodol खरीदें
Hifenac खरीदें
Dolowin खरीदें
Signoflam Tablet खरीदें
Ecosprin Av Capsule खरीदें
Zerodol P खरीदें
Zerodol Th खरीदें
Zerodol Sp खरीदें
Ecosprin खरीदें
Zerodol MR खरीदें
Samonec Plus खरीदें
Starnac Plus खरीदें
Hifenac P Tablet खरीदें
Ibicox खरीदें
Serrint P खरीदें
Tremendus Sp खरीदें
Ibicox Mr खरीदें
Twagic Sp खरीदें
Iconac P खरीदें
Sioxx Plus खरीदें
Ultiflam Sp खरीदें
Inflanac Plus खरीदें
Sistal Ap खरीदें

बुखार की ओटीसी दवा - OTC medicines for Fever in Hindi

बुखार के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
Baidyanath Saptavinshati Guggulu खरीदें
Baidyanath Kamdudha Ras (Moti Yukta) खरीदें
Baidyanath Kaharva Pishti खरीदें
Baidyanath Laghu Malini Basant Ras खरीदें
Divya Rajat Bhasma खरीदें
Zandu Sona Chandi Chyavanprash Plus खरीदें
Baidyanath Tribhuvan Kirti Ras खरीदें
Baidyanath Kafkuthar Ras खरीदें
Baidyanath Sphatika Bhasma खरीदें
Baidyanath Muktashukti Bhasma खरीदें
Divya Sanjivani Vati खरीदें
Baidyanath Sarivadi Vati खरीदें
Baidyanath Godanti Mishran खरीदें
Baidyanath Kasturi Bhairav Ras खरीदें
Baidyanath Sanjivani Bati खरीदें
Divya Kutjarishta खरीदें
Baidyanath Sanshamani Vati खरीदें
Baidyanath Dantobhedgadantak Ras खरीदें
Baidyanath Mahasudarshana Churna खरीदें
Baidyanath Talisadi Churna खरीदें

References

  1. American College of Emergency Physicians [Internet] Texas, United States; Fever
  2. DimieOgoina. Fever, fever patterns and diseases called ‘fever’ – A review. Journal of Infection and Public Health Volume 4, Issue 3, August 2011, Pages 108-124. Elsevier B.V. [Internet]
  3. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; When & How to Wash Your Hands
  4. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Healthy Habits to Help Prevent Flu
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