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लिवर (जिगर) हमारे शरीर का एक मुख्य आंतरिक अंग होता है, जो शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि और दूसरा सबसे बड़ा अंग होता है। लिवर पित्त का निर्माण करता है, जो वसा के टूटने में मदद करता है। यह रक्त के डिटाक्सिफिकैशन में भी मदद करता है। एक सामान्य लिवर में कुछ फैट ज़रूर होता है, लेकिन कभी-कभी लिवर की कोशिकाओं में अनावश्यक फैट की मात्रा बढ़ जाती है। यह एक गंभीर रोग होता है जिसे आम तौर पर फैटी लिवर के नाम से जाना जाता है। फैटी लिवर विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - एल्कोहल फैटी लिवर और गैर एल्कोहल फैटी लिवर। अनुचित आहार के साथ साथ नियमित और अधिक मात्रा में शराब पीना, मोटापा आदि भी फैटी लिवर के लिए कारण हो सकते हैं। यह बीमारी आनुवांशिक (पारिवारिक) भी हो सकती है।

  1. फैटी लिवर के लक्षण - Fatty Liver Symptoms in Hindi
  2. फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक - Fatty Liver Causes & Risk Factors in Hindi
  3. फैटी लिवर से बचाव - Prevention of Fatty Liver in Hindi
  4. फैटी लिवर का परीक्षण - Diagnosis of Fatty Liver in Hindi
  5. फैटी लिवर का इलाज - Fatty Liver Treatment in Hindi
  6. फैटी लिवर की जटिलताएं - Fatty Liver Complications in Hindi
  7. फैटी लिवर की दवा - Medicines for Fatty Liver in Hindi
  8. फैटी लिवर की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Fatty Liver in Hindi
  9. फैटी लिवर के डॉक्टर

फैटी लिवर के लक्षण - Fatty Liver Symptoms in Hindi

खास तौर पर फैटी लिवर की शुरूआत के दौरान अक्सर इसके लक्षण देखने को नहीं मिलते। लेकिन जब यह अधिक बढ़ जाता है, तब धीरे-धीरे इसके लक्षण उभरने लगते हैं। इसमें कुछ लोग थकान, मतली, पेट दर्द, शरीर के वजन में कमी, भूख में कमी और कन्फ्यूजन (भ्रम) जैसे लक्षणों का सामना करते हैं। पेट में लगातार दर्द होना रोजाना की समस्या बन जाती है। इन लक्षणों को विशेष रूप से विकार नहीं बताया जाता है, इसलिए आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेने और इसका ठीक से इलाज कराने की आवश्यकता है। फैटी लिवर का आमतौर पर 40-60 की उम्र के बाद पता चलता है। यह हालत इतनी गंभीर नहीं है लेकिन इसका समय पर पता ना लगना और इलाज ना होना लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है जिसे सिरोसिस कहा जाता है। इससे पीलिया जैसी अन्य बीमारियां हो सकती हैं। आपका लिवर सूजन से ग्रस्त हो सकता है। लिवर की अत्यधिक सूजन और क्षति लिवर के कार्य को प्रभावित कर सकती है।

फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक - Fatty Liver Causes & Risk Factors in Hindi

  1. फैटी लिवर का कारण है अल्कोहल का अधिक सेवन - Fatty Liver Caused by Alcohol in Hindi
  2. फैटी लिवर होने के कारण हैं आनुवंशिकी - Genetic Causes of Fatty Liver in Hindi
  3. मोटापा भी है फैटी लिवर की वजह - Fatty Liver Due to Obesity in Hindi
  4. फैटी लिवर रोग का कारण है दवाईयाँ - Fatty Liver Caused by Medication in Hindi
  5. अनुचित आहार भी देता है फैटी लिवर को बढ़ावा - Poor Diet Causes Fatty Liver in Hindi

1. फैटी लिवर का कारण है अल्कोहल का अधिक सेवन - Fatty Liver Caused by Alcohol in Hindi

अल्कोहलिक फैटी लिवर के लिए मुख्य कारणों में से एक है, अल्कोहल का अधिक सेवन करना। लिवर पर फैट का डिपॉज़िशन शराब के कारण होता है। शराब का ज्यादा सेवन करने से लिवर में सूजन आ सकती है, और लिवर क्षतिग्रस्त भी हो सकता है। (और पढ़े - शराब की लत से छुटकारा पाने के असरदार तरीके)

2. फैटी लिवर होने के कारण हैं आनुवंशिकी - Genetic Causes of Fatty Liver in Hindi

जिनके माता-पिता फैटी लिवर रोग से पीड़ित हैं, उनमें यह रोग विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए इस स्थिति के लिए आनुवंशिकी भी एक प्रमुख भूमिका निभाती है।

3. मोटापा भी है फैटी लिवर की वजह - Fatty Liver Due to Obesity in Hindi

मोटापा भी फैटी लिवर विकसित होने का खतरा पैदा करता है। शरीर में फैट प्रोटीन का उच्च स्तर भी चिंता का कारण हो सकता है। इसके अलावा मधुमेह से पीड़ित लोगों और उच्च कोलेस्ट्रॉल वालो को भी फैटी लिवर होने का खतरा अधिक हो सकता है।

4. फैटी लिवर रोग का कारण है दवाईयाँ - Fatty Liver Caused by Medication in Hindi

एस्पिरिन जैसी कुछ दवाएं भी इस रोग को विकसित करने में भूमिका निभा सकती हैं।  हेपेटाइटिस-सी के रोगियों के लिए है, फैटी लिवर की संभावना बढ़ सकती है।गर्भवती महिलाओं में भी फैटी लिवर विकसित होने के मामले देखे गए हैं। यह हार्मोनल परिवर्तनों के कारण हो सकता है, लेकिन वास्तव में जो स्थिति इसे ट्रिगर करती है, वह अभी तक ज्ञात नहीं है। (और पढ़े - हल्दी पाउडर के लाभ करें लिवर का संरक्षण)

5. अनुचित आहार भी देता है फैटी लिवर को बढ़ावा - Poor Diet Causes Fatty Liver in Hindi

उचित भोजन ना लेना और कुपोषित होने पर इसका जोखिम बढ़ जाता है। अचानक से वजन का कम होना भी एक कारण हो सकता है। हालांकि इसका सीधा असर नहीं होता,लेकिन अतिरिक्त मात्रा में आयरन का सेवन भी यह रोग पैदा कर सकता है। इसके अलावा बहुत अधिक भारी, तेलयुक्त और कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन करना और अत्यधिक नींद लेना भी इसका एक कारण है। आयुर्वेद के अनुसार ये आदतें कफ दोष का कारण बनती है जो पित्त दोष में रुकावट पैदा कर सकता है और जिससे हमें लिवर संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

(और पढ़े - लिवर को साफ और स्वस्थ रखने के लिए 10 सर्वोत्तम आहार)

फैटी लिवर के जोखिम कारक

रोगों और अन्य स्थितियों की एक विस्तृत सीमा, जो नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है। जिसमें शामिल हैं: -

  1.  उच्च कॉलेस्ट्रोल स्तर
  2. खून में ट्राइग्लिसराइड्स के उच्च स्तर
  3.  मेटाबॉलिक सिंड्रोम (चयापचय से जुड़ी कई बीमारियां)
  4. मोटापा, खासकर पेट में
  5. पोलीसिस्टिक ऑवरी सिंड्रोम (अंडाश्य से जुड़े कई रोग)
  6.  स्लीप एप्निया (नींद से जुड़ी बीमारिया)
  7. टाइप -2 डायबिटीज
  8.  अंडरएक्टिव थायरॉयड (हाईपोथायरॉइडिज़्म)
  9.  अंडर एक्टिव पिट्यूट्री ग्लैंड (हाइपोपिट्यूटरिज़्म/पीयूष ग्रंथि से जुड़ी बीमारियां)
  10.  नॉन-एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस, इस रोग में फैटी लिवर रोग होने का सबसे ज्यादा जोखिम होता है।
  11. अधिक उम्र वाले लोग (वृद्धावस्था)
  12. जिन लोगों को डायबिटीज है
  13.  जिन लोगों के शरीर में मोटापा है, मुख्य तौर पर पेट में अधित मोटापा
  14.  नॉन-एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस से नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर की बीमारी को बिना आगे अन्य परिक्षण किए पहचान पाना काफी कठिन होता है।

फैटी लिवर से बचाव - Prevention of Fatty Liver in Hindi

फैटी लिवर रोग में लिवर की चर्बी से इसकी मात्रा सामान्य 5-10% अधिक चर्बी बढ़ जाती है। यह हमारे शरीर के लिए हानिकारक होती है, और इससे थकान, पेट में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। जो लोग शराब का सेवन नहीं करते उनमें फैटी लिवर के कारण का पता डॉक्टर अभी तक ठीक से नहीं लगा पाएं हैं। लेकिन कुछ स्वस्थ संबंधी बातें जिनका पालन करके फैटी लिवर रोग जैसी समस्याओं को होने से रोका जा सकता है। साथ ही इसके होने पर इससे निजात पाई जा सकती है। जीवन शैली में कुछ बदलाव जो फैटी लिवर रोग से छुटकारा दिलाने में बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं। (और पढ़ें – लिवर को साफ करने के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं यह जूस)

  1. फैटी लिवर रोग से बचने के लिए ना करें शराब का सेवन - Avoid alcohol in fatty liver in hindi
  2. फैटी लिवर ट्रीटमेंट डाइट - Diet for fatty liver reversal in hindi
  3. फैटी लिवर के उपचार के लिए मोटापे से बचें - Exercise to treat fatty liver in hindi

फैटी लिवर रोग से बचने के लिए ना करें शराब का सेवन - Avoid alcohol in fatty liver in hindi

शराब फैटी लिवर रोग सहित कई अन्य प्रकार की लिवर की समस्याओं की प्रमुख वजह है। शराब लिवर में फैट को जमने में मदद करती है। शराब का अधिक सेवन फैटी लिवर रोग को जन्म देता है। इसलिए शराब का सेवन छोड़ दें। इससे हालत में जल्दी सुधार आने लगता है। (और पढ़ें – शराब की लत से छुटकारा पाने के असरदार तरीके)

फैटी लिवर ट्रीटमेंट डाइट - Diet for fatty liver reversal in hindi

फैटी लिवर रोग से बचने के लिए स्वस्थ आहार का सेवन करें और अधिक मात्रा में पानी पियें। आयरन से समृद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। इसके अलावा रोटी, आलू और कार्बोहाइड्रेट की उच्च मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन भी कम करना चाहिए। प्रतिदिन व्यायाम करें क्योंकि यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और आपको स्वस्थ रखने में मदद करता है। योगसन करने से भी फैटी लिवर की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। लंबे समय तक भूखे नहीं रहें, थोड़े-थोड़े समय पर कुछ खाते रहें। संतुलित आहार जिसमें विटामिन डीविटामिन ई और ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे सभी महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद हो उनको अपने आहार में शामिल करना चाहिए। भारी आहार के सेवन से बचें और आसानी से पचने वाले भोजन का सेवन करें। चीनी का सेवन बहुत कम करें। ये छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें फैटी लिवर रोग से छुटकारा दिलाने में बहुत मदद करेंगी। (और पढ़ें – कम कार्बोहाइड्रेट वाला भारतीय भोजन)

फैटी लिवर के उपचार के लिए मोटापे से बचें - Exercise to treat fatty liver in hindi

मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में फैटी लिवर रोग का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इस रोग से बचने के लिए खुद की जांच कराएं अगर जांच में फैटी लिवर के लक्षण दिखें तो तुरंत इलाज करवा लेना चाहिए। मोटे व्यक्तियों को ऐस समस्या से बचने के लिए स्वस्थ आहार का सेवन और प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान फैटी लिवर के जोखिम से बचने के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श लेते रहना चाहिए। (और पढ़ें - गर्भ धारण करने के उपाय)

फैटी लिवर का परीक्षण - Diagnosis of Fatty Liver in Hindi

फैटी लिवर का निदान या परीक्षण कैसे करें?

  1. शारीरिक परिक्षण – अगर आपके लिवर में सूजन आ गई है तो डॉक्टर आपके पेट की जांच करके लिवर के आकार में वृद्धी का पता लगा सकते हैं। अगर आपको थकान या भूक कम लगना जैसी समस्याएं होने लगी हैं, तो इस बारे में अपने डॉक्टर को बताएं। पहले लिए गए सप्लिमेंट्स, शराब का सेवन और दवाइयां आदि की पूर्ण जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
  2. खून की जांच – नियमित रूप से खून की जांच करके डॉक्टर लिवर में एंजाइम्स की मात्रा का सामान्य से अधिक होना आदि पता कर सकते हैं हैं। पर इस से फैटी लिवर होने की पुष्टी नहीं हो पाती, सूजन होने के कारण का पता लगाने के लिए आगे विश्लेषण करना जरूरी होता है।
  3. इमेंजिंग परिक्षण - लिवर में मोटापा या सूजन का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की मदद लेते हैं। अल्ट्रासाउंड टेस्ट द्वारा ली गई तस्वीर से लिवर का अतिरिक्त मोटापा सफेद क्षेत्र के रूप में दिखाई देता है। इसके अलावा सीटी या एमआरआई स्कैन जैसे अन्य इमेंजिंग भी लिए जा सकते हैं। अल्ट्रासाउंड के जैसा एक इमेजिंग टेस्ट फाइब्रोस्कैन भी होता है। इसमें भी अल्ट्रासाउंड की तरह की ध्वनि तरंगों की मदद से लिवर के घनत्व, सूजन या मोटापा से प्रभावित क्षेत्रों की जांच की जाती है। फाइब्रोस्कैन की मदद से लिवर के सामान्य टिश्यूज़ की जांच भी की जाती है। इमेंजिंग टेस्ट से लिवर में फैट का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इसकी मदद से डॉक्टर लिवर में हो रही अन्य समस्याओं की पुष्टी नहीं कर पाते।
  4. लिवर बायोप्सी – लिवर के परिक्षण के लिए डॉक्टर सुई की मदद से लिवर का एक टुकड़ा निकालते हैं। निश्चित रूप से फैटी लिवर का पता करने का यही एकमात्र तरीका होता है इस दौरान दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर, मरीज को सामान्य बेहोशी की दवाएं दे देते हैं। बायोप्सी भी डॉक्टरों को रोग का सही कारण निर्धारित करने में मदद करता है।

फैटी लिवर का इलाज - Fatty Liver Treatment in Hindi

फैटी लिवर का उपचार कैसे करें -

फैटी लिवर के रोगियों के लिए उपचार के लिए कुछ विकल्प इस प्रकार हैं - जीवनशैली में बदलाव (व्यायाम करना, वजन घटाना,आहार सेवन आदि), दवाइयाँ, सप्लिमेंट्स (supplements), ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acids), सर्जरी, लिवर प्रत्यारोपण (liver transplantation)।

  1. वजन घटाना और व्यायाम – वजन घटाना और व्यायाम करना फैटी लिवर के मरीजों के उपचार में काफी मददगार होते हैं। लिवर फैट को कम करने के लिए शरीर का बहुत ज्यादा वजन घटाने की जरूरत नही पड़ती, शरीर से 10 प्रतिशत वजन करना काफी होता है। फुर्तीले व्यायाम करने से लिवर के फैट में कमी होती है, इसके अलावा व्यायाम से NASH की सूजन को भी कम करने में मदद करता है।
  2. दवाइयाँ और अन्य उपचार:-
    • इन्सुलिन सेन्सिटाइजर्स – मेटफोर्मिन (ग्लूकोफेज) डायबिटीज के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा है, जो कोशिकाओं की इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने का काम करती है। यह सीधे इन्सुलिन प्रतिरोध के विपरित प्रतिक्रिया करती है जो लिवर रोग और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के साथ जुड़े होते हैं। पियोग्लिटाज़ोन (एक्टोस) और रोसिग्लिटाज़ोन (एवेंडिया) दवाइयों का प्रयोग भी डायबिटीज के उपचार कि लिए किया जाता है, क्योंकि ये दवाएं भी इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं। इन दोनों दवाओं (पियोग्लिटाज़ो और रोसिग्लिटाज़ोन) से लिवर के फैट और अन्य प्रकार की लिवर समस्याओं में कमी हुई है। पियोग्लिटाज़ो निशान (scarring) की समस्या को भी कम कर देती है, जो NASH (नॉन-एल्कोहॉलिक स्टीटोहैपेटाइटिस) के कारण बनते हैं।
    • एंटीऑक्सिडेंट्स (Antioxidants) – NASH के उपचार के लिए विटामिन-E का प्रयोग भी किया जा सकता है, मगर यह हर रोगी के लिए प्रयोग नहीं की जा सकती। इसको चुनिंदा मरीजों को दिया जाता है इसके संभावित जोखिमों के बारे में मरीजों को अच्छे से जान लेना चाहिए।
    • ओमेगा-3 फैटी एसिड्स - ओमेगा -3 फैटी एसिड फैटी लिवर रोग और मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले रोगियों के लिए उचित उपचार हो सकता है। क्योंकि इन रोगियों में कार्डियोवेस्कुलर (हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी) रोग और मौत की संभावना अधिक हो जाती है।
    • लिपिड कम करने की दवा (Lipid-lowering drug) – खास तौर पर एज़ेटिमिब (ezetimibe) और स्टेटिन (statins) का उपयोग मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़े असामान्य रक्त लिपिड को सामान्य स्तर पर लाने के लिए और उनका इलाज करने के लिए किया जाता है।
  3. सर्जरी – बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric surgery), गेस्ट्रोइंटेस्टिनल (gastrointestinal) की एक सर्जरी  होती है, जिसके कारण वजन कम होने लगता है। क्योंकि मोटापा नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग के कारणों में एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। जबकि वजन कम होना नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग में लाभकारी प्रभाव दिखाता है। इसमें कोई आशचर्य नहीं है कि बेरिएट्रिक सर्जरी को नॉन-एल्कोहॉलिक रोग के लिए एक संभावित उपचार माना जाता है।
  4. लिवर प्रत्यारोपण (Liver transplantation) – जब लिवर सिरोसिस रोग ग्रस्त हो जाता है और जटिलताएं बढ़ जाती है। तो उपचार के लिए एक ही दो ही विकल्प बचते हैं या तो जटिलताओं का इलाज किया जाए जैसे ही वे लिवर में पनती हैं, या फिर रोग ग्रस्त लिवर को प्रत्यारोपित लिवर के साथ बदल दिया जाए। असल में, NASH लिवर के प्रत्यारोपण करने का तीसरा सबसे सामान्य कारण बन गया है। केवल एल्कोहॉलिक लिवर रोग और हैपेटाइटिस-सी इससे पहले आते हैं।

फैटी लिवर की जटिलताएं - Fatty Liver Complications in Hindi

फैटी लिवर से होने वाले अन्य बिमारी?

लिवर कैंसर – नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर औऱ नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस दोनों के लिए सिरोसिस मुख्य जटिलताओं में से एक है, जो लिवर में निशान या स्कारिंग (फाइब्रोसिस) का कारण बनती है। सिरोसिस लिवर में किसी प्रकार की क्षति पहुंचने से होता है, जैसे नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस के कारण सूजन बढ़ना। जैसे ही लिवर बढ़ती सूजन को रोकने की कोशिश करता है, तो इससे निशान या स्कार (फाइब्रोसिस) बनने लगते हैं। लगातार बढ़ती सूजन के साथ, फाइब्रोसिस ज्यादा से ज्यादा लिवर के ऊतकों में फैलने लगता है।

सिरोसिस की प्रतिक्रिया पर रोकथाम ना की जाए तो ये समस्याएं भी हो सकती है:-

  1. पेट में द्रवा बनना (असाइटिस/ ascites)
  2. इसोफेगस की नसों में सूजन (esophageal varices), जो फट सकती हैं और खून भी निकल सकता है।
  3. भ्रम, उनींदापन और बोलते हुए अटकना (हेपैटिक एनसेफेलोपोथी)
  4. लिवर कैंसर
  5. अंतिम चरण में लिवर फेल हो जाना (लिवर द्वारा कार्य करना बंद कर देना)
  6. नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस से ग्रस्त लोगों में से 20 प्रतिशत लोगों को सिरोसिस की समस्या हो जाती है।
Dr. Mahesh Kumar Gupta

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Dr. Raajeev Hingorani

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फैटी लिवर की दवा - Medicines for Fatty Liver in Hindi

फैटी लिवर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
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Hepatreat खरीदें
Aptivin खरीदें
Hepawin खरीदें
Hepmend खरीदें
Lornit खरीदें
Cipron (Gujarat Terce) खरीदें
Satmax खरीदें
Hepacure खरीदें
Hepa Merz खरीदें
Cyprosin खरीदें

फैटी लिवर की ओटीसी दवा - OTC medicines for Fatty Liver in Hindi

फैटी लिवर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
Divya Liv D 38 Tablet खरीदें
Baidyanath Liverex खरीदें

References

  1. Leon A. Adams, Paul Angulo, and Keith D. Lindor. Nonalcoholic fatty liver disease. CMAJ. 2005 Mar 29; 172(7): 899–905. PMID: 15795412.
  2. Kalra S, Vithalani M, Gulati G, Kulkarni CM, Kadam Y, Pallivathukkal J, Das B, Sahay R, Modi KD. Study of prevalence of nonalcoholic fatty liver disease (NAFLD) in type 2 diabetes patients in India (SPRINT). J Assoc Physicians India. 2013 Jul;61(7):448-53. PMID: 24772746.
  3. Min-Sun Kwak, Donghee Kim. Non-alcoholic fatty liver disease and lifestyle modifications, focusing on physical activity. Korean J Intern Med. 2018 Jan; 33(1): 64–74. Published online 2017 Dec 6. PMID: 29202557.
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Fatty Liver Disease
  5. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Liver - fatty liver disease
  6. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Eating, Diet, & Nutrition for NAFLD & NASH
  7. American Liver Foundation [Internet]. New York: American Association for the Study of Liver Diseases; The Progression of Liver Disease.
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