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हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) क्या होता है?

व्यस्त जीवन शैली, अनुचित आहार और तनाव कई रोगों और विकारों को जन्म देते हैं। उनमे से एक ऐसी बीमारी है हाई बीपी (हाई ब्लड प्रेशर, उच्च रक्तचाप)। उच्च रक्तचाप अब एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बन गई है। उच्च रक्तचाप के समय आपके शरीर में रक्त का प्रवाह बहुत तेज़ हो जाता है। इस स्थिति में आपके हृदय को अधिक काम करना पड़ता है।

हमारा हृदय धमनियों के माध्यम से खून को शरीर में पंप करता है जिससे हमें जीवन मिलता है। हमारी धमनियों में बहने वाले रक्त के लिए एक निश्चित दबाव ज़रूरी है। जब किसी वजह से यह दबाव अधिक बढ़ जाता है, तब धमनियों पर दबाव पड़ता है और इस स्थिति को उच्च रक्तचाप (हाइ ब्लड प्रेशर) कहा जाता है।

लगातार उच्च रक्तचाप रहना हमारे शरीर को कई तरह की हानि पहुंचा सकता है। यहाँ तक की हार्ट फेल भी हो सकता है। 

(और पढ़ें – हार्ट फेल होने के कारण)

दबाव दो प्रकार का होता है – सिस्टोलिक (Systolic pressure) और डायस्टोलिक (Diastolic pressure)। जब आपका सिसटोलिक ब्लड प्रेशर 140 mmHg या इससे ऊपर और डाइयासटोलिक ब्लड प्रेशर 90 mmHg या इससे ऊपर एक हफ्ते से ज़्यादा रहता है, तब इस स्थति को उच्च रक्तचाप कहते हैं।

(और पढ़ें - लो ब्लड प्रेशर)

  1. नार्मल ब्लड प्रेशर रेंज कितना होना चाहिए - Normal blood pressure range kitna hona chahiye
  2. हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) के लक्षण - Symptoms of High Blood Pressure in Hindi
  3. हाई बीपी के कारण - High BP Causes and Risk Factors in Hindi
  4. हाई ब्लड प्रेशर से बचाव - Prevention of Hypertension in Hindi
  5. हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) का परीक्षण - Diagnosis of High BP (High Blood Pressure) in Hindi
  6. हाई बीपी पर वीडियो - High BP par hindi video
  7. हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) का इलाज - High BP (High Blood Pressure) Treatment in Hindi
  8. हाई बीपी से होने वाली जटिलताएं - High Blood Pressure Complications in Hindi
  9. हाई बीपी में सावधानियां
  10. हाई बीपी की दवा - Medicines for High BP (High Blood Pressure) in Hindi
  11. हाई बीपी की ओटीसी दवा - OTC Medicines for High BP (High Blood Pressure) in Hindi

नार्मल ब्लड प्रेशर रेंज कितना होना चाहिए - Normal blood pressure range kitna hona chahiye

नार्मल ब्लड प्रेशर रेंज कितना होना चाहिए - Normal blood pressure range kitna hona chahiye

रक्तचाप आमतौर पर पांच श्रेणियों में बांटा जाता है:

हाइपोटेंशन (कम रक्तचाप)

  • सिस्टोलिक mmHg 90 या उससे कम
  • डायस्टोलिक mmHg 60 या उससे कम

सामान्य रक्तचाप

  • सिस्टोलिक mmHg 90-119
  • डायस्टोलिक mmHg 60-79

प्रीहाइपरटेंशन

  • सिस्टोलिक mmHg 120-139
  • डायस्टोलिक mmHg 80-8 9

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) चरण 1

  • सिस्टोलिक mmHg 140-159
  • डायस्टोलिक mmHg 90- 99

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) चरण 2

  • सिस्टोलिक mmHg 160 से अधिक
  • डायस्टोलिक mmHg 100 से अधिक

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) के लक्षण - Symptoms of High Blood Pressure in Hindi

हाई ब्लड प्रेशर कई बार एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि अधिकांश लोगों को कोई लक्षण अनुभव नही होते हैं जब तक उन्हें दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी कोई गंभीर समस्या नहीं हो जाती। हालांकि कुछ लोगों को निम्न लक्षण हो सकते हैं:

जैसा कि ऊपर बताया गया है, आमतौर पर उच्च रक्तचाप की वजह से कोई लक्षण नजर नही आते हैं, इसलिए उच्च रक्तचाप और इसकी जटिलताओं से बचने के लिए, रक्तचाप के स्तर की नियमित रूप से जाँच कराना आपके लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप इसको हल्के में लेते हैं तो यह दिल के दौरे, स्ट्रोक, हार्ट फेल होने या अंधेपन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इससे मृत्यु भी हो सकती है।

इसको नज़रअंदाज़ करना एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सूचक हो सकता है। हाई बीपी के लिए आपको अपने आहार और जीवन शैली में कुछ स्वस्थ परिवर्तन करने होंगे। साथ ही डॉक्टर से परामर्श करें। थोड़ा सा ध्यान रखने से आप इस परेशानी से बच सकते हैं। हमेशा मुस्कुराएं और हाई बीपी से बचने के लिए तनाव से दूर रहें।

हाई बीपी के कारण - High BP Causes and Risk Factors in Hindi

ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है?

जब उच्च रक्तचाप के कारणों की बात होती है तब इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

1. प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर: 

इसके कारणों की पहचान नहीं हो पाई है। यह समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है। 

2. सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर: 

कुछ लोगों को हाई बीपी किसी अन्य कारण से हो जाता है जैसे की किसी दवा का दुरुपयोग या कोई बीमारी। कुछ वजह जिनसे सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, इस प्रकार हैं:

  • बढ़ती उम्र
    उम्र बढ़ने के साथ साथ उच्च रक्तचाप होने का जोखिम अधिक होता है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में हाई ब्लड प्रेशर ज्यादा आम है हालांकि, 60 वर्ष की आयु के बाद दोनों पुरुषों और महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर समान रूप से अतिसंवेदनशील होता है।
     
  • अनुवांशिकता
    अगर आपके परिवार में किसी करीबी सदस्य (माता या पिता) को उच्च रक्तचाप है, तो आपको यह रोग होने की संभावना काफी अधिक हो सकती है। एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन में आठ सामान्य आनुवंशिक असमानताओं (genetic differences) की पहचान की गई है जो उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ा सकती है।
     
  • मोटापा
    सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में अधिक वजन वाले और मोटापे से ग्रस्त लोगों में उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
     
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी
    व्यायाम की कमी के साथ-साथ एक गतिहीन जीवनशैली से भी उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • धूम्रपान
    धूम्रपान करने के कारण रक्त वाहिकाएं संकीर्ण हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप होता है। धूम्रपान से रक्त में ऑक्सीजन की भी कमी हो जाती है, जिससे हृदय क्षतिपूर्ति के लिए तेजी से पंप होता है, जिससे रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है। (और पढ़ें – सिगरेट पीने के नुकसान)
     
  • शराब का सेवन
    शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग नियमित रूप से शराब पीते हैं उनको सामान्य लोगों की तुलना में सिसटोलिक रक्तचाप अधिक होता है। उन्होंने पाया कि सिसटोलिक रक्तचाप का स्तर उन लोगों की तुलना में लगभग 7 mmHg अधिक है जो अक्सर नहीं पीते हैं। (और पढ़ें – शराब छोड़ने के तरीके)
     
  • ज्यादा नमक खाना
    शोधकर्ताओं ने बताया कि ज़्यादा नमक खाने वालो की तुलना में जहां लोग कम नमक खाते हैं वहाँ रक्तचाप कम होता है।
     
  • वसायुक्त आहार का ज्यादा सेवन
    कई स्वास्थ्य पेशेवरों का कहना है कि वसा वाला आहार उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाता है। अधिकांश आहार विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या यह नहीं है कि हम वसा का कितना सेवन करते हैं, बल्कि समस्या यह है कि हम किस तरह की वसा का सेवन करते हैं। एवोकाडो, नट्स, जैतून के तेल जैसे पौधों से निकली हुई वसा आपके लिए अच्छी होती है। जबकि सॅचुरेटेड फ़ैट और ट्रांस फ़ैट आपके लिए खराब होती है।
     
  • मानसिक तनाव 
    विभिन्न अध्ययनों के अनुसार मानसिक तनाव का रक्तचाप पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
     
  • शुगर की बीमारी (डायबिटीज)
    डायबिटीज के रोगियों को उच्च रक्तचाप होने का जोखिम अधिक होता है। टाइप 1 मधुमेह के रोगियों में हाई ब्लड शुगर की वजह से हाइपरटेंशन होने का जोखिम अधिक होता है। रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखना हाई बीपी होने के जोखिम को कम करता है। टाइप 2 मधुमेह वाले लोगञ को उच्च रक्त शर्करा के साथ-साथ अधिक वजन और मोटापा, कुछ दवाएं और कुछ हृदय रोग जैसे कारणों से भी उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है।
     
  • गर्भावस्था में भी हो सकता है हाई बीपी
    गर्भवती महिलाओं को उसी उम्र की आम महिलाओं की तुलना में उच्च रक्तचाप विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। गर्भावस्था के दौरान यह सबसे सामान्य चिकित्सा समस्या है। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी में हाई बीपी)

हाई बीपी होने का जोखिम किन वजहों से बढ़ जाता है?

हाई बीपी के कई सारे जोखिम कारक हो सकतें हैं, जिनमें से कुछ यह हैं :

  • उम्र: हाई बीपी होने का जोखिम आपकी उम्र के साथ बढ़ता जाता है। हाई बीपी 40 से 45 वर्ष के पुरुषों में आम है। अधिकतर औरतों में हाई बीपी की समस्या 65 की आयु के बाद होती है।
  • पारिवारिक इतिहास: हाई बीपी की समस्या अक्सर एक परिवार की कई या सभी सदस्यों को हो जाती है।
  • वजन बहुत अधिक होना: जितना ज़्यादा आपका वजन होगा, उतनी ज़्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को ऊतकों तक पहुंचाने के लिए खून की ज़रूरत पड़ेगी। जितना ज़्यादा रक्त वाहिकाओं में रक्त का बहाव बढ़ेगा, उतना ज़्यादा दबाव हृदय की दीवार पर पड़ेगा।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय न होना: जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होते उनका हृदय दर ज़्यादा होता है। जितना ज़्यादा हृदय दर होगा, उतनी ज़्यादा मेहनत हृदय को हर एक संकुचन में लगेगी और उतना ज्यादा दबाव धमनियों पर पड़ेगा। शारीरिक गतिविधि कम होने से वजन बढ़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
  • तम्बाकू का इस्तेमाल करना: न सिर्फ धूम्रपान और तम्बाकू चबाने से अस्थायी रूप से रक्तचाप बढ़ जाता है, बल्कि तम्बाकू में मौजूद रसायन धमनियों की दिवार की अंदरूनी परत को नष्ट कर देते हैं। जिसकी वजह से धमनियां संकीर्ण हो जाती हैं और रक्तचाप बढ़ जाता है। सेकंड हैंड स्मोकिंग (धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आना) से भी रक्त चाप बढ़ जाता है।
  • आहार में पोटैशियम की कमी: पोटैशियम हमारी कोशिकाओं में सोडियम का संतुलन बनाने में मदद करता है। अगर आहार में पोटैशियम की कमी होगी, तो खून में सोडियम की मात्रा बढ़ जाऐगी।
  • आहार में विटामिन डी की कमी: आहार में विटामिन डी की कमी से रक्तचाप बढ़ सकता है । विटामिन डी की कमी से किडनी द्वारा बनाये जाने वाले एंजाइम पर असर पड़ेगा जिससे रक्त चाप बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
  • शराब का अत्यधिक सेवन करना: अधिक समय तक शराब का सेवन करने से , हृदय को नुक्सान पहुंच सकता है। शराब का सेवन संतुलन में करें।
  • तनाव - अधिक तनाव के कारण स्थाई रूप से रक्त चाप बढ़ जाता है। तनाव के खाना ज़्यादा न खाएं, और न ही तम्बाकू और शराब का सेवन करें। इससे आपकी हाई बीपी की समस्या और बढ़ जाएगी।
  • कुछ पुरानी बीमारियां: कुछ पुरानी बिमारियों की वजह से रक्त चाप बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है, जैसे कि गुर्दे की बीमारी, डायबिटीज, सोते वक़्त सांस लेने में दिक्कत।

हालाँकि, हाई बीपी वयस्कों में आम बात है, छोटें बच्चों को भी हाई बीपी का जोखिम है। कुछ बच्चों में, हाई बीपी गुर्दे और हृदय में परेशानी की वजह से होता है। लेकिन बढ़ते हुए बच्चों में ख़राब जीवनशैली की आदत जैसे कि अस्वस्थ आहार, मोटापा और व्यायाम की कमी से हाई बीपी होता है।

हाई ब्लड प्रेशर से बचाव - Prevention of Hypertension in Hindi

बीपी बढ़ने से कैसे रोक सकते हैं?

यदि आपको हाई बीपी होने का खतरा अधिक हो, तो आप इसकी गंभीरता और जटिलताओं को कम करने के लिए निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं:

  • स्वस्थ आहार लें:
    अपने आहार में हृदय को स्वस्थ बनाने वाले खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे शामिल करें। एक दिन में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सात से अधिक बार फल और सब्जियों को खाने का लक्षय बनाएं और इस लक्षय को पूरा करने के लिए पहले दो सप्ताह में अपने नियमित डाइट में एक बार का खाना और बढ़ा दें। दो सप्ताह पूरे होने के बाद एक बार का खाना और बढाएं दें। जब तक आप दिन में दस बार फल या सब्जियां का सेवन नहीं करते तब तक ऊपर बताई गई प्रक्रिया को जारी रखें। (और पढ़ें - संतुलित आहार)
     
  • चीनी कम खाएं:
    चीनी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फेलेवर वाला दही, सीरियल्स (cereals: कृत्रिम रूप से पोषक तत्व मिलाए गए खाद्य पदार्थ) और कोल्ड ड्रिंक आदि का कम से कम सेवन करें। कई तरह के पैकेट वाले खाने में चीनी की मात्रा डिब्बे पर बताई जाती है। तो इस तरह का खाना खाने से पहले इसके लेबल को अवश्य पढ़ें। 
     
  • वजन कम करें:
    आप अपने डॉक्टर से पूछकर वजन कम करने का एक स्वस्थ लक्ष्य तये करें। कई स्वास्थ्य संस्थाएं एक सप्ताह में 450 से 900 ग्राम वजन कम करने की सलाह देती हैं। इसके लिए आप अपने रोजाना के सामान्य आहार में 500 कैलोरी कम लेना शुरू करें। इसके बाद आपको वजन कम करने वाली शारीरिक गतिविधियों को चुनना चाहिए। अगर आपको सप्ताह में पांच दिन एक्सरसाइज करने में बेहद परेशानी आ रही है, तो ऐसे में आप अपने रोजाना के कामों को नियमति रूप से करते हुए केवल एक दिन ही एक्सरसाइज करने से शुरुआत करें और इसी तरह से एक एक दिन को बढ़ाते जाएं। (और पढ़ें - वजन कम करने के तरीके)
     
  • अपने ब्लड प्रेशर पर नजर रखें:
    हाई बीपी की जल्द से जल्द पहचान करना, इस समस्या को कम करने और इसकी जटिलता से बचाव करने का बेहतर विकल्प होता है। इसके लिए आप डॉक्टर से नियमित बीपी की जांच करा सकते हैं या डॉक्टर के कहने पर आप बीपी को चेक करने वाली मशीन खरीदकर घर में ही अपने बीपी की स्थिति जान सकते हैं।

    बीपी की स्थिति पर नजर रखने में आप डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाएं। इससे डॉक्टर को अन्य गंभीर समस्याएं शुरू होने से पहले ही उनकी पहचान करने में मदद मिलती है।  

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) का परीक्षण - Diagnosis of High BP (High Blood Pressure) in Hindi

हाई बीपी की जांच कैसे की जाती है?

हाई बीपी का परीक्षण करना अत्यंत सरल है। यदि आपका बीपी बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो डॉक्टर एक हफ्ते में कई बार बीपी टेस्ट करने की सलाह देते हैं। केवल एक बार के टेस्ट से उच्च रक्तचाप का परीक्षण नहीं किया जाता है। डॉक्टर यह जानना चाहते है कि समस्या निरंतर रहती है कि नहीं क्योंकि कई बार पर्यावरण के कारण भी रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है और वैसे भी बीपी का स्तर पूरे दिन बदलता रहता है।

यदि आपका बीपी बढ़ा हुआ रहता है, तो डॉक्टर अंतर्निहित स्थितियों का पता करने के लिए और परीक्षण करेंगे। ये परीक्षण निम्न हो सकते हैं:

ये परीक्षण डॉक्टर को हाई बीपी के अन्य संभावित कारणों की पहचान करने में मदद करते हैं।

इस दौरान डॉक्टर हाई बीपी का इलाज शुरू कर सकते हैं। प्रारंभिक उपचार किसी बड़ी क्षति के जोखिम को कम कर सकता है। 

स्वचालित मशीनें बीपी के बारे में जानकारी प्रदान कर सकती है, लेकिन उनमें कुछ त्रुटियां हो सकती हैं। इन मशीनों से किये गए टेस्ट का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे बैंड का सही आकार और मशीनों का उचित उपयोग।

हाई बीपी पर वीडियो - High BP par hindi video

इस वीडियो में डॉ आयुष पांडे से जानें हाई बीपी के बारे में सभी जरूरी बातें:

हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) का इलाज - High BP (High Blood Pressure) Treatment in Hindi

हाई बीपी का उपचार कैसे किया जाता है?

हाई बीपी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे दिल का दौरा, दिल का रुक जाना और गुर्दे का रोग जैसी बीमारियां हो सकती हैं। हाई बीपी के इलाज का लक्ष्य होता है कि हाई बीपी को कम किया जाए और अपने ज़रूरी अंग जैसे कि दिमाग, गुर्दा और हृदय को ख़राब होने से बचाया जाए। अनुसन्धान में यह पाया गया है कि हाई बीपी के इलाज से स्ट्रोक में 35%-40%, दिल के दौरे में 20%-25%, और दिल के रुक जाने में 50% से ज़्यादा कमी आई है।

हाई बीपी को अब ऐसे वर्गीकृत किया जाता है :

  • 60 साल से कम आयु वाले लोगों में रक्त चाप 140/90 से ज़्यादा होना
  • 60 साल से ज़्यादा आयु लोगों में रक्त चाप 150/90 से ज़्यादा होना

उच्च रक्त से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करना चाहिए जैसे कि स्वस्थ आहार खाना, धूम्रपान से दूर रहना,  ज़्यादा व्यायाम करना आदि। दवाइयों द्वारा इलाज उन लोगों का किया जाता है जिनकी उम्र 60 साल से कम होती है और रक्त चाप 140/90 से ज्यादा होता है और उन लोगों का इलाज भी होता है जिनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा होती है और रक्त चाप 150/90 से ज्यादा होता है। 

हाई बीपी का इलाज जीवनशैली में परिवर्तन करने से और संभवतः दवा चिकित्सा द्वारा किया जाता है -

हाई बीपी के इलाज के लिए दवाइयां

हाई बीपी को ठीक करने के लिए बहुत सारी दवाइयां उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ यह हैं :

  • एंजियोटेनसिन-परिवर्तित एंजाइम (ऐस) अवरोधक (Angiotensin-converting enzyme – ACE inhibitors)
  • एंजियोटेनसिन द्वितीय रिसेप्टर ब्लॉकर्स (Angiotensin II receptor blockers - ARBs)
  • मूत्रवर्धक (Diuretics)
  • बीटा अवरोधक (Beta-blockers)
  • कैल्शियम चैनल अवरोधक (Calcium channel blockers)
  • अल्फा ब्लॉकर्स (Alpha-blockers)
  • अल्फा-एगोनिस्ट (Alpha-agonists)
  • रेनिन अवरोधकों (Renin inhibitors)
  • संयोजन दवाएं
    • अक्सर जिन लोगों को हाई बीपी है उन्हें पहले मूत्रवर्धक दवा (Diuretics) लेने की सलाह दी जाती है।
    • अगर आपको कोई  चिकित्सिक समस्या है तो आपके डॉक्टर मूत्रवर्धक दवा के आलावा कोई और दवा भी शुरू कर सकते है। उदहारण के तौर पर, ACE अवरोधक उन लोगों को दिया जाता है जिन्हे मदुमेह होता है। अगर एक दवाई काम नहीं करती तो दवाई बढ़ा दी  जाती है या बदल दी जाती है।
    • अगर आपका रक्तचाप सामान्य रक्तचाप से 20/10 अंक ज़्यादा है, तो आपके डॉक्टर आपकी दवाइयों की शुरुआत दो दवाइयों या संयोजक दवाओं से करेंगे।
चेतावनी: डॉक्टर से पूछे बिना कोई भी दवाई न लें।

हाई बीपी की लगातार जांच कराना

हाई बीपी की दवाइयां लेने के बाद, जब तक आपका ब्लड प्रेशर ठीक न हो जाए आप अपने डॉक्टर से महीने में कम से कम एक बार तो ज़रूर मिलें। साल में एक या दो बार आपके डॉक्टर आपके गुर्दे का स्वास्थय जांचने के लिए आपके खून में मौजूद पोटैशियम (मूत्रवर्धक दवा इसे कम करती हैं और ACE अवरोधक और ARB दवा इसे बढ़ा देती हैं) और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स और बीयूएन/क्रिएटिनिन (BUN/creatinine) का स्तर जानने के लिए जांच करेंगे।

अगर आपका रक्तचाप ठीक जो जाता है, तब भी आप अपने डॉक्टर से हर तीसरे से छटे महीने तक मिलें।

हाई बीपी को ठीक करने के लिए जीवनशैली में परिवर्तन

अच्छी जीवनशैली का हाई बीपी को ठीक करने में और होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। आप अपने हाई बीपी में कमी निम्लिखित जीवन शैली परिवर्तन द्वारा ला सकतें है:

  • अगर आपका वजन अधिक है तो आप तुरंत वजन कम करें। (और पढ़ें - बीएमआई)
  • धूम्रपान करना छोड़ दें।
  • स्वस्थ आहार खाएं जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा फल, सब्ज़ियां, कम वसा वाले डेयरी उत्पाद हों।  
  • अगर आपको हाई बीपी है तो आप अपने आहार में सोडियम की मात्रा 1500 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम करें। स्वस्थ व्यसक यह कोशिश करें कि वह सोडियम का सेवन प्रतिदिन  2300 मिलीग्राम से ज़्यादा न करें (तक़रीबन नमक की एक छोटी चम्मच)।
  • रोज़ाना एरोबिक व्यायाम करना (जैसे कि रोज़ाना 30 मिनट तक तेज चलना)।
  • शराब के सेवन पर नियंत्रण रखना।

रक्त चाप को कम करने के साथ-साथ यह सब उपायें हाई बीपी की दवाइयों की प्रभावशीलता बढ़ाते हैं।

कुछ अन्य टिप्स

उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) का मुख्य कारण हमारी अनुचित जीवन शैली है। खराब आहार, व्यायाम की कमी, तनाव आदि उच्च रक्तचाप के कारण हैं। इस बीमारी का इलाज समस्या के अंदर ही है। आप अपने आहार और जीवन शैली में कुछ बदलावों से उच्च रक्तचाप को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं। यहाँ आपको हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए अपने आहार और जीवन शैली में थोड़ा परिवर्तन करने के उपाय बताये गए हैं। इनकी मदद से आप अपने हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकते हैं:

  • उच्च रक्तचाप के लिए सही आहार
    आहार किसी भी बीमारी के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उचित आहार आपके उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। आप जो कुछ भी खा रहे हैं, उसका पूरा ध्यान रखें। आप अपने भोजन को धीरे से अच्छे से चबा कर खाएं। खाना सही समय पर ही खाएं। रात को देर से भोजन करने से बचें।
    • क्या खाएं -
      आप अपने पूरे दिन के आहार में नमक की मात्रा 1500-2400 मिली ग्राम तक ही सीमित रखें। आप सब्जियों को कच्चे रूप में ही खाने की कोशिश करें। अपने आहार में शाकाहार का ही सेवन करें क्योंकि अत्यधिक प्रोटीन युक्त आहार का सेवन आपके लिए अच्छा नहीं होगा। आप को तरबूज, नारंगी, केले, सेब, आम, नाशपाती, पपीता और अनानास जैसे फल का सेवन करना चाहिए जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए बहुत अच्छे होते हैं। तरबूज के बीज का सेवन उच्च रक्तचाप के लिए एक शक्तिशाली उपचार है। आप अपने आहार में सलाद के रूप में खीरा, गाजर, मूली, गोभी, प्याज और टमाटर का सेवन करें जिससे आपको अपने उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। आप अपने आहार के रूप में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और फाइबर का सेवन करें क्योंकि यह आपके दिल को स्वस्थ रखने में मदद करेंगे।
    • क्या नहीं खाएं -
      वसायुक्त भोजन का सेवन न करें क्योंकि इससे अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है जो आप के उच्च रक्तचाप के स्तर को और बढ़ा सकता है। मांस और अंडों का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब और धूम्रपान करने से बचें, शराब का सेवन कभी-कभी कर सकते हैं (लेकिन दो ड्रिंक्स से अधिक नहीं)। धूम्रपान से हृदय की धड़कन तेज हो जाती है जिससे रक्तचाप का स्तर बढ़ता है। मसाला, मक्खन, घी, आचार, चाय और कॉफी का अत्यधिक मात्रा में सेवन नहीं करें। इनके अधिक मात्रा में सेवन करने से आपकी उच्च रक्तचाप की समस्या और बढ़ सकती है इसलिए इनका सेवन कम मात्रा में ही करें। कैफीन से बचें क्योंकि यह आपके रक्तचाप को और बढ़ा सकता है। बेकिंग सोडा को डाइट में शामिल न करें।
       
  • हाई बीपी के लिए योग और व्यायाम
    अधिक वजन होने पर हृदय पर वजन बढ़ता है, इस प्रकार हृदय के कार्य पर बुरा असर पड़ता है। नियमित शारीरिक व्यायाम न केवल आप को स्वस्थ रखता है, यह शरीर का वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है और यह बेहतर रक्त परिसंचरण में भी मदद करता है। लेकिन अधिक व्यायाम करने से बचें। आप केवल 30 मिनट पैदल चलें; यह आप के लिए फायदेमंद होगा। इससे आप को सूरज की रोशनी से आवश्यक विटामिन डी भी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। विटामिन डी की कमी के कारण भी उच्च रक्तचाप की समस्या होती है।

    योगासन का अभ्यास भी आप के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इसके लिए आप धनुरासन, ताड़ासन, वज्रासनशलभासन और भुजंगासन जैसे योगासन कर सकते हैं। ये आपकी उच्च रक्तचाप की समस्या में बेहद फायदेमंद हैं। प्राणायाम और ध्यान जैसे विश्राम के अभ्यासों से अपने आप को तनावमुक्त रख सकते हैं। उच्च रक्तचाप के मरीज को 90 मिनट प्रतिदिन हल्का व्यायाम जैसे सैर करना आदि की सलाह दी जाती है।
     
  • ब्लड प्रेशर कम करने के लिए तनाव कम करें
    उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए तनाव से दूर रहना महत्वपूर्ण है। तनाव और दुख हृदय रोग की समस्या को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए तनावपूर्ण स्थितियों से बचने और अपने आप को खुश रखने का प्रयास करें। इसके लिए आप संगीत सुन सकते हैं, प्राणायाम कर सकते हैं या और कुछ भी जो आपको ख़ुशी दे।

हाई बीपी से होने वाली जटिलताएं - High Blood Pressure Complications in Hindi

हाई बीपी से हमारी धमनियों की दीवारों पर बहुत ज़्यादा तनाव पड़ता है। जिससे हमारी रक्त कोशिकाओं और हमारे शरीर में मौजूद अंगो को नुक्सान पहुँचता है। जितना ज़्यादा रक्त चाप होगा,  उतना ज़्यादा वह अनियंत्रित रहेगा और उतना ज़्यादा नुक्सान होगा।

हाई बीपी होने से निम्नलिखित चीज़ें हो सकती हैं :

  • दिल का दौरा -
    हाई बीपी से हमारी कोशिकाएं मोटी और सख्त हो जाती हैं,  जिसकी वजह से दिल का दौरा या दूसरी जटिलताएं हो जाती हैं।
     
  • धमनीविस्फार (Aneurysm) -  
    हाई बीपी से हमारी कोशिकाएं कमज़ोर और बाहर की तरफ उभर जातीं हैं, जिससे धमनीविस्फार (धमनी  की दीवार में अत्यधिक सूजन) बन जाता है। धमनीविस्फार टूटने से यह जान लेवा भी हो सकता है।
     
  • हृदय का रुक जाना -
    अपने कोशिकाओं में उच्च दबाव के खिलाफ रक्त पंप करने से, हमारे हृदय की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं। अंत में, मोटी मांसपेशियों को हमारे शरीर की जरूरत पूरी करने में दिक्कत होगी और वह पर्याप्त खून को पंप नहीं कर पायेगा, जिसकी वजह से हार्ट फेल हो सकता है।
     
  • गुर्दे में कमज़ोर और संकुचित रक्त कोशिकाओं का होना -
    इससे आपके गुर्दे ठीक से काम नहीं कर पाते हैं।
     
  • आँखों की रक्त कोशिकाओं का कमजोर या संकुचित होना:
    इससे आँखों की रौशनी जा सकती है।
     
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) -  
    यह लक्षण शरीर के चयापचय से समन्धित विकारों का समूह होता है। उदहारण के तौर पर - कमर बढ़ना, हाई ट्राइग्लिसराइड्स (high triglycerides), लो हाई-डेन्सिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल (low high-density lipoprotein (HDL), जिसे “अच्छा कोलेस्ट्रॉल” भी कहा जाता है), हाई बीपी, इंसुलिन का स्तर ज़्यादा होना। ऐसी परिस्थितियां आप में मधुमेह, हृदय रोग और दिल का दौरा जैसी बीमारियां पैदा कर सकती हैं।
     
  • समझने या याद रखने में दिक्कत -
    अनियंत्रित हाई बीपी आपके सोचने, याद रखने और सीखने की क्षमता पर असर दाल सकता है। याददाश्त सम्बन्धी समस्याएं हाई बीपी वाले लोगों में आम हैं।

हाई बीपी में सावधानियां

हाई बीपी में क्या सावधानियां बरतें?

निम्नलिखित सावधानियां हाई बीपी कम करने में मददगार हैं :

  • आहार में सोडियम की मात्रा को कम करें: हाई बीपी से ग्रस्त लोग और वे लोग जिन्हें हृदय रोग का जोखिम है, उन्हें सोडियम का दैनिक सेवन 1,500 मिलीग्राम तक सीमित करना चाहिए। इसका सबसे अच्छा उपाय घर पर बना खाना खाना है। बाहर का भोजन या पैक्ड खाद्य पदार्थ खाने से बचें क्योंकि अक्सर इनमें सोडियम बहुत अधिक मात्रा में होता है।
  • मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में पोषक तत्व नहीं होते बल्कि केवल कैलोरी होती हैं। यदि कुछ मीठा खाना का मन करता है, तो ताजा फल खाएं। 
  • सोडियम, संतृप्त (सैचुरेटेड) व ट्रांस वसा (ट्रांस फैट) की अधिक मात्रा वाले डेयरी पदार्थों और मांस का सेवन कम करें।

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हाई बीपी की दवा - Medicines for High BP (High Blood Pressure) in Hindi

हाई बीपी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
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हाई बीपी की ओटीसी दवा - OTC medicines for High BP (High Blood Pressure) in Hindi

हाई बीपी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
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हाई बीपी से जुड़े सवाल और जवाब

सवाल एक साल के ऊपर पहले

मुझे हाई ब्लड प्रेशर है। बार-बार सुस्ती और सिरदर्द की समस्या होती है। मुझे किस डाक्टर से संपर्क करना चाहिए। कृपया बताएं।

Dr. Vikas Banerjee , {}

क्या आपने अपना बीपी किसी डाक्टर से चेक करवाया था? आपको हाइपरटेंशन है या नहीं, इसका जांच के बाद ही पता चलेगा। आप फिजीशियन से संपर्क करें।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

हाई ब्लड प्रेशर से क्या होता है?

Dr. Arvind Swamy , {}

हाई ब्लड प्रेशर होने पर रक्त वाहिकाओं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वक्त गुजरने के साथ दबाव बढ़ता जाता है, जिससे हृदयाघात और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। हाई ब्लड प्रेशर से हार्ट और किडनी से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

सामान्य तौर पर मेरे ब्लड प्रेशर की रेंज 110-70 तक रहती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से 110 से 90 तक पहुंच गई साथ ही एंग्जाइटी और चक्कर आने की समस्या भी हो रही है। क्या मुझे हाई ब्लड प्रेशर है?

Dr. Nivedita Mule , {}

आपकी मेडिकल हिस्ट्री से यही लग रहा है कि आपको डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर है। आप कार्डियोलॅाजिस्ट से संपर्क कर ईसीजी और 2 डी इकोकार्डियोग्राफी करवाएं। वे आपकी रिपोर्ट देखकर आपको आपकी समस्या बताएंगे।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

हाई ब्लड प्रेशर से होने वाले रोग कौनसे हैं?

Dr. Archana Asthana , {}

अगर हाई ब्लड प्रेशर का समय रहते इलाज न किया जाए तो आपको कई तरह की गंभीर बीमारी हो सकती है। इसमें धमनी, हृदय, मस्तिष्क, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचना मुख्य रूप से शामिल हैं। इतना ही नहीं 50 साल से उम्र ज्यादा होने पर पुरुषों की शारीरिक संबंध स्थापित करने की क्षमता में गिरावट आती है। इसके अलावा आपको नींद न आने की समस्या भी हो सकती है।

References

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  6. Chobanian AV, Bakris GL, Black HR, Cushman WC, Green LA, Izzo JL Jr, Jones DW, Materson BJ, Oparil S, Wright JT Jr, Roccella EJ. Seventh report of the Joint National Committee on Prevention, Detection, Evaluation, and Treatment of High Blood Pressure.. Joint National Committee on Prevention, Detection, Evaluation, and Treatment of High Blood Pressure. National Heart, L
  7. Thasvi Kareem, Sudha M J, Ramani PT, Ashkar Manakkalavalappil, Parvathy G. Prescription pattern of antihypertensive drugs in a tertiary care hospital in Kerala and adherence to JNC-8 guidelines.. Universal Journal of Pharmaceutical Research. 2018; 3(3): 1-3.
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