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एरिथमिया क्या है?

अनियमित दिल की धड़कन को 'हृदय अतालता' या 'एरिथमिया' कहते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका हृदय बहुत तेज या बहुत धीमी गति से धड़क रहा हो। बल्कि, इसका अर्थ यह है कि हृदय की धड़कन अपनी सामान्य ताल से नहीं चल रही है।

इसमें ऐसा लग सकता है, जैसे आपके हृदय की धड़कन घट या बढ़ रही है या बहुत तेज़ (जिसे डॉक्टर 'टेकीकार्डिया' कहते हैं) या अत्यंत धीमी गति से (जिसे 'ब्रेडीकार्डिया' कहा जाता है) चल रही है। चूँकि कुछ एरिथमिया मूक (शांत) होते हैं, इसलिए हो सकता है कि इस ओर आपका ध्यान ही न जाये।   

सबसे आम प्रकार की हृदय अतालता है एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial fibrillation)।

एरिथमिया तब होता है, जब हृदय की धड़कन को समन्वित करने वाले विद्युत संकेत ठीक से काम नहीं कर रहे हों। उदाहरण के लिए, कुछ लोग अनियमित दिल की धड़कन का अनुभव करते हैं, जिसके कारण हृदय तेज़ी से धड़कता हुआ या फड़फड़ाता हुआ महसूस हो सकता है।

कई प्रकार की हृदय अतालता हानिरहित होती हैं। हालांकि, यदि धड़कन विशेष रूप से असामान्य हैं, या एक कमजोर अथवा क्षतिग्रस्त हृदय का परिणाम हैं, तो अतालता गंभीर और संभावित घातक लक्षण उत्पन्न कर सकती है।

हृदय अतालता का उपचार अक्सर तेज, धीमी या अनियमित हृदय की धड़कन को नियंत्रित कर किया जाता है। इसके अलावा हृदय को स्वस्थ रखने वाली जीवन शैली को अपनाकर आप अतालता के जोखिम को कम कर सकते हैं। क्योंकि एक कमजोर या क्षतिग्रस्त हृदय के कारण हृदय अतालता की स्थिति गंभीर हो जाती है।

(और पढ़ें - दिल की बीमारी)

एरिथमिया की घटनाएं और प्रसार: 

सामान्य आबादी में एट्रियल फिब्रिलेशन (एएफ) का समग्र प्रसार 0.4% से 1% होने का अनुमान है। चालीस वर्ष से कम आयु वाली जनसंख्या में एएफ की घटनाएं 0.1% प्रति वर्ष हैं और 80 से अधिक आयु वर्ग में ये 2% तक बढ़ जाती हैं। एट्रियल फिब्रिलेशन की घटना और प्रसार दोनों, उम्र बढ़ने के साथ तेजी से बढ़ते हैं। एएफ की समायोजित घटना और प्रसार जीवन के प्रत्येक आने वाले दशक के लिए लगभग दोगुने हो जाते हैं और किसी भी उम्र में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में एएफ का प्रसार 50% अधिक होता है।

  1. अतालता (एरिथमिया) के प्रकार - Types of Arrhythmia in Hindi
  2. अतालता (एरिथमिया) के लक्षण - Arrhythmia Symptoms in Hindi
  3. अतालता (एरिथमिया) के कारण और जोखिम कारक - Arrhythmia Causes & Risk Factors in Hindi
  4. अतालता (एरिथमिया) से बचाव - Prevention of Arrhythmia in Hindi
  5. अतालता (एरिथमिया) का परीक्षण - Diagnosis of Arrhythmia in Hindi
  6. अतालता (एरिथमिया) का इलाज - Arrhythmia Treatment in Hindi
  7. अतालता (एरिथमिया) की जटिलताएं - Arrhythmia Complications in Hindi
  8. अतालता (एरिथमिया) में परहेज़ - What to avoid during Arrhythmia in Hindi?
  9. अतालता (एरिथमिया) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Arrhythmia in Hindi?
  10. अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) की दवा - Medicines for Arrhythmia in Hindi
  11. अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Arrhythmia in Hindi

अतालता (एरिथमिया) के प्रकार - Types of Arrhythmia in Hindi

एरिथमिया के प्रकार:

एरिथमिया के प्रकारों में निम्नलिखित शामिल हैं:-

  1. अपरिपक्व एट्रियल संकुचन (premature atrial contractions) – ये प्रारंभिक अतिरिक्त धड़कन हैं, जो एट्रिया (हृदय के ऊपरी कक्षों) से उत्पन्न होती हैं। ये हानिरहित होती हैं और इनके उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  2. अपरिपक्व वेंट्रिकुलर संकुचन (premature ventricular contractions) – ये सबसे आम हृदय अतालता में शामिल हैं और हृदय रोगों से पीड़ित या जिन लोगों को हृदय रोग नहीं है, दोनों में पाए जाते हैं। यह रुक-रुक कर चलने वाली दिल की धड़कन है, जो हम सब कभी-कभी अनुभव करते हैं।
  3. एट्रियल फिब्रिलेशन (atrial fibrillation) – एट्रियल फिब्रिलेशन एक बहुत ही आम एवं अनियमित हृदय अतालता है, जो हृदय के ऊपरी कक्षों (Atria) को असामान्य रूप से सिकोड़ देती है।
  4. एट्रियल स्पंदन (atrial flutter) यह एक प्रकार का एरिथमिया है जो कि एट्रियम में एक या अधिक तीव्र सर्किट की वजह से होता है। एट्रियल स्पंदन आमतौर पर एट्रियल फिब्रिलेशन की तुलना में ज़्यादा संगठित और नियमित होता है। इस प्रकार एरिथमिया अधिकतर हृदय रोग से ग्रसित लोगों में और हृदय शल्य चिकित्सा के बाद पहले सप्ताह में होता है। जो यह प्रायः एट्रियल फिब्रिलेशन में परिवर्तित हो जाता है।
  5. वेंट्रिकुलर टेककार्डिया (वी-टाक; V-tach) – यह हृदय के निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) से उत्पन्न होने वाली एक तीव्र हृदय ताल है। धड़कन की तीव्र दर हृदय में पर्याप्त रक्त को इकट्ठा होने से रोकती है, इसलिए हृदय शरीर में कम मात्रा में रक्त पंप कर पाता है। यह एक गंभीर एरिथमिया हो सकता है, खासकर हृदय रोग से ग्रसित लोगों में, जिनमें अधिक लक्षण हों। एक हृदय चिकित्सक को इस एरिथमिया का मूल्यांकन करना चाहिए।
  6. वेंट्रिक्युलर फिब्रिलेशन (ventricular fibrilation) – ये वेंट्रिकल्स (निलय) से निकलने वाले अनियमित और अनियोजित आवेग हैं। वेंट्रिकल्स में कम्पन होता है और ये शरीर को रक्त पंप करने में असमर्थ होते हैं।
  7. दीर्घ क्यूटी सिंड्रोम (long QT syndrome) – क्यूटी अंतराल इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) पर स्थित वह स्थान है, जो हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने और फिर ठीक होने या वैद्युत आवेगों के प्रज्वलित आवेग में बदलने और फिर रिचार्ज होने के लिए लगने वाले समय को प्रदर्शित करता है। जब क्यूटी अंतराल सामान्य से अधिक लंबा होता है, तो यह टॉरडेड डे पॉइंट्स (आइसोइलेक्ट्रिक लाइन के चारों ओर क्यूआरएस कॉम्प्लेक्स के घुमाव और आयाम में धीरे-धीरे परिवर्तन होना) के लिए खतरे को बढ़ाता है, जो कि वेंट्रिकुलर टेककार्डिया का खतरनाक रूप है।
  8. ब्रैडी एरिथमिया (bradyarrhythmias) – यह हृदय की धीमी लय है, जो दिल की विद्युत चालन प्रणाली (Electrical conduction system) में रोग से पैदा कर सकती है।
  9. साइनस नोड डिसफंक्शन (sinus node dysfunction) – यह असामान्य एसए (साइनस) नोड के कारण होने वाली हृदय की धीमी गति है।
  10. हार्ट ब्लॉक (heart block) – वैद्युत आवेगों में विलम्ब हो जाता है या यह पूर्ण रूप से ब्लॉक हो जाते हैं, जब ये साइनस नोड से वेंट्रिकल्स की तरफ जाते हैं। इस अवरोध या विलम्ब का स्तर एवी नोड या एचआईएस-पुरकिंजे प्रणाली में हो सकता है। इस स्थिति में हृदय अनियमित रूप से और अक्सर अधिक धीमी गति से धड़क सकता है।
  11. पैरक्सिज़म सूप्रविंट्रिक्यूलर टेकीकार्डिया (पीएसवीटी; PSVT)  यह एक तीव्र हृदय गति है, जो आमतौर पर नियमित ताल के साथ वेंट्रिकल के ऊपरी भाग से उत्पन्न होती है। पीएसवीटी की शुरुआत और समाप्ति अचानक होती है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं – सहायक पथ टेकीकार्डिया और एवी नोडल रीएन्ट्रंट टेकीकार्डिया।
    1. सहायक पथ टेकीकार्डिया (accessory pathway tachycardias) – अतिरिक्त असामान्य पथ या एट्रिया और वेंट्रिकल्स (निलय) के बीच संबंध के कारण तीव्र हृदय गति उत्पन्न होती है। आवेग अतिरिक्त मार्गों के साथ-साथ सामान्य मार्गों के माध्यम से यात्रा करते हैं। इससे आवेगों को बहुत तेज़ी से दिल के चारों ओर यात्रा करने की सुविधा मिलती है, जिसके कारण हृदय असामान्य रूप से तेजी से धड़कता है।
    2. एवी नोडल रीएन्ट्रंट टेकीकार्डिया (AV Nodal re-entrant tachycardia) – यह एवी नोड के माध्यम से निकलने वाली एवं एक से अधिक मार्गों के कारण उत्पन्न होने वाली हृदय की तीव्र गति है। यह दिल में होने वाली धकधकी, बेहोशी या हृदय की विफलता से उत्पन्न हो सकती है। कई मामलों में इसे एक सरल युक्ति का उपयोग करके समाप्त किया जा सकता है, जैसे कि श्वास पर काबू पाना। इससे संबंधित अन्य युक्तियाँ प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवर के द्वारा उपयोग की जाती हैं। कुछ दवाएं भी हृदय की तीव्र गति को रोक सकती हैं।

अतालता (एरिथमिया) के लक्षण - Arrhythmia Symptoms in Hindi

एरिथमिया के क्या लक्षण होते हैं?

अतालता मूक हो सकती है और यह कोई लक्षण उत्पन्न नहीं करती है। चिकित्सक शारीरिक परीक्षण के दौरान आपकी नाड़ी को जांचकर या एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) के माध्यम से अनियमित धड़कन का पता लगा सकते हैं।

एरिथमिया के लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:-

  1. धकधकी (दिल की धड़कन रुक-रुक कर चलने, फड़फड़ाने या ऊपर-नीचे होने की अनुभूति या आपके हृदय के तेज़ गति से धड़कने का एहसास)
  2. आपकी छाती में तेज़ धमक (Pounding) होना
  3. चक्कर आना
  4. बेहोशी
  5. कम सांस आना 
  6. सीने में बेचैनी
  7. कमजोरी या थकान (और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)

 

अतालता (एरिथमिया) के कारण और जोखिम कारक - Arrhythmia Causes & Risk Factors in Hindi

हृदय अतालता (एरिथमिया) के क्या कारण होते हैं?

एरिथमिया कई कारणों से हो सकती है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:-

  1. तत्काल पड़ने वाला दिल का दौरा 
  2. बीते समय में आये दिल के दौरे से हृदय के ऊतक का क्षतिग्रस्त होना।
  3. आपके हृदय की संरचना में परिवर्तन, जैसे कि कार्डियोमायोपैथी के कारण  
  4. आपके हृदय की धमनियों का अवरुद्ध होना (और पढ़ें - कोरोनरी आर्टरी डिजीज)।
  5. उच्च रक्तचाप (और पढ़ें - हाई ब्लड प्रेशर का इलाज)
  6. थायरॉयड ग्रंथि का अतिसक्रिय होना (हाइपरथायरायडिज्म)।
  7. थायरॉयड ग्रंथि का असामान्य रूप से निष्क्रिय होना (हाइपोथायरायडिज्म)।
  8. धूम्रपान
  9. शराब या कैफीन का बहुत अधिक सेवन 
  10. दवाओं का दुरूपयोग
  11. तनाव
  12. कुछ दवाएं और पूरक (Supplements), जिनमें ओवर-द-काउंटर (बिना डॉक्टर के पर्चे के) मिलने वाली सर्दी-जुकाम और एलर्जी की दवा और पोषण संबंधी पूरक शामिल हैं।
  13. शुगर की बीमारी (डायबिटीज)
  14. स्लीप एप्निया
  15. जेनेटिक्स इत्यादि।

एरिथमिया के जोखिम कारक क्या हैं?

कुछ कारक 'एरिथमिया' विकसित करने के आपके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं –

  1. कोरोनरी धमनी की बीमारी (अन्य हृदय की समस्याएं और पिछली हृदय शल्य चिकित्सा) – हृदय की संकीर्ण धमनियां, दिल का दौरा, असामान्य हृदय वाल्व, पूर्व हृदय शल्य चिकित्सा, हृदय की विफलता, कार्डियोमायोपैथी और अन्य हृदय की क्षति लगभग किसी भी प्रकार की अतालता के लिए जोखिम उत्पन्न करने वाले कारक हैं।
  2. उच्च रक्तचाप  यह कोरोनरी धमनी रोग के विकास के जोखिम को बढ़ाता है। यह आपके बाएं वेंट्रिकल की दीवारों को कठोर और मोटा बना सकता है, जिससे आपके हृदय के माध्यम से गुजरने वाले वैद्युत संवेगों में बदलाव हो सकता  है। (और पढ़ें - हाई बीपी का इलाज)
  3. जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease)  असामान्य हृदय के साथ पैदा होने के कारण आपके हृदय के धड़कने की ताल प्रभावित हो सकती है।
  4. थायरॉयड की समस्या – एक अति क्रियाशील या अल्प क्रियाशील थायरॉयड ग्रंथि के कारण अतालता का खतरा बढ़ सकता है।
  5. ड्रग्स और सप्लीमेंट्स  मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली खांसी और सर्दी की कुछ दवाएं और डॉक्टर के पर्चे से मिलने वाली कुछ दवाएं 'अतालता' के विकास में योगदान कर सकती हैं।
  6. शुगर की बीमारी (डायबिटीज) – अनियंत्रित मधुमेह के कारण कोरोनरी धमनी की बीमारी और उच्च रक्तचाप के विकास का जोखिम बहुत बढ़ जाता है।
  7. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया  नींद के दौरान आपकी श्वास को बाधित करने वाला यह विकार ब्रेडीकार्डिया, एट्रियल फिब्रिलेशन और अन्य अतालता के खतरे को बढ़ा सकता है।
  8. इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन – आपके रक्त में उपस्थित पदार्थों को 'इलेक्ट्रोलाइट्स' कहा जाता है, जैसे कि पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम। ये आपके हृदय में वैद्युत संवेगों (Electrical impulses) को सक्रिय और संचालित करने में मदद करते हैं। इलेक्ट्रोलाइट के बहुत अधिक या बहुत कम स्तर आपके हृदय के वैद्युत संवेगों को प्रभावित कर सकते हैं और अतालता के विकास में योगदान कर सकते हैं।
  9. अत्यधिक शराब का सेवन – बहुत अधिक शराब पीने से आपके हृदय में वैद्युत संवेग प्रभावित हो सकते हैं और एट्रियल फिब्रिलेशन के विकास की संभावना बढ़ सकती है। (और पढ़ें - शराब पीने के नुकसान)
  10. कैफीन या निकोटीन का उपयोग  कैफीन, निकोटीन और अन्य उत्तेजक अपने हृदय की धड़कन को बढ़ा सकते हैं और अत्यंत गंभीर एरिथमिया के विकास में योगदान कर सकते हैं। एम्फ़ैटेमिन और कोकेन जैसे अवैध ड्रग्स हृदय पर गंभीर असर डाल सकते हैं और कई प्रकार की अतालता को बढ़ा सकते हैं या वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन के कारण अचानक मृत्यु हो सकती है।

अतालता (एरिथमिया) से बचाव - Prevention of Arrhythmia in Hindi

हृदय​ अतालता के रोकथाम कैसे करें?

हृदय की अनियमित धड़कन से बचाव के लिए दिल को स्वस्थ रखने वाली जीवन शैली को अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सके। दिल को स्वस्थ रखने वाली जीवन शैली में शामिल हो सकते हैं –

  1. ह्रदय को स्वस्थ रखने वाला आहार खाना।
  2. अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाना।
  3. धूम्रपान से बचना। (और पढ़ें – धूम्रपान छोड़ने के घरेलू तरीके)
  4. अपने वजन को संतुलित बनाये रखना। (और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय और वजन बढ़ाने के उपाय)
  5. कैफीन और अल्कोहल का सीमित मात्रा में या बिलकुल सेवन न करना। 
  6. तनाव कम करने के उपाय करें। अत्यधिक तनाव और गुस्से से हृदय अतालता की समस्याएं हो सकती हैं। (और पढ़ें - तनाव कम करने के लिए योग)
  7. सावधानी के साथ ओवर-द-काउंटर दवाओं का उपयोग करना, क्योंकि कुछ सर्दी और खांसी की दवाओं में उत्तेजक मौजूद होते हैं, जो दिल की धड़कन को तेज़ कर सकते हैं।

अतालता (एरिथमिया) का परीक्षण - Diagnosis of Arrhythmia in Hindi

हृदय अतालता का परीक्षण कैसे किया जाता है?

हृदय की अनियमित धड़कन के परीक्षण हेतु डॉक्टर आपके लक्षणों और आपके चिकित्सा इतिहास की समीक्षा करेंगे और शारीरिक जांच करेंगे। आपके चिकित्सक इस बारे में आपसे पूछ सकते हैं या ऐसी परिस्थितियों के लिए परीक्षण कर सकते हैं, जो आपकी ह्रदय अतालता जैसी दिल की बीमारी या थायरॉयड ग्रंथि की समस्या को बढ़ा सकती हैं।  डॉक्टर हृदय अतालता के लिए विशेष रूप से हार्ट मॉनिटरिंग टेस्ट कर सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:-

  1. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) – ईसीजी के दौरान आपके हृदय की विद्युत गतिविधि का पता लगा लगाने वाले सेंसर (इलेक्ट्रोड) आपकी छाती से और कभी-कभी हाथ पैरों से जुड़े होते हैं। ईसीजी आपके दिल की धड़कन में प्रत्येक विद्युत चरण (Electrical phase) के समय और अवधि को मापता है।
  2. होल्टर मॉनिटर – इस पोर्टेबल ईसीजी उपकरण को एक दिन या उससे अधिक समय तक पहना जा सकता है, ताकि आप अपने रोज़ किये जाने वाले कार्यों के दौरान अपने हृदय की गतिविधि के बारे में जान सकें।
  3. इवेंट मॉनिटर – स्पोरेडिक अतालता के लिए आप इस पोर्टेबल ईसीजी डिवाइस को रख सकते हैं और जब आपको अतालता के लक्षण दिखाई दें, तो इसे अपने शरीर से जोड़ें और एक बटन दबाएं। इसके द्वारा चिकित्सक आपको होने वाले लक्षणों के समय आपके हृदय की ताल की जांच कर सकते हैं। 
  4. इकोकार्डियोग्राम – इस परीक्षण में एक हाथ से पकड़ा हुआ उपकरण (ट्रांसड्यूसर) आपकी छाती पर रखा जाता है। यह आपके हृदय के आकार, संरचना और गति की छवियों (Images) का निर्माण करने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है।
  5. इंप्लांटेबल लूप रिकॉर्डर – यह उपकरण हृदय की असामान्य लय का पता लगाता है और छाती की त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है।

यदि आपके डॉक्टर को इन परीक्षणों के दौरान अतालता की कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो वे अन्य परीक्षणों के साथ आपकी अतालता को बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। इन परीक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं –

  1. स्ट्रेस टेस्ट – व्यायाम करने से कुछ एरिथमिया सक्रिय हो जाते हैं या बहुत गंभीर हो जाते हैं। एक तनाव परीक्षण के दौरान जब आपकी हृदय गतिविधि की निगरानी की जाएगी,  तब आपको एक ट्रेडमिल या स्थिर साइकिल पर व्यायाम करने के लिए कहा जाएगा। अगर डॉक्टर यह निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन कर रहे हैं कि कोरोनरी धमनी रोग से अतालता पैदा हो सकती है या नहीं और आपको व्यायाम करने में कठिनाई हो रही है, तो वे एक दवा का उपयोग कर सकते हैं जिससे आपका हृदय उतना ही उत्तेजित हो सकता है, जितना व्यायाम करने से होता है।
  2. टिल्ट टेबल टेस्ट – आपके डॉक्टर इस टेस्ट का परामर्श दे सकते हैं, यदि आप बेहोशी की हालत में होते हैं. आपको एक टेबल पर सीधा लिटाया जाता है और आपके हृदय की दर व रक्तचाप पर नजर रखी जाती है। फिर टेबल को ऐसे टेढ़ा किया जाता है, जैसे कि आप खड़े हैं। इस दौरान आपके डॉक्टर यह निरीक्षण करते हैं कि आपका हृदय और तंत्रिका तंत्र, टेबल के कोण में हुए बदलाव के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है और इसे कैसे नियंत्रित कर रहा है।
  3. इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल टेस्टिंग और मैपिंग – इस परीक्षण में डॉक्टर आपके हृदय के भीतर विभिन्न भागों में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से इलेक्ट्रोड के साथ पतले एवं लचीले ट्यूब (कैथेटर्स) को डालते हैं। एक बार जगह बना लेने के बाद इलेक्ट्रोड, आपके हृदय के माध्यम से होने वाले वैद्युत संवेगों के प्रसार का आंकड़ा तैयार कर सकते हैं।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट)

अतालता (एरिथमिया) का इलाज - Arrhythmia Treatment in Hindi

एरिथमिया के उपचार की क्या विधि है?

हृदय अतालता (एरिथमिया) के लिए उपचार केवल तभी आवश्यक है, जब रोगी को अधिक गंभीर एरिथमिया या जटिलता का जोखिम हो या अगर इसका लक्षण बहुत गंभीर हों।

1. ब्रेडीकार्डिया का उपचार:

यदि ब्रेडीकार्डिया एक अंतर्निहित स्थिति के कारण होता है, तो उस स्थिति का उपचार पहले करने की आवश्यकता होती है। यदि कोई अंतर्निहित समस्या नहीं है, तो डॉक्टर पेसमेकर प्रत्यारोपण करने की सलाह दे सकते हैं। पेसमेकर एक छोटा उपकरण होता है, जो हृदय की असामान्य लय को नियंत्रित करने में सहायक होता है। इसे छाती या पेट की त्वचा के नीचे लगाया जाता है। पेसमेकर वैद्युत कम्पन (Electrical pulses) का इस्तेमाल करते हैं, ताकि हृदय तुरंत सामान्य न्यूनतम दर पर धड़कने लगे।

2. टेकिकार्डिया का उपचार:

टेकिकार्डिया के लिए कई अलग-अलग उपचार हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:-

  1. वेगल मनेवेर (Vagal maneuvers) – रोगी द्वारा स्वयं की जाने वाली कुछ गतिविधियां अतालता के कुछ प्रकारों को रोक सकती हैं, जो हृदय के निचले आधे हिस्से से ऊपर शुरू होते हैं।
  2. दवाएं – दवाएं रोगी को ठीक नहीं करेंगी, लेकिन आमतौर पर टेकिकार्डिया के एपिसोड को कम करने में प्रभावी होती हैं और हृदय के उचित विद्युत चालन (Electrical conduction) में मदद कर सकती  हैं।
  3. कार्डियो वर्शन (Cardioversion)  डॉक्टर आपके हृदय को नियमित लय के साथ धड़कने के लिए दुबारा तैयार करने हेतु बिजली के झटके या दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  4. पृथक्करण चिकित्सा (Ablation therapy) – एक या अधिक कैथेटर्स रक्त वाहिकाओं से आंतरिक हृदय में जाते हैं। इन्हें हृदय के उन हिस्सों में रखा जाता है, जिन्हें अतालता का स्रोत माना जाता है। ये कैथेटर्स उन ऊतकों के छोटे खण्डों को नष्ट कर देते हैं।
  5. आईसीडी (इम्प्लाएबल कार्डियो वायर-डीफिब्रिलेटर - Implantable cardioverter-defibrillator) –  इस उपकरण को बाएं कॉलरबोन के पास प्रत्यारोपित किया जाता है, जो हृदय की ताल (Rhythm) पर नज़र रखता है। अगर यह असामान्य रूप से तेज लय का पता लगाता है, तो सामान्य ताल पर लौटने के लिए हृदय को उत्तेजित करता है।
  6. मेज़ प्रक्रिया (Maze procedure) – हृदय में शल्य चिकित्सा के चीरों (Incisions) की एक श्रृंखला बनाई जाती है। फिर इसके ठीक होने पर निशान रह जाते हैं और ये खण्डों (Blocks) का निर्माण करते हैं। ये खंड वैद्युत संवेगों का मार्गदर्शन करते हैं, जिससे हृदय को कुशलता से धड़कने में मदद मिलती है।
  7. वेंट्रिकुलर एन्यूरिज़्म सर्जरी (Ventricular aneurysm surgery) – कभी-कभी रक्त वाहिका में मौजूद एवं हृदय की ओर जाने वाला एन्यूरिज्म (उभार) अतालता का कारण बनता है। यदि अन्य उपचार काम नहीं करते हैं, तो सर्जन एन्यूरिज्म को निकाल सकते हैं।
  8. कोरोनरी बाईपास सर्जरी – बाईपास सर्जरी में रोगी के शरीर के अन्य भागों से धमनियों या नसों को कोरोनरी धमनियों से जोड़ा जाता है। बाईपास सर्जरी हृदय के संकीर्ण भाग में की जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशी (मायोकार्डियम) में होने वाली रक्त की आपूर्ति में सुधार होता है।

अतालता (एरिथमिया) की जटिलताएं - Arrhythmia Complications in Hindi

अतालता (एरिथमिया) से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

  1. स्ट्रोक – फिब्रिलेशन (कम्पन) का मतलब है कि हृदय ठीक से पम्पिंग नहीं कर रहा है। इसके कारण रक्त एक स्थान पर इकट्ठा हो सकता है और थक्के बन सकते हैं। अगर एक थक्का हट जाता है, तो यह मस्तिष्क की धमनी की ओर जा सकता है, इसे अवरुद्ध कर सकता है और स्ट्रोक पैदा कर सकता है। स्ट्रोक से मस्तिष्क को क्षति हो सकती है और ये कभी-कभी घातक हो सकता है। (और पढ़ें - स्ट्रोक का इलाज)
  2. हृदय की विफलता (Heart failure) – दीर्घकालीन टेकीकार्डिया या ब्रेडीकार्डिया के कारण हृदय द्वारा शरीर और उसके अंगों को पर्याप्त मात्रा में रक्त पम्प नहीं किया जाता है। इसे हृदय की विफलता कहते हैं। इसे बेहतर बनाने में उपचार मदद कर सकता है। (और पढ़ें - हार्ट फेलियर के लक्षण)

अतालता (एरिथमिया) में परहेज़ - What to avoid during Arrhythmia in Hindi?

एरिथमिया की स्थिति में किस चीज से परहेज करना चाहिए?  

  1. बहुत ज्यादा नमक न खाएं – अनगिनत व्यंजनों में नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना अच्छी बात नहीं है। नमक आपके रक्तचाप को बढ़ाता है और उच्च रक्तचाप में एट्रियल फिब्रिलेशन लक्षणों की संभावना बढ़ जाती है।
  2. एरिथमिया बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों से बचें – कुछ विशेष पदार्थों को खाने और पीने से आपकी अतालता की समस्या बढ़ सकती है। ध्यान रखें कि किन पदार्थों ने आपके एरिथमिया पर प्रभाव डाला है और उनसे कैसे बचें। सामान्य तौर पर, किसी भी भोजन को कम मात्रा में खाने से अतालता नहीं बढ़ेगी, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों की ज़्यादा मात्रा आपके हृदय को उत्तेजित कर सकती है और अतालता का कारण बन सकती है या इससे भी बदतर स्थित हो सकती है। नीचे सूचीबद्ध किये गए खाद्य पदार्थों से अवगत रहें, क्योंकि ये आपकी अतालता को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही साथ अपने आहार के बारे में अपने डॉक्टर से बात करना एक अच्छा विचार है।
  3. शराब शराब सामान्य हृदय वाले लोगों में अतालता पैदा कर सकती है और हृदय की ऐसी स्थिति उत्पन्न कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अतालता की समस्या हो जाती है। जो लोग अत्यधिक शराब पीते हैं, उनका हृदय कमजोर (अल्कोहलिक कार्डियोमायोपैथी) हो सकता है। जब ऐसा होता है, तो उन्हें विभिन्न प्रकार के एरिथमिया हो सकते हैं, जिनमें एट्रियल फिब्रिलेशन, एट्रियल स्पंदन (Atrial flutter) और वेंट्रिकुलर टेककार्डिया शामिल हैं। यदि व्यक्ति शराब पीना छोड़ देता है, तो हृदय सामान्य हो सकता है और बार-बार होने वाले एरिथमिया का खतरा कम हो जायेगा। शराब हृदय कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकती है और दिल की धड़कन व सूप्रविंट्रिक्यूलर टेकीकार्डिया (Supraventricular Tachycardias) को बढ़ा सकती है। ज़्यादा मात्रा में शराब पीने के बाद एट्रियल फिब्रिलेशन हो सकता है। (और पढ़ें - शराब की लत छोड़ने के तरीके)
  4. फैड डाइट (Fad diets​) – यदि आप अतालता से ग्रसित हैं, तो वजन घटाने वाले कई आहार आपके दिल के लिए हानिकारक हो सकते हैं। फैड डाइट, जैसे कि तरल आधारित उच्च प्रोटीन का नियमित सेवन आपके रक्त में इलेक्ट्रोलाइट की सांद्रता को प्रभावित कर सकता है। यह बदले में आपके हृदय की विद्युत प्रणाली की समस्याएं उत्पन्न कर सकती है, जो सुचारु रूप से काम करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट पर निर्भर करती है। यदि आपने अतीत में अतालता का अनुभव किया है, तो आपको फैड डाइट से बचकर रहना चाहिए। एरिथमिया की पुनरावृत्ति से बचने के लिए हमेशा अपने खाने की आदतों में बड़ा बदलाव करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।

अतालता (एरिथमिया) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Arrhythmia in Hindi?

एरिथमिया में क्या खाएं?

  • अखरोट – अखरोट ओमेगा-3 और लिनोलेनिक एसिड का बहुत अच्छा स्रोत है।
  • वसायुक्त मछली – वसायुक्त मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय अतालता को स्थिर रखने में  सहायक होता है।
  • ब्राउन राइस यह मैग्नीशियम के समृद्ध स्रोत हैं। हृदय को स्वस्थ रखने में मैग्नीशियम का बहुत महत्व है। 
  • अलसी के बीज – हृदय को स्वस्थ रखने का यह सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत है। 

(और पढ़ें - हृदय को स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएं)

अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) की दवा - Medicines for Arrhythmia in Hindi

अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
Xylo(Astra) खरीदें
Xyprost Tm खरीदें
Xylocaine खरीदें
Xylocaine Heavy खरीदें
Xylocard खरीदें
Xylox खरीदें
Alocaine खरीदें
ADEL 33 खरीदें
Lcaine खरीदें
Nircaine खरीदें
Unicain खरीदें
Wocaine A खरीदें
Xylonumb खरीदें
Xynova खरीदें
Alp Plus खरीदें
SBL Dibonil Drops खरीदें
Akutim खरीदें
Zelcaine खरीदें
Alprop खरीदें
ADEL 43 खरीदें
Appatim खरीदें

अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) की ओटीसी दवा - OTC medicines for Arrhythmia in Hindi

अनियमित दिल की धड़कन (हृदय अतालता) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
Divya Hridyamrit Vati खरीदें
Dabur Chintamani Ras खरीदें

References

  1. merican Heart Association, American Stroke Association [internet]: Texas, USA AHA: Common Tests for Arrhythmia
  2. National Heart, Lung, and Blood Institute [Internet]: U.S. Department of Health and Human Services; Arrhythmia
  3. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Arrhythmia
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Arrhythmias
  5. Health On The Net. Heart arrhythmias. Australia; [internet]
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